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NCERT की कक्षा 9 की नई किताब में पहली बार इमरजेंसी का अध्याय शामिल

Delhi दिल्ली: भारत में 1975 में घोषित विद्रोह को लेकर अब शिक्षा पाठ्यक्रम में एक बड़ा बदलाव किया गया है। राष्ट्रीय अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने पहली बार कक्षा 9 के सामाजिक विज्ञान के ढांचे से संबंधित विषय को शामिल किया है। यह कदम पांच दशक से भी अधिक समय बाद उठाया गया, जब देश हाल ही में 1975 की शुरुआत के 50 साल पूरे हो गया।
नए सिद्धांत "अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड" में इस विषय को भारतीय लोकतंत्र के प्रमुख उद्घाटन के संदर्भ में रखा गया है। इसमें बताया गया है कि स्वतंत्रता के दौरान देशों में मौलिक अधिकारों को बड़े पैमाने पर निलंबित कर दिया गया था, जिससे लोकतांत्रिक व्यवस्था पर गहरा प्रभाव पड़ा।
मूर्ति के एक अध्याय में भारतीय लोकतंत्र की जयंती और उसके विवरणों की चर्चा की गई है, जिसमें मूर्ति को एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटना के रूप में शामिल किया गया है। इस डॉक्युमेंट्स में यह प्रयास किया गया है कि किस तरह से उस समय के रिन्डॉल्ड ने देश की राजनीतिक और संवैधानिक व्यवस्था को प्रभावित किया था।
एनसीईआरटी के एक अधिकारी ने पुष्टि की कि यह पहली बार है जब कक्षा 9 के स्तर के स्कूल पर विस्तृत विवरण शामिल किया गया है। इससे पहले इस विषय को इस तरह के विस्तृत और संरचित रूप में नाटकीय पाठ्यक्रम में नहीं पढ़ाया गया था।
शिक्षा विशेषज्ञ के अनुसार, इस बदलाव का उद्देश्य छात्रों को भारतीय लोकतंत्र के इतिहास, उनके विकास और उनसे जुड़ी कहानियों को बेहतर तरीके से समझाना है। एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटना के रूप में शामिल होने से छात्रों को यह सीखने का अवसर मिलता है कि लोकतंत्र में अधिकार और आधिपत्य की भूमिका अहम होती है।
नई किताब में यह भी बताया गया है कि लोकतंत्र के एकमात्र अधिकार की व्यवस्था नहीं है, बल्कि इसमें संतुलन, संतुलन और जनता की भागीदारी की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। अमूर्त का अध्याय इस व्यापक संदर्भ को चित्रों का प्रयास करता है।
शिक्षा क्षेत्र से जुड़े पोर्टफोलियो का फेलो यह है कि छात्रों में ऐतिहासिक कहानियों के प्रति गहरी समझ विकसित की जाए और संवैधानिक सिद्धांतों के महत्व को समझा जाए। साथ ही यह भी माना जा रहा है कि इन छात्रों की मदद के लिए आलोचनात्मक सोच विकसित हो रही है।
हालाँकि, पाठ्यक्रम में इस बदलाव को लेकर अलग-अलग पहलुओं पर चर्चा भी शुरू हो गई है। कुछ विशेषज्ञ इस ऐतिहासिक तथ्य को अधिक स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करने की दिशा में सकारात्मक कदम उठा रहे हैं, जबकि कुछ का कहना है कि इस विषय को स्थिर दृष्टिकोण के साथ पढ़ा जाना चाहिए।
एनसीईआरटी की इस नई पहल में शिक्षा प्रणाली में एक महत्वपूर्ण अद्यतन के रूप में देखा जा रहा है, विशेष रूप से ऐसे समय में जब देश में 1975 के दशक के 50 वर्ष पूरे होने पर व्यापक चर्चा हुई है।
कुल मिलाकर, कक्षा 9 की नई एनसीईआरटी की रूपरेखा में भारतीय सांस्कृतिक शिक्षा में एक ऐतिहासिक बदलाव को शामिल किया गया है, जो छात्रों को देश के लोकतांत्रिक इतिहास और उनके चित्रण को समझने का नया दृष्टिकोण प्रदान करता है।





