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सरकारी स्कूलों को बेहतर बनाने की पहल CJP ने बताया नया तरीका
Ratna Netam
18 Aug 2026 4:07 PM IST

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नई दिल्ली। सरकारी स्कूलों की बदहाल व्यवस्था और शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने बड़ा अभियान शुरू किया है। ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान के तहत उन्होंने सरकारी स्कूलों में सुधार के लिए एक ऐसा फॉर्मूला बताया है, जिसे वह व्यवस्था बदलने का ‘मेजिकल फॉर्मूला’ बता रहे हैं। दीपके का कहना है कि यदि शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मंत्री, अधिकारी, प्रिंसिपल और शिक्षक अपने बच्चों का दाखिला सरकारी स्कूलों में कराएं तो सरकारी स्कूलों की स्थिति में तेजी से बदलाव आ सकता है।
अभिजीत दीपके ने सवाल उठाया कि जब सरकार और प्रशासन के लोग सरकारी स्कूलों को बेहतर बनाने का दावा करते हैं तो फिर उनके अपने बच्चे निजी स्कूलों में क्यों पढ़ते हैं। उनका तर्क है कि यदि नीति बनाने वाले लोग खुद सरकारी स्कूलों की व्यवस्था का हिस्सा बनेंगे तो उन्हें वहां की वास्तविक समस्याओं का अनुभव होगा और सुधार के लिए ज्यादा प्रभावी कदम उठाए जाएंगे।
क्या है अभिजीत दीपके का ‘मेजिकल फॉर्मूला
दीपके के अनुसार सरकारी स्कूलों में सुधार का सबसे बड़ा तरीका यह है कि शिक्षा विभाग से जुड़े मंत्री, अधिकारी, स्कूलों के प्रधानाचार्य और शिक्षक अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ाएं। उनका मानना है कि ऐसा होने से स्कूलों में सुविधाओं, शिक्षकों की उपलब्धता, साफ-सफाई और पढ़ाई के स्तर को लेकर जिम्मेदारी बढ़ेगी।
उन्होंने कहा कि जिस दिन सरकारी स्कूलों की कमियां उन लोगों के परिवारों को प्रभावित करेंगी जो फैसले लेते हैं, उस दिन व्यवस्था में बदलाव तेजी से दिखाई देगा। उनका कहना है कि सरकारी स्कूलों को केवल गरीब और ग्रामीण बच्चों की जिम्मेदारी समझना गलत है, बल्कि इन्हें देश की शिक्षा व्यवस्था का आधार बनाना जरूरी है।
‘स्कूल ठीक करो’ अभियान की शुरुआत
अभिजीत दीपके ने 15 अगस्त से ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान की शुरुआत की है। इस अभियान के जरिए उनकी टीम देशभर के सरकारी स्कूलों की जमीनी स्थिति का जायजा लेने और बुनियादी सुविधाओं की कमी को सामने लाने की कोशिश कर रही है।
इस अभियान की शुरुआत महाराष्ट्र के हिंगोली जिले स्थित उनके गांव संतुक पिंपरी से की गई। दीपके ने वहां के सरकारी स्कूल का निरीक्षण कर सुविधाओं की स्थिति पर सवाल उठाए। उन्होंने स्कूल में पानी, बेंच, शौचालय और अन्य बुनियादी सुविधाओं को लेकर चिंता जताई।
सरकारी स्कूलों का होगा सोशल ऑडिट
CJP ने सरकारी स्कूलों की स्थिति जानने के लिए सोशल ऑडिट की योजना भी बनाई है। इसके तहत अभिभावकों और स्थानीय लोगों से स्कूलों की सुविधाओं की जानकारी जुटाने की बात कही गई है। अभियान में बिजली, साफ पानी, शौचालय, बैठने की व्यवस्था और अन्य जरूरी सुविधाओं की जांच करने पर जोर दिया जा रहा है।
दीपके का कहना है कि केवल सरकारी आंकड़ों के आधार पर स्कूलों की स्थिति नहीं समझी जा सकती। इसके लिए जमीन पर जाकर वास्तविक स्थिति देखना जरूरी है। उनका दावा है कि अभियान के माध्यम से देशभर के स्कूलों का डेटा जुटाया जाएगा और समस्याओं को सामने लाया जाएगा।
गांव के स्कूलों पर विशेष फोकस
अभिजीत दीपके ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी स्कूलों में सबसे ज्यादा समस्याएं देखने को मिलती हैं। कई जगहों पर बच्चों को पीने के पानी, शौचालय, पर्याप्त कक्षाओं और बैठने की सुविधा जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष करना पड़ता है।
उन्होंने कहा कि शिक्षा किसी भी देश के भविष्य की नींव होती है। यदि गांवों के सरकारी स्कूल मजबूत होंगे तो गरीब और मध्यम वर्ग के बच्चों को भी बेहतर अवसर मिल सकेंगे।
सरपंचों से भी की अपील
CJP ने इस अभियान के तहत गांवों के सरपंचों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों से भी सरकारी स्कूलों की स्थिति सुधारने की अपील की है। संगठन का कहना है कि स्थानीय स्तर पर जनप्रतिनिधि सक्रिय भूमिका निभाकर स्कूलों की कई समस्याओं का समाधान कर सकते हैं।
दीपके ने कहा कि स्कूलों की जिम्मेदारी केवल सरकार की नहीं बल्कि समाज की भी है। अभिभावक, शिक्षक, पंचायत और स्थानीय प्रशासन मिलकर शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव ला सकते हैं।
क्या नया है दीपके के अभियान में
सरकारी स्कूलों को सुधारने की मांग पहले भी कई बार उठती रही है, लेकिन दीपके ने इसे जनभागीदारी से जोड़ने की कोशिश की है। उनका फोकस केवल सरकार की आलोचना करने के बजाय स्कूलों की वास्तविक स्थिति का रिकॉर्ड तैयार करना और समस्याओं को सार्वजनिक करना है।
हालांकि, मंत्रियों और अधिकारियों के बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ाने का सुझाव नया नहीं है। इससे पहले भी कई सामाजिक कार्यकर्ताओं और नेताओं ने ऐसी मांगें उठाई हैं। लेकिन दीपके इसे सरकारी शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही बढ़ाने का जरिया बता रहे हैं।
शिक्षा व्यवस्था पर नई बहस शुरू
अभिजीत दीपके के बयान के बाद सरकारी स्कूलों की स्थिति और शिक्षा सुधार को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। समर्थकों का कहना है कि यदि जिम्मेदार लोग सरकारी स्कूलों से जुड़ेंगे तो सुधार तेजी से होगा। वहीं, कुछ लोगों का मानना है कि स्कूलों की गुणवत्ता सुधारने के लिए केवल एक कदम नहीं बल्कि बजट, शिक्षक प्रशिक्षण, निगरानी और बेहतर प्रबंधन जैसे कई पहलुओं पर काम करना जरूरी है।
फिलहाल ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान के जरिए CJP सरकारी स्कूलों की समस्याओं को राष्ट्रीय चर्चा का विषय बनाने की कोशिश कर रही है। अब देखना होगा कि यह अभियान शिक्षा व्यवस्था में कितना प्रभाव डाल पाता है।
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