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दिल्ली मेट्रो में महिला की आपत्तिजनक फोटो लेने का आरोप, CISF का ASI सस्पेंड

Kavita2
17 Aug 2026 11:30 AM IST
दिल्ली मेट्रो में महिला की आपत्तिजनक फोटो लेने का आरोप, CISF का ASI सस्पेंड
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नई दिल्ली। दिल्ली मेट्रो में सफर कर रही एक महिला की कथित तौर पर आपत्तिजनक तस्वीरें लेने का मामला सामने आया है। आरोप केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के सहायक उप निरीक्षक (ASI) स्तर के एक अधिकारी पर लगा है। घटना के बाद मेट्रो कोच में मौजूद यात्रियों और अधिकारी के बीच विवाद बढ़ गया और कथित तौर पर हाथापाई भी हुई। मामले का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद CISF ने आरोपी अधिकारी को जांच पूरी होने तक निलंबित कर दिया है।

जानकारी के मुताबिक घटना रविवार दोपहर करीब एक बजे दिल्ली में चलती मेट्रो ट्रेन के अंदर हुई। महिला ने आरोप लगाया कि CISF अधिकारी ने अपने मोबाइल फोन से उसकी निजता का उल्लंघन करने वाली तस्वीरें खींचीं। महिला को इसका संदेह होने के बाद उसने अधिकारी से सवाल किया, जिसके बाद दोनों के बीच बहस शुरू हो गई।



इस दौरान मेट्रो कोच में मौजूद दूसरे यात्रियों का ध्यान भी विवाद की ओर गया। कुछ यात्रियों ने महिला का समर्थन करते हुए अधिकारी से उसके मोबाइल फोन की गैलरी दिखाने के लिए कहा। आरोप है कि अधिकारी ने महिला की तस्वीर लेने की बात से इनकार किया और फोन दिखाने को लेकर विवाद और बढ़ गया।

घटना से जुड़ा एक वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में महिला को मेट्रो कोच के अंदर संबंधित अधिकारी से सवाल करते हुए देखा जा सकता है। आसपास बड़ी संख्या में अन्य यात्री भी मौजूद दिखाई देते हैं। विवाद बढ़ने के दौरान यात्रियों और अधिकारी के बीच कथित रूप से धक्का-मुक्की और हाथापाई होने की बात भी सामने आई है।

आरोप है कि कुछ यात्रियों ने अधिकारी की पिटाई भी कर दी। हालांकि वायरल वीडियो और शुरुआती दावों के आधार पर पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र रूप से पुष्टि होना बाकी है। जांच के दौरान यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि विवाद की शुरुआत किस तरह हुई और हाथापाई में कौन-कौन शामिल था।

मामले में सबसे गंभीर आरोप महिला की निजता से जुड़ा है। दावा किया गया है कि अधिकारी ने महिला के शरीर के निजी हिस्सों की तस्वीरें लेने की कोशिश की। इस आरोप की पुष्टि के लिए संबंधित मोबाइल फोन की जांच महत्वपूर्ण हो सकती है। फोन की गैलरी के साथ हटाई गई तस्वीरों, हाल में डिलीट की गई फाइलों और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड की जांच से वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

घटना सामने आने के बाद CISF के वरिष्ठ अधिकारियों ने मामले का संज्ञान लिया है। एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक आरोपों का सामना कर रहे ASI को जांच पूरी होने तक निलंबित कर दिया गया है। विभागीय स्तर पर पूरे घटनाक्रम की जांच की जा रही है और उसके निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

अधिकारी का निलंबन प्रशासनिक कदम है और इसे अपने आप में आरोप सिद्ध होना नहीं माना जाता। जांच में महिला के आरोप, अधिकारी का पक्ष, वीडियो फुटेज, मोबाइल फोन से मिलने वाले डिजिटल साक्ष्य और प्रत्यक्षदर्शी यात्रियों की जानकारी महत्वपूर्ण हो सकती है।

दिल्ली मेट्रो की सुरक्षा व्यवस्था में CISF की अहम भूमिका है। लाखों यात्री प्रतिदिन मेट्रो का इस्तेमाल करते हैं और स्टेशनों पर प्रवेश से लेकर सुरक्षा जांच तक की जिम्मेदारी CISF के जवान संभालते हैं। ऐसे में बल के किसी अधिकारी पर महिला यात्री की निजता का उल्लंघन करने का आरोप लगना गंभीर मामला माना जा रहा है।

सार्वजनिक परिवहन में महिलाओं की सुरक्षा और निजता लंबे समय से महत्वपूर्ण मुद्दा रहा है। स्मार्टफोन कैमरों के व्यापक इस्तेमाल के कारण बिना अनुमति आपत्तिजनक तस्वीर या वीडियो बनाने जैसी घटनाओं को लेकर भी चिंता बढ़ी है। इस तरह के आरोप सामने आने पर डिजिटल साक्ष्य की तत्काल और निष्पक्ष जांच महत्वपूर्ण होती है।

इस मामले में यह भी जांच का विषय होगा कि कथित तस्वीरें वास्तव में ली गई थीं या नहीं। महिला और अन्य यात्रियों के दावों के साथ आरोपी अधिकारी का पक्ष भी जांच में शामिल किया जाएगा। किसी भी व्यक्ति को दोषी ठहराने से पहले उपलब्ध साक्ष्यों और जांच के निष्कर्षों को देखना जरूरी होगा।

दूसरी तरफ साथी यात्रियों द्वारा कथित पिटाई का मामला भी अलग से सवाल खड़ा करता है। किसी व्यक्ति पर गंभीर आरोप लगने के बावजूद कानून हाथ में लेना उचित नहीं माना जाता। ऐसी स्थिति में पुलिस, मेट्रो सुरक्षा कर्मचारियों या संबंधित अधिकारियों को सूचना देकर आरोपी को उनके हवाले किया जाना चाहिए, ताकि मामले में कानूनी प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई हो सके।

वायरल वीडियो इस मामले में महत्वपूर्ण साक्ष्य हो सकता है, लेकिन वीडियो में दिखाई देने वाला हिस्सा पूरे घटनाक्रम का प्रतिनिधित्व करे, यह जरूरी नहीं है। इसलिए जांच एजेंसियों को मेट्रो स्टेशन और ट्रेन से उपलब्ध अन्य रिकॉर्ड, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर घटना की पूरी कड़ी तैयार करनी होगी।

अगर जांच में यह साबित होता है कि महिला की निजता का उल्लंघन करने वाली तस्वीरें जानबूझकर ली गई थीं, तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ लागू कानूनों के तहत कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है। वहीं अगर यात्रियों द्वारा अधिकारी के साथ मारपीट की पुष्टि होती है तो उस पहलू की भी अलग से जांच संभव है।

घटना ने दिल्ली मेट्रो जैसे भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक परिवहन में महिलाओं की निजता और सुरक्षा के मुद्दे को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। यात्रियों को किसी संदिग्ध गतिविधि का पता चलने पर तत्काल मेट्रो प्रशासन या सुरक्षा अधिकारियों से संपर्क करना चाहिए। इससे स्थिति को हिंसक होने से रोकने के साथ जरूरी साक्ष्यों को सुरक्षित रखने में भी मदद मिल सकती है।

फिलहाल CISF ने आरोपी ASI को निलंबित कर जांच शुरू कर दी है। महिला के आरोपों की वास्तविकता और यात्रियों के साथ हुई कथित हाथापाई की पूरी परिस्थितियां जांच के बाद ही स्पष्ट होंगी। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के कारण मामला तेजी से चर्चा में आया है और अब सभी की नजर विभागीय जांच तथा आगे होने वाली कानूनी कार्रवाई पर है।

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