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नई दिल्ली। ऑनलाइन ट्रक बुकिंग के नाम पर लोगों से ठगी करने के आरोप में दिल्ली पुलिस ने दो युवकों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक आरोपी खुद को ट्रांसपोर्ट कंपनी का कर्मचारी बताते थे और ग्राहकों को कम किराये में ट्रक उपलब्ध कराने का भरोसा देते थे। इसके बाद एडवांस के नाम पर पैसे ले लेते थे, लेकिन तय समय पर न तो ट्रक पहुंचता था और न ही रकम वापस की जाती थी।
पुलिस का कहना है कि आरोपियों ने ऑनलाइन ट्रांसपोर्ट सेवा की जरूरत रखने वाले लोगों को निशाना बनाया। खासकर ऐसे लोग जो किसी दूसरे शहर में सामान भेजने, शिफ्टिंग कराने या व्यावसायिक माल ढुलाई के लिए इंटरनेट पर ट्रक की तलाश करते थे, उन्हें आरोपी अपने जाल में फंसाते थे।
जानकारी के अनुसार आरोपी खुद को किसी स्थापित ट्रांसपोर्ट कंपनी से जुड़ा कर्मचारी बताकर ग्राहकों से संपर्क करते थे। बातचीत के दौरान वे ट्रक की उपलब्धता, किराया, रूट और डिलीवरी से जुड़ी जानकारी इस तरह देते थे कि सामने वाले को उन पर भरोसा हो जाए। इसके बाद बुकिंग की पुष्टि करने के लिए एडवांस रकम जमा कराने को कहा जाता था।
पुलिस के मुताबिक आरोपी शुरुआत में काफी पेशेवर तरीके से बातचीत करते थे। वे ग्राहकों को यह भरोसा दिलाते थे कि ट्रक तय समय पर उपलब्ध करा दिया जाएगा। कई मामलों में वे वाहन नंबर, ड्राइवर की जानकारी या बुकिंग से जुड़ी दूसरी जानकारियां भी साझा करते थे, ताकि ग्राहक को किसी तरह का संदेह न हो।
बुकिंग तय होने के बाद आरोपी एडवांस भुगतान की मांग करते थे। जैसे ही रकम उनके बताए बैंक खाते, यूपीआई आईडी या अन्य डिजिटल माध्यम में पहुंचती थी, उनका व्यवहार बदल जाता था। कई मामलों में वे फोन उठाना बंद कर देते थे या ट्रक आने में देरी का बहाना बनाते थे।
पुलिस के अनुसार कुछ पीड़ितों को लंबे समय तक अलग-अलग वजह बताकर टालते रहने की भी कोशिश की गई। कभी ड्राइवर के रास्ते में होने की बात कही जाती, तो कभी वाहन खराब होने का बहाना बनाया जाता। आखिरकार न ट्रक पहुंचता था और न ही एडवांस रकम वापस की जाती थी।
शिकायतें मिलने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। आरोपियों के मोबाइल नंबर, बैंक खातों और डिजिटल लेन-देन से जुड़ी जानकारी खंगाली गई। तकनीकी जांच और अन्य सुरागों के आधार पर पुलिस टीम दोनों आरोपियों तक पहुंची और उन्हें गिरफ्तार कर लिया।
Delhi Police’s Cyber Police Station, South District, has busted an alleged fake logistics service fraud with the arrest of two persons who allegedly impersonated representatives of logistics companies to dupe customers by promising truck-booking services, officials said.
— ANI (@ANI) September 30, 2026
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पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि दोनों आरोपियों ने कितने लोगों को इस तरह निशाना बनाया। उनके बैंक खातों और मोबाइल फोन की जांच से अन्य पीड़ितों और लेन-देन की जानकारी सामने आने की उम्मीद है।
जांच में यह भी देखा जा रहा है कि आरोपी अकेले इस धोखाधड़ी को अंजाम दे रहे थे या उनके साथ कोई और व्यक्ति भी जुड़ा हुआ था। यदि किसी बड़े नेटवर्क की भूमिका सामने आती है तो आगे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
ऑनलाइन ट्रक बुकिंग की सुविधा ने सामान भेजने और शिफ्टिंग की प्रक्रिया आसान जरूर बनाई है, लेकिन इसके साथ साइबर ठगी के नए तरीके भी सामने आए हैं। ठग इंटरनेट पर लोगों की जरूरत का फायदा उठाकर फर्जी ट्रांसपोर्ट सेवा के नाम पर एडवांस रकम मांगते हैं।
पुलिस का कहना है कि किसी भी ट्रांसपोर्ट कंपनी को एडवांस भुगतान करने से पहले उसकी पूरी जांच करना जरूरी है। केवल फोन कॉल, व्हाट्सऐप मैसेज या किसी ऑनलाइन विज्ञापन के आधार पर भरोसा करना जोखिम भरा हो सकता है।
बुकिंग से पहले कंपनी की वेबसाइट, कार्यालय का पता, जीएसटी विवरण, ग्राहक समीक्षा और वाहन से जुड़ी जानकारी की पुष्टि की जानी चाहिए। यदि कोई व्यक्ति बहुत कम किराये का लालच देकर तुरंत पैसे जमा कराने का दबाव बना रहा हो, तो अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए।
पुलिस के अनुसार ऑनलाइन ठगी करने वाले आरोपी अक्सर सीमित समय का ऑफर, तुरंत बुकिंग या ट्रक किसी और को देने की बात कहकर ग्राहक पर दबाव बनाते हैं। इसी जल्दबाजी में कई लोग बिना पूरी जांच के भुगतान कर देते हैं।
ऐसे मामलों में यूपीआई या बैंक ट्रांसफर का रिकॉर्ड जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसलिए पीड़ितों को भुगतान से जुड़े स्क्रीनशॉट, बैंक विवरण, मोबाइल नंबर और चैट रिकॉर्ड सुरक्षित रखने चाहिए।
यदि भुगतान के बाद ट्रक उपलब्ध नहीं कराया जाता या रकम वापस नहीं मिलती, तो पीड़ित तुरंत पुलिस या साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज करा सकते हैं। जितनी जल्दी शिकायत की जाती है, उतनी ही जल्दी बैंक खाते और डिजिटल लेन-देन से जुड़ी जानकारी पर कार्रवाई संभव हो सकती है।
दिल्ली पुलिस की इस कार्रवाई के बाद एक बार फिर ऑनलाइन ट्रांसपोर्ट बुकिंग के नाम पर होने वाली धोखाधड़ी को लेकर सतर्क रहने की जरूरत सामने आई है। पुलिस दोनों आरोपियों से पूछताछ कर उनके पुराने मामलों और संभावित नेटवर्क की जानकारी जुटा रही है।
फिलहाल जांच जारी है और पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपियों ने अब तक कितनी रकम ठगी और उनके संपर्क में कितने लोग आए। शुरुआती जांच के बाद इस गिरोह से जुड़े और मामलों का भी खुलासा हो सकता है।





