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SIR पर चिदंबरम का बड़ा बयान, बोले- नाम हटाना गलत लेकिन नतीजों की वजह कहना सही नहीं

नई दिल्ली। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची से नाम हटाया जाना गलत था और जिन लोगों के नाम हटाए गए, उन्हें सूची में बने रहना चाहिए था। हालांकि उन्होंने इस दावे से दूरी बनाई कि हाल में हुए तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में तमिलगा वेत्री कषगम यानी TVK की जीत और द्रमुक की हार का कारण मतदाता सूची से नाम हटाया जाना था।
चिदंबरम ने सोमवार, 28 सितंबर को तमिलनाडु के कराईकुडी में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि चुनाव आयोग द्वारा मतदाताओं के नाम हटाना गलत था, लेकिन चुनाव परिणाम को सीधे उसी से जोड़ने के लिए पर्याप्त आधार सामने नहीं आया है। उन्होंने कहा कि यह दावा करने वालों को साबित करना होगा कि मतदाता सूची में हुए बदलाव का चुनावी नतीजों पर निर्णायक असर पड़ा।
उन्होंने साफ कहा कि जिन मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए, उन्हें सूची में शामिल रहना चाहिए था। उनके मुताबिक मतदाता सूची की शुद्धता लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए जरूरी है और किसी पात्र मतदाता का नाम गलत तरीके से हटना स्वीकार्य नहीं है। साथ ही उन्होंने यह भी जोड़ा कि वोटर लिस्ट में गड़बड़ी और चुनावी नतीजों के बीच सीधा संबंध स्थापित करने के लिए ठोस प्रमाण जरूरी हैं।
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में TVK ने जीत दर्ज की थी और द्रमुक सत्ता से बाहर हो गई थी। इसके बाद कुछ राजनीतिक हलकों में यह दावा किया गया कि मतदाता सूची से नाम हटाए जाने का असर चुनाव परिणाम पर पड़ा। चिदंबरम ने इसी दावे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह इस निष्कर्ष से सहमत नहीं हैं कि सिर्फ मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के कारण TVK जीती और द्रमुक हारी।
हालांकि SIR को लेकर कांग्रेस का विरोध जारी है। चिदंबरम ने कहा कि मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने से जुड़ी शिकायतें गंभीर हैं और इनकी जांच जरूरी है। उन्होंने SIR की मौजूदा प्रक्रिया को अन्य राज्यों में रोकने की मांग दोहराई और नियमित वार्षिक मतदाता सूची पुनरीक्षण व्यवस्था पर लौटने की बात कही।
चिदंबरम ने यह भी कहा कि कांग्रेस और विपक्षी दल चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर आगे की रणनीति तय करेंगे। उन्होंने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर विपक्ष की मांगों और आगे की कानूनी या संसदीय कार्रवाई पर कांग्रेस कार्यसमिति और INDIA गठबंधन की बैठकों में चर्चा की जाएगी।
कांग्रेस नेता ने यह भी स्पष्ट किया कि तमिलनाडु में दोबारा चुनाव कराने की मांग व्यावहारिक विकल्प नहीं है। उनके मुताबिक संविधान ऐसी परिस्थितियों में पूरे विधानसभा चुनाव को दोबारा कराने का सामान्य प्रावधान नहीं देता। इसलिए उनका जोर मतदाता सूची से जुड़ी समस्याओं को ठीक करने और भविष्य में ऐसी स्थितियों को रोकने पर है।
इस पूरे विवाद की पृष्ठभूमि में चुनाव आयोग का SIR अभियान है। देश के कई राज्यों में मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण के दौरान बड़े पैमाने पर नामों के सत्यापन, हटाने और दोबारा जोड़ने की प्रक्रिया चली। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि इससे बड़ी संख्या में पात्र मतदाताओं के नाम प्रभावित हुए। दूसरी ओर चुनाव आयोग का कहना है कि मतदाता सूची को अद्यतन रखने और अपात्र या डुप्लीकेट नामों को हटाने के लिए यह प्रक्रिया जरूरी है।
चुनाव आयोग ने यह भी कहा है कि उसके निर्णय निर्धारित कानूनी प्रक्रियाओं के तहत लिए जाते हैं और मतदाता सूची से संबंधित मामलों में प्रभावित लोगों को दावा और आपत्ति दर्ज कराने का अवसर दिया जाता है। आयोग ने राजनीतिक पक्षपात के आरोपों को स्वीकार नहीं किया है।
चिदंबरम का बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि उन्होंने एक ओर SIR प्रक्रिया और मतदाता सूची से नाम हटाने की आलोचना की, लेकिन दूसरी ओर अपनी ही राजनीतिक धारा से जुड़े उन दावों से दूरी बनाई जिनमें चुनावी हार-जीत को सीधे मतदाता सूची से जोड़ा जा रहा था।
उन्होंने कहा कि किसी भी चुनावी नतीजे के पीछे कई राजनीतिक, सामाजिक और स्थानीय कारण हो सकते हैं। इसलिए बिना पर्याप्त प्रमाण के किसी एक प्रशासनिक प्रक्रिया को चुनाव परिणाम की वजह मानना उचित नहीं होगा। उनका जोर इस बात पर रहा कि मतदाता सूची से नाम हटाना अपने आप में गलत हो सकता है, लेकिन उससे चुनाव परिणाम बदल गया, यह अलग दावा है और इसके लिए प्रमाण चाहिए।
तमिलनाडु में TVK की जीत के बाद राज्य की राजनीति में नए समीकरण बने हैं। पार्टी ने द्रमुक और अन्नाद्रमुक दोनों के सामने चुनौती पेश की है। ऐसे में SIR को लेकर चल रही बहस चुनावी नतीजों की राजनीतिक व्याख्या से भी जुड़ गई है।
फिलहाल चिदंबरम के बयान ने कांग्रेस के भीतर भी एक अपेक्षाकृत संतुलित रुख सामने रखा है। उन्होंने मतदाता सूची से नाम हटाने को गलत बताया, लेकिन TVK की जीत और द्रमुक की हार को उसी का परिणाम मानने से इनकार किया। अब SIR को लेकर कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल आगे कौन-सी रणनीति अपनाते हैं, इस पर राजनीतिक नजरें बनी हुई हैं।





