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दिल्ली-एनसीआर
CJP चीफ अभिजीत दिपके का बड़ा खुलासा, आशुतोष और सौरव को लेकर दिया चौंकाने वाला बयान
Triveni
21 Oct 2026 6:44 AM IST

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समर्थकों से की खास अपील
नई दिल्ली : कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक और संयोजक अभिजीत दिपके ने अपने आंदोलन की रणनीति और नेतृत्व को लेकर महत्वपूर्ण बयान दिया है। दशहरा के अवसर पर जारी करीब 16 मिनट के वीडियो संदेश में उन्होंने कहा कि पार्टी के सह-संयोजक आशुतोष रांका और सौरव दास ही आंदोलन से जुड़े बड़े फैसले लेते थे। वह दोनों के निर्देशों का पालन करते थे। दिपके के इस बयान के बाद CJP के संगठनात्मक नेतृत्व और आंदोलन की रणनीति को लेकर चर्चा तेज हो गई है। अभिजीत दिपके ने मंगलवार, 20 अक्टूबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर वीडियो साझा करते हुए कहा कि आशुतोष और सौरव केवल उनके राजनीतिक सहयोगी नहीं, बल्कि परिवार के सदस्यों जैसे हैं। उन्होंने दोनों को आंदोलन को आगे बढ़ाने का प्रमुख श्रेय दिया। दिपके ने स्पष्ट किया कि दिवाली तक CJP की ओर से कोई नया प्रदर्शन आयोजित करने की योजना नहीं है। उन्होंने अपने समर्थकों से कुछ समय के लिए आंदोलन से विराम लेने और परिवार के साथ समय बिताने की अपील की। उनके इस बयान को आंदोलन की अगली रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
'बाहर से लगता था मैं नेता हूं, लेकिन फैसले वे लेते थे'
वीडियो संदेश में अभिजीत दिपके ने कहा कि आंदोलन को मजबूत बनाने और आगे बढ़ाने में सौरव दास और आशुतोष रांका की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने बताया कि लोगों को बाहर से ऐसा लगता होगा कि आंदोलन का नेतृत्व वही कर रहे थे, लेकिन वास्तविकता में महत्वपूर्ण रणनीतिक फैसले उनके दोनों सहयोगी लेते थे। दिपके के मुताबिक, सौरव और आशुतोष ही तय करते थे कि अगले दिन आंदोलन के लिए कहां जाना है, कौन-सी गतिविधि करनी है और किस तरह आगे बढ़ना है। उन्होंने दोनों की निर्णय लेने की क्षमता की प्रशंसा करते हुए कहा कि वे उनसे बेहतर निर्णय लेते हैं। दिपके ने इस बात पर भी जोर दिया कि दोनों सहयोगियों का उनके जीवन में व्यक्तिगत और भावनात्मक महत्व है।
जेल में बंद साथियों को याद कर भावुक हुए दिपके
अभिजीत दिपके ने वीडियो में आशुतोष रांका और सौरव दास के साथ अपने व्यक्तिगत संबंधों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि दोनों उनके लिए भाइयों जैसे हैं और उनकी गिरफ्तारी का उन पर गहरा भावनात्मक असर पड़ा है। दिपके ने बताया कि तीनों का एक अलग व्हाट्सऐप ग्रुप था, जिसमें वे आपस में मीम्स साझा करते थे और हल्की-फुल्की बातचीत करते थे। उन्होंने कहा कि वह आज भी कई बार उस व्हाट्सऐप ग्रुप को खोलते हैं। उन्हें ऐसा महसूस होता है कि दोनों साथी अब भी वहां मौजूद हैं। इस बयान के माध्यम से दिपके ने राजनीतिक आंदोलन के साथ अपने सहयोगियों के प्रति व्यक्तिगत लगाव को भी सामने रखा।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के बाद गिरफ्तार हुए थे दोनों नेता
सौरव दास और आशुतोष रांका को 13 अक्टूबर को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिया गया था। इसके बाद उनके खिलाफ निवारक गिरफ्तारी की कार्रवाई हुई और उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा गया। पुलिस के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने प्रतिबंधित प्रदर्शन स्थल तक पहुंचने के लिए बैरिकेड और गेट पार किए थे। आरोप है कि उन्होंने पहले लागू शांति बनाए रखने संबंधी शर्तों का भी उल्लंघन किया। इस दौरान CJP नेताओं ने राष्ट्रीय ध्वज फहराने की कोशिश की और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर नारे लगाए। वहीं, CJP से जुड़े नेताओं ने पुलिस की कार्रवाई का विरोध करते हुए अपने प्रदर्शन को शांतिपूर्ण बताया।
दिवाली तक नहीं होगा CJP का नया प्रदर्शन
अभिजीत दिपके ने समर्थकों के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश भी जारी किया। उन्होंने कहा कि दिवाली तक संगठन की ओर से कोई नया प्रदर्शन आयोजित करने की योजना नहीं है। उन्होंने CJP के समर्थकों, जिन्हें संगठन के भीतर 'कॉकरोच' कहा जाता है, से अपील की कि वे आंदोलन की गतिविधियों से कुछ समय के लिए ब्रेक लें और अपने परिवार के साथ समय बिताएं। दिपके के इस बयान से स्पष्ट है कि संगठन फिलहाल सार्वजनिक प्रदर्शन की गतिविधियों को विराम देना चाहता है। हालांकि, उन्होंने आंदोलन को स्थायी रूप से समाप्त करने की घोषणा नहीं की है।
फ्रांस के दंगों से तुलना पर भी दिया जवाब
अभिजीत दिपके ने फ्रांस में हिंसक प्रदर्शनों और CJP के आंदोलन के बीच की जा रही तुलना पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उनके सहयोगी सौरव दास और आशुतोष रांका ने जेल जाने की स्थिति में भी शांतिपूर्ण रास्ता चुना। दिपके के मुताबिक, उनके साथियों ने गुस्से और नफरत के बजाय शांति, संयम और करुणा का रास्ता अपनाया। उन्होंने कहा कि दोनों ने गिरफ्तारी के बावजूद अहिंसा के प्रति अपना विश्वास नहीं छोड़ा। उन्होंने अपने सहयोगियों के रुख की तुलना महात्मा गांधी के सत्याग्रह से की और कहा कि लोकतांत्रिक आंदोलन का उद्देश्य हिंसा फैलाना नहीं, बल्कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखना होना चाहिए।
CJP नेताओं की हिरासत का मामला हाईकोर्ट पहुंचा
इस बीच सौरव दास और आशुतोष रांका की हिरासत को लेकर कानूनी गतिविधियां भी तेज हो गई हैं। 21 अक्टूबर को सामने आई जानकारी के अनुसार, CJP ने दोनों नेताओं की निवारक हिरासत को चुनौती देते हुए दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है और मामले की तत्काल सुनवाई की मांग की है। संगठन का आरोप है कि दोनों नेताओं की हिरासत और जमानत संबंधी प्रक्रिया में नियमों का पालन नहीं किया गया। वहीं, अधिकारियों ने कानून-व्यवस्था और शांति बनाए रखने का हवाला दिया है। इस मामले में अंतिम कानूनी निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के तहत होना है।
CJP की अगली रणनीति पर टिकी निगाहें
अभिजीत दिपके के ताजा बयान के बाद अब आंदोलन की आगे की दिशा को लेकर सवाल उठ रहे हैं। दो प्रमुख सह-संयोजकों की हिरासत और दिवाली तक प्रदर्शन स्थगित करने की घोषणा ने संगठन की मौजूदा स्थिति को चर्चा में ला दिया है। हालांकि दिपके ने आंदोलन को समाप्त करने का कोई संकेत नहीं दिया है। उन्होंने अपने दोनों सहयोगियों के योगदान को महत्वपूर्ण बताते हुए उनके प्रति समर्थन दोहराया है। अब देखना होगा कि दिवाली के बाद कॉकरोच जनता पार्टी किस रणनीति के साथ अपने आंदोलन को आगे बढ़ाती है और न्यायिक प्रक्रिया का संगठन की भविष्य की गतिविधियों पर क्या असर पड़ता है।
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