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चुनाव आयोग पर सवालों को लेकर विपक्ष पर बरसे चिराग पासवान, बताया ‘सेलेक्टिव क्रिटिसिज्म’

नई दिल्ली। चुनाव आयोग और विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान ने विपक्ष पर निशाना साधा है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्ष के रवैये को ‘सेलेक्टिव क्रिटिसिज्म’ करार दिया और कहा कि चुनाव आयोग पर लगातार सवाल उठाकर लोगों के बीच भ्रम पैदा करने की कोशिश की जा रही है।
मंगलवार को पत्रकारों से बातचीत में चिराग पासवान ने कहा कि विपक्ष चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और चुनाव परिणामों पर केवल उन्हीं परिस्थितियों में सवाल उठाता है, जहां उसे हार का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि जिन राज्यों में विपक्षी दलों की सरकार बनती है, वहां चुनाव परिणामों या चुनाव आयोग की प्रक्रिया को लेकर वैसी आपत्ति नहीं उठाई जाती।
चिराग पासवान ने कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश और अन्य राज्यों का उदाहरण देते हुए विपक्ष से सवाल किया कि यदि चुनाव आयोग की पूरी प्रक्रिया पर ही संदेह है, तो उन चुनाव परिणामों को लेकर सवाल क्यों नहीं उठाए जाते जिनमें विपक्षी दलों को जीत मिली है। उन्होंने विपक्ष की आलोचना को इसी वजह से चुनिंदा बताया।
उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं पर सवाल उठाना किसी भी राजनीतिक दल का अधिकार है, लेकिन ऐसा करते समय एक समान मानदंड अपनाया जाना चाहिए। उनके मुताबिक चुनाव आयोग की आलोचना केवल राजनीतिक परिणामों के आधार पर नहीं होनी चाहिए।
यह बयान ऐसे समय आया है जब विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं और SIR की प्रक्रिया को लेकर कई गंभीर सवाल उठा रहे हैं। कांग्रेस समेत कुछ विपक्षी दलों ने मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने और चुनाव आयोग के भीतर निर्णय प्रक्रिया को लेकर आपत्तियां जताई हैं।
SIR को लेकर विवाद उस समय और बढ़ गया जब चुनाव आयोग के भीतर कुछ फैसलों पर मतभेद की खबरें सामने आईं। रिपोर्टों के मुताबिक चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले महीनों में मतदाता सूची और उससे जुड़ी प्रक्रियाओं पर कई बार आपत्तियां दर्ज कराई थीं। इस विवाद के बाद विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त की भूमिका को लेकर सवाल तेज कर दिए।
हालांकि चिराग पासवान का रुख पूरी तरह एकतरफा समर्थन वाला भी नहीं रहा है। कुछ दिन पहले उन्होंने स्वयं कहा था कि चुनाव आयोग एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था है और यदि उसकी कार्यप्रणाली को लेकर जनता के मन में सवाल पैदा होते हैं तो मुख्य चुनाव आयुक्त को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। उन्होंने कहा था कि चुनाव प्रक्रिया पर लोगों का भरोसा बनाए रखना आयोग की जिम्मेदारी है।
चिराग ने उस समय यह भी कहा था कि चुनाव आयोग को विपक्ष के लिए नहीं, बल्कि देश की जनता के लिए स्पष्टीकरण देना चाहिए। उन्होंने माना था कि SIR और आयोग के भीतर सामने आए मतभेदों से लोगों के मन में संदेह पैदा हो सकता है, जिसे दूर करना जरूरी है।
मंगलवार के बयान में हालांकि उन्होंने विपक्ष की रणनीति पर ज्यादा जोर दिया। उन्होंने कहा कि केवल उन्हीं चुनावों पर सवाल उठाना जहां विपक्ष हारता है, चुनावी संस्थाओं को लेकर राजनीतिक सुविधा के हिसाब से रुख अपनाने जैसा है।
चिराग पासवान ने कहा कि अगर चुनाव आयोग की प्रक्रिया को पूरी तरह अविश्वसनीय माना जाए तो विपक्ष को उन राज्यों के चुनाव परिणामों पर भी वही सवाल उठाने चाहिए जहां कांग्रेस या अन्य विपक्षी दलों ने जीत हासिल की है।
उन्होंने प्रियंका गांधी की चुनावी जीत का भी उदाहरण दिया और पूछा कि यदि पूरी चुनाव प्रणाली ही संदिग्ध है तो विपक्ष के उम्मीदवार चुनाव कैसे जीत रहे हैं। उनके मुताबिक चुनाव आयोग को लेकर आलोचना तथ्यों और एक समान मानदंड पर आधारित होनी चाहिए।
वहीं विपक्ष का कहना है कि उसकी आपत्ति चुनाव परिणामों पर नहीं, बल्कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण और चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया को लेकर है। कांग्रेस ने SIR प्रक्रिया को रोकने और कथित तौर पर हटाए गए मतदाताओं के नाम बहाल करने की मांग की है। उसने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की भी मांग की है।
चुनाव आयोग ने दूसरी ओर अपने ऊपर लगे पक्षपात और अवैध तरीके से मतदाताओं के नाम हटाने के आरोपों से इनकार किया है। आयोग का कहना है कि मतदाता सूची से जुड़े कदम कानून और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार उठाए गए हैं। साथ ही आयोग ने SIR से जुड़ी कुछ प्रक्रियाओं की समीक्षा और तकनीकी व्यवस्था की जांच भी शुरू की है।
SIR विवाद अब सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंच गया है। मुख्य चुनाव आयुक्त की कार्यप्रणाली और विशेष गहन पुनरीक्षण को चुनौती देने वाली एक याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई के लिए सहमत हुआ है। याचिका में चुनाव आयोग के भीतर निर्णय लेने की प्रक्रिया और मुख्य चुनाव आयुक्त की शक्तियों को लेकर सवाल उठाए गए हैं।
इस बीच राजनीतिक बयानबाजी लगातार तेज हो रही है। विपक्ष जहां आयोग की निष्पक्षता और पारदर्शिता को लेकर सवाल उठा रहा है, वहीं भाजपा और उसके सहयोगी दल विपक्ष पर चुनावी हार के बाद संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बनाने का आरोप लगा रहे हैं।
चिराग पासवान ने कहा कि चुनाव आयोग की विश्वसनीयता लोकतंत्र के लिए महत्वपूर्ण है और लोगों के मन में पैदा होने वाली शंकाओं को दूर किया जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने विपक्ष से भी कहा कि वह चुनाव आयोग की आलोचना करते समय राजनीतिक सुविधा के आधार पर अलग-अलग मानदंड न अपनाए।
उन्होंने यह भी दोहराया कि पहले SIR और मतदाता सूची से जुड़े कुछ मुद्दों पर उन्होंने स्वयं स्पष्टीकरण की मांग की थी। इसलिए उनके मुताबिक सवाल उठाना गलत नहीं है, लेकिन सवाल तथ्यों पर आधारित और सभी परिस्थितियों में समान होने चाहिए।
फिलहाल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग, SIR प्रक्रिया और चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों को लेकर राजनीतिक टकराव जारी है। विपक्ष इस मुद्दे पर आंदोलन तेज करने की तैयारी में है, जबकि आयोग अपनी प्रक्रिया को कानूनी और निष्पक्ष बता रहा है।
चिराग पासवान के ताजा बयान ने इस बहस में नया राजनीतिक पक्ष जोड़ दिया है। उन्होंने एक ओर चुनाव आयोग से पारदर्शिता और स्पष्टीकरण की जरूरत दोहराई है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष की आलोचना को ‘सेलेक्टिव क्रिटिसिज्म’ बताते हुए उससे चुनाव परिणामों और चुनावी संस्थाओं को लेकर एक समान रुख अपनाने को कहा है।





