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ऑनलाइन सुनवाई पर CJI का बयान: हाई कोर्ट पहले ही कर चुके हैं पहल
Delhi दिल्ली: दिल्ली की सभी अदालतों को पूरी तरह ऑनलाइन मोड में संचालित करने की मांग को लेकर दायर एक याचिका पर सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश Justice Surya Kant ने गुरुवार को महत्वपूर्ण टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि देश के विभिन्न हाई कोर्ट पहले ही ऑनलाइन सुनवाई की व्यवस्था को लागू कर चुके हैं और अधिकांश अदालतें इस दिशा में आगे बढ़ चुकी हैं।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि उन्होंने सभी हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों से पहले ही इस संबंध में अनुरोध किया था। उन्होंने कहा, “मैंने मुख्य न्यायाधीशों से पहले ही अनुरोध किया है। ज़्यादातर ने इसे लागू भी कर दिया है।” उन्होंने यह भी कहा कि यह प्रक्रिया किसी दबाव या अनिवार्य निर्देश के बजाय एक स्वैच्छिक पहल के रूप में आगे बढ़नी चाहिए, जिसमें बार और बेंच दोनों की भागीदारी जरूरी है।
याचिका में यह मांग की गई थी कि देश के हित को ध्यान में रखते हुए सुप्रीम कोर्ट सभी जिला अदालतों को तीन महीने तक अनिवार्य रूप से ऑनलाइन सुनवाई करने का निर्देश दे। याचिकाकर्ता का तर्क था कि इससे न्यायिक प्रक्रिया अधिक तेज, पारदर्शी और सुलभ हो सकती है, खासकर दूर-दराज़ के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए।
हालांकि, मुख्य न्यायाधीश की टिप्पणी से यह संकेत मिला कि न्यायपालिका इस दिशा में पहले से ही धीरे-धीरे कदम बढ़ा रही है, लेकिन इसे एक चरणबद्ध और स्वैच्छिक प्रक्रिया के रूप में अपनाया जा रहा है। उनका कहना था कि तकनीक का उपयोग न्याय व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए होना चाहिए, लेकिन इसे एक समान रूप से सभी अदालतों पर तुरंत लागू करना व्यावहारिक चुनौतियाँ पैदा कर सकता है।
कोविड-19 महामारी के बाद से देश की न्यायिक व्यवस्था में डिजिटल सुनवाई की भूमिका काफी बढ़ी है। कई हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से मामलों की सुनवाई शुरू की थी, जिसे अब कई जगहों पर नियमित प्रक्रिया का हिस्सा बना दिया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऑनलाइन सुनवाई से न्यायिक प्रक्रिया में समय की बचत होती है और वकीलों तथा पक्षकारों के लिए सुविधा बढ़ती है, लेकिन इसके साथ ही तकनीकी संसाधनों की उपलब्धता और डिजिटल समानता जैसे मुद्दे भी जुड़े हुए हैं।
इस मामले में अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जिला अदालतों तक डिजिटल सुनवाई को कितनी तेजी और प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है, ताकि न्याय व्यवस्था अधिक आधुनिक और सुलभ बन सके।





