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धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर CJP संस्थापक अभिजीत दिपके की प्रतिक्रिया

नई दिल्ली : केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद राजनीतिक और छात्र संगठनों के बीच प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने शनिवार को प्रधान के इस्तीफे का स्वागत करते हुए इसे छात्रों के लंबे आंदोलन की जीत बताया। उन्होंने कहा कि छात्रों की आवाज आखिरकार सरकार तक पहुंची और इसी का परिणाम है कि शिक्षा मंत्री को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा।
धर्मेंद्र प्रधान की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस्तीफा सौंपे जाने की जानकारी सामने आने के बाद अभिजीत दिपके ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “हमने कर दिखाया। धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया है।” दिपके ने इसे उन छात्रों की सफलता बताया जो पिछले कई हफ्तों से परीक्षा व्यवस्था में सुधार और जवाबदेही की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे थे।
छात्र आंदोलन के बीच आया इस्तीफा
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब देशभर में NEET-UG परीक्षा को लेकर विरोध प्रदर्शन जारी थे। छात्रों और विभिन्न संगठनों की ओर से परीक्षा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं, पेपर लीक के आरोपों और परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग को लेकर आवाज उठाई जा रही थी।
VIDEO | Delhi: As Union Education Minister Dharmendra Pradhan posts a letter, saying he has sent his resignation to PM Modi, CJP founder Abhijeet Dipke says, “We have done it. Dharmendra Pradhan has resigned.”
— Press Trust of India (@PTI_News) July 25, 2026
(Full video available on PTI Videos - https://t.co/n147TvrpG7) pic.twitter.com/M7XmkgYhRG
CJP के नेतृत्व में हुए इन प्रदर्शनों में बड़ी संख्या में छात्रों ने हिस्सा लिया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि मेडिकल प्रवेश परीक्षा जैसी महत्वपूर्ण परीक्षा में पारदर्शिता और निष्पक्षता बेहद जरूरी है। उनका आरोप था कि कथित पेपर लीक और अन्य गड़बड़ियों ने लाखों विद्यार्थियों की मेहनत और भविष्य को प्रभावित किया है।
छात्र संगठनों की मुख्य मांगों में परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए मजबूत व्यवस्था तैयार करना शामिल था।
अभिजीत दिपके ने आंदोलन को बताया ऐतिहासिक
CJP संस्थापक अभिजीत दिपके ने कहा कि छात्रों का आंदोलन केवल किसी एक व्यक्ति के खिलाफ नहीं था, बल्कि यह पूरी परीक्षा व्यवस्था में सुधार और जवाबदेही की मांग को लेकर था। उन्होंने दावा किया कि छात्रों की एकजुटता और लगातार संघर्ष के कारण सरकार को कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ा।
उन्होंने कहा कि लंबे समय से छात्र अपनी समस्याओं को लेकर आवाज उठा रहे थे और उनकी मांग थी कि शिक्षा व्यवस्था में जिम्मेदारी तय की जाए। दिपके ने इस्तीफे को छात्रों की आवाज की जीत के रूप में पेश किया।
हालांकि, सरकार की ओर से इस्तीफे को लेकर आधिकारिक कारण और आगे की प्रक्रिया पर अलग से प्रतिक्रिया का इंतजार है। शिक्षा मंत्रालय और संबंधित एजेंसियां पहले ही परीक्षा व्यवस्था में सुधार और जांच से जुड़े कदम उठाने की बात कह चुकी हैं।
NEET विवाद ने बढ़ाई चिंता
NEET-UG देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में शामिल है। हर साल लाखों विद्यार्थी डॉक्टर बनने के लक्ष्य के साथ इस परीक्षा में शामिल होते हैं। ऐसे में परीक्षा से जुड़ा कोई भी विवाद छात्रों और अभिभावकों के बीच चिंता पैदा करता है।
विरोध कर रहे छात्रों का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में विश्वास बनाए रखना सरकार और परीक्षा आयोजित करने वाली संस्थाओं की बड़ी जिम्मेदारी है। उनका मानना है कि यदि परीक्षा प्रणाली पर सवाल उठते हैं तो इसका असर सिर्फ एक परीक्षा तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र पर पड़ता है।
छात्रों ने मांग की है कि परीक्षा संचालन की प्रक्रिया को और अधिक सुरक्षित बनाया जाए तथा ऐसी व्यवस्था विकसित की जाए जिसमें किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की संभावना कम हो।
राजनीतिक माहौल में बढ़ी हलचल
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद राजनीतिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने NEET विवाद को लेकर सरकार पर सवाल उठाए हैं और छात्रों की मांगों पर ध्यान देने की बात कही है।
वहीं, सरकार समर्थकों का कहना है कि किसी भी मामले में जांच और तथ्यों के आधार पर निर्णय लिया जाना चाहिए। उनका कहना है कि परीक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए लगातार सुधार किए जा रहे हैं।
आगे की राह पर नजर
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अब सबसे बड़ी चुनौती शिक्षा व्यवस्था में छात्रों का भरोसा बनाए रखना होगी। NEET विवाद ने परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और सुरक्षा को लेकर कई सवाल खड़े किए हैं।
छात्र संगठनों का कहना है कि केवल इस्तीफा पर्याप्त नहीं है, बल्कि परीक्षा व्यवस्था में स्थायी सुधार जरूरी हैं। उनका जोर इस बात पर है कि भविष्य में किसी भी छात्र को ऐसी स्थिति का सामना न करना पड़े, जहां उसकी मेहनत और भविष्य पर सवाल खड़े हों।
अभिजीत दिपके ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को आंदोलन की सफलता बताया है, जबकि अब निगाहें सरकार के अगले कदमों और शिक्षा व्यवस्था में प्रस्तावित सुधारों पर टिकी हैं। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि NEET विवाद के बाद परीक्षा प्रणाली को लेकर क्या नए बदलाव किए जाते हैं और छात्रों की चिंताओं का समाधान किस तरह किया जाता है।





