दिल्ली-एनसीआर

CJP कार्यकर्ता अभिजीत दिपके का दिल्ली पुलिस पर गंभीर आरोप

Ratna Netam
11 Oct 2026 8:13 PM IST
CJP कार्यकर्ता अभिजीत दिपके का दिल्ली पुलिस पर गंभीर आरोप
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नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के कार्यकर्ता अभिजीत दिपके ने रविवार को दिल्ली पुलिस पर हिरासत के दौरान उनके साथ अमानवीय व्यवहार करने का आरोप लगाया। दिपके ने पुलिस की कार्रवाई को राजनीतिक मकसद से प्रेरित बताते हुए कहा कि वह गिरफ्तारी या जेल जाने से डरने वाले नहीं हैं। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि अधिकारी उन्हें केवल एक बार नहीं, बल्कि सौ बार जेल भेज दें, फिर भी वह डरेंगे नहीं। इस बीच, CJP की लीगल अफेयर्स हेड रत्ना सिंह ने जानकारी दी कि दिपके और पार्टी के दो अन्य कार्यकर्ताओं को दिल्ली कैंट पुलिस स्टेशन में एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के सामने पेश करने के बाद रिहा कर दिया गया।यह घटनाक्रम दिल्ली में CJP कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिए जाने के मामले के बाद सामने आया है। अभिजीत दिपके ने पुलिस की कार्रवाई और हिरासत में अपने साथ हुए कथित व्यवहार पर सवाल उठाए हैं। वहीं, पार्टी की कानूनी मामलों की प्रमुख रत्ना सिंह ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर रिहाई की जानकारी साझा करते हुए एक साल तक शांति भंग नहीं करने की शर्त का उल्लेख किया।हालांकि, हिरासत के दौरान कथित अमानवीय व्यवहार और राजनीतिक मकसद से कार्रवाई किए जाने के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं हुई है। दिल्ली पुलिस की ओर से इन आरोपों पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया भी उपलब्ध नहीं है।
हिरासत में व्यवहार को लेकर दिपके ने उठाए सवाल
अभिजीत दिपके ने रविवार को दिल्ली पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि हिरासत के दौरान उनके साथ किया गया व्यवहार अमानवीय था। उन्होंने पुलिस की कार्रवाई को राजनीतिक मकसद से प्रेरित बताया और इसके खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया।दिपके के बयान के मुताबिक, वह हिरासत में लिए जाने के बावजूद अपने रुख से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। उन्होंने कहा कि जेल जाने का डर दिखाकर उन्हें चुप नहीं कराया जा सकता।उन्होंने अधिकारियों को चुनौती देते हुए कहा कि उन्हें एक बार नहीं, बल्कि सौ बार जेल भेज दिया जाए, तब भी वह डरेंगे नहीं। उनके इस बयान से स्पष्ट है कि वह हिरासत की कार्रवाई को लेकर अपना विरोध जारी रखना चाहते हैं।हालांकि, दिपके ने हिरासत के दौरान कथित रूप से किस तरह का व्यवहार किए जाने का आरोप लगाया, इसका विस्तृत विवरण उपलब्ध जानकारी में नहीं दिया गया है। इस संबंध में पुलिस का पक्ष सामने आने के बाद ही पूरे घटनाक्रम की स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।
बॉन्ड पर हस्ताक्षर नहीं करने का दावा
CJP कार्यकर्ता अभिजीत दिपके ने कहा कि उन्होंने किसी भी बॉन्ड पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। उनका यह बयान रिहाई के बाद सामने आया, जब पार्टी की ओर से उनके और अन्य कार्यकर्ताओं के छोड़े जाने की जानकारी दी गई।दिपके ने गिरफ्तारी से न डरने की बात दोहराते हुए कहा कि वह जेल जाने की धमकी से पीछे हटने वाले नहीं हैं।दूसरी ओर, CJP की लीगल अफेयर्स हेड रत्ना सिंह ने रिहाई की जानकारी साझा करते हुए शांति बनाए रखने से संबंधित शर्त का उल्लेख किया। उन्होंने एक्स पर लिखा, "शर्त - एक साल तक शांति भंग नहीं करनी है।"दिपके के बॉन्ड पर हस्ताक्षर नहीं करने के दावे और रत्ना सिंह की ओर से बताई गई शर्त के संबंध में उपलब्ध जानकारी में विस्तृत कानूनी स्पष्टीकरण नहीं है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि रिहाई के समय कोई लिखित बॉन्ड लिया गया था या शांति बनाए रखने की शर्त किसी अन्य कानूनी प्रक्रिया के तहत बताई गई थी।इसलिए दोनों बयानों को उनके संबंधित संदर्भ में देखना आवश्यक है।
आशुतोष रंका और सौरव दास के साथ हुए रिहा
CJP की लीगल अफेयर्स हेड रत्ना सिंह के मुताबिक, अभिजीत दिपके को पार्टी के दो अन्य कार्यकर्ताओं आशुतोष रंका और सौरव दास के साथ रिहा किया गया।रत्ना सिंह ने बताया कि तीनों को दिल्ली कैंट पुलिस स्टेशन में एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया था। इसके बाद उन्हें रिहा कर दिया गया।उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर इस घटनाक्रम की जानकारी देते हुए एक साल तक शांति भंग नहीं करने की शर्त का उल्लेख किया।हालांकि, उपलब्ध जानकारी में मजिस्ट्रेट के आदेश की प्रति, रिहाई की सटीक कानूनी प्रक्रिया या शर्तों से संबंधित विस्तृत दस्तावेज शामिल नहीं हैं।
दिल्ली में CJP कार्यकर्ताओं की हिरासत का मामला
अभिजीत दिपके और उनके साथियों की हिरासत का मामला दिल्ली में CJP के प्रस्तावित प्रदर्शन से जुड़ा बताया गया है। इससे पहले पार्टी के कार्यकर्ताओं को जनपथ पर प्रस्तावित धरने से पहले हिरासत में लिए जाने का मामला सामने आया था।प्रदर्शन के लिए आवश्यक अनुमति और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस की कार्रवाई की चर्चा हुई थी। CJP कार्यकर्ताओं की हिरासत के बाद अभिजीत दिपके ने पुलिस के व्यवहार पर सवाल उठाए हैं।दिपके ने आरोप लगाया कि उनके साथ अमानवीय व्यवहार किया गया और कार्रवाई राजनीतिक मकसद से प्रेरित थी। हालांकि, इन आरोपों के समर्थन में कोई स्वतंत्र जांच रिपोर्ट या अन्य प्रमाण उपलब्ध जानकारी में नहीं दिए गए हैं।पुलिस की ओर से इस मामले में विस्तृत जवाब सामने नहीं आने के कारण हिरासत के दौरान हुई घटनाओं के सभी पहलू स्पष्ट नहीं हैं।
रिहाई के बाद भी विवाद जारी
अभिजीत दिपके, आशुतोष रंका और सौरव दास की रिहाई के बाद भी मामला चर्चा में है। दिपके ने हिरासत के दौरान अपने साथ हुए कथित व्यवहार को लेकर पुलिस की आलोचना की है, जबकि रत्ना सिंह ने रिहाई की शर्त के बारे में जानकारी दी है।दिपके का कहना है कि वह जेल जाने से नहीं डरते और पुलिस की कार्रवाई से पीछे हटने वाले नहीं हैं। वहीं, रिहाई के दौरान शांति बनाए रखने से संबंधित शर्त का उल्लेख भी सामने आया है।इस मामले में आगे की स्थिति स्पष्ट करने के लिए दिल्ली पुलिस का पक्ष और मजिस्ट्रेट के आदेश का विवरण महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार, तीनों कार्यकर्ताओं को मजिस्ट्रेट के सामने पेश किए जाने के बाद रिहा कर दिया गया है।
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