- Home
- /
- दिल्ली-एनसीआर
- /
- CJI सूर्यकांत ने लंदन...
CJI सूर्यकांत ने लंदन में मध्यस्थता को मजबूत विवाद समाधान तंत्र बताया, तकनीक और भविष्य पर चर्चा

New Delhi नई दिल्ली : लंदन में भारतीय उच्चायोग द्वारा आयोजित एक उच्च स्तरीय पैनल चर्चा के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने भारतीय न्यायपालिका में मध्यस्थता (मेडिएशन) की बढ़ती भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत में मध्यस्थता अब केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि एक मजबूत और प्रभावी विवाद समाधान तंत्र के रूप में विकसित हो चुकी है।
सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि मध्यस्थता उनके लिए व्यक्तिगत रूप से भी एक महत्वपूर्ण विषय है और न्यायिक प्रणाली में इसके विस्तार को वे सकारात्मक बदलाव के रूप में देखते हैं। उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट कानूनी सेवा समिति (SCLSC) ने देशभर में प्रशिक्षित मध्यस्थों की एक बड़ी टीम तैयार की है, जो विभिन्न प्रकार के विवादों को सुलझाने में अहम भूमिका निभा रही है।
अपने संबोधन में उन्होंने यह भी कहा, “मैं गर्व से कह सकता हूं कि भारत में अब हर कस्बे और हर क्षेत्र में लोग मध्यस्थता के बारे में जानते हैं।” उनके अनुसार, यह बदलाव भारतीय न्याय प्रणाली में जागरूकता और सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग ने बुधवार को “प्रौद्योगिकी और मध्यस्थता के भविष्य” विषय पर इस पैनल चर्चा का आयोजन किया था। इस कार्यक्रम में भारत और यूनाइटेड किंगडम के कई प्रमुख न्यायिक और कानूनी विशेषज्ञों ने भाग लिया। चर्चा का उद्देश्य यह समझना था कि तकनीक के बढ़ते उपयोग के साथ विवाद समाधान प्रणाली को कैसे अधिक प्रभावी और सुलभ बनाया जा सकता है।
कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने इस बात पर भी विचार किया कि डिजिटल प्लेटफॉर्म और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस किस तरह मध्यस्थता प्रक्रिया को तेज और अधिक पारदर्शी बना सकते हैं। साथ ही, सीमापार (cross-border) विवादों में मध्यस्थता की भूमिका को और मजबूत करने पर भी चर्चा हुई।
सीजेआई ने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि भारत में न्यायिक व्यवस्था लगातार सुधार की दिशा में आगे बढ़ रही है और मध्यस्थता जैसी प्रक्रियाएं अदालतों पर बढ़ते बोझ को कम करने में मदद कर रही हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि भविष्य में तकनीक के साथ मिलकर मध्यस्थता और अधिक सशक्त हो सकती है।
इस चर्चा में शामिल भारतीय और ब्रिटिश कानूनी विशेषज्ञों ने भी इस बात पर सहमति जताई कि मध्यस्थता न्याय वितरण प्रणाली को तेज, सस्ता और अधिक प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
इस कार्यक्रम ने भारत और ब्रिटेन के बीच न्यायिक सहयोग को भी मजबूत करने का संदेश दिया, खासकर उन क्षेत्रों में जहां तकनीक और कानून का संगम तेजी से बढ़ रहा है।





