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केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की भर्ती और सेवा नियमों में बदलाव
Ratna Netam
8 Oct 2026 9:55 PM IST

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नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) में अधिकारियों की भर्ती, पदोन्नति और सेवा शर्तों को विनियमित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने गुरुवार, 8 अक्टूबर 2026 से 'केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) अधिनियम, 2026' को आधिकारिक रूप से लागू कर दिया है। इस कानून के तहत ग्रुप-ए जनरल ड्यूटी अधिकारियों और अन्य संबंधित अधिकारियों की भर्ती तथा सेवा शर्तों के लिए एक व्यापक कानूनी ढांचा तैयार किया गया है। नए कानून में वरिष्ठ पदों पर भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति से जुड़े प्रावधान भी शामिल हैं।
गृह मंत्रालय ने अधिनियम की धारा 1 की उपधारा (2) के तहत प्रदत्त शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए इसे लागू करने की अधिसूचना जारी की है। अधिसूचना के अनुसार, केंद्र सरकार ने 8 अक्टूबर 2026 को वह तारीख निर्धारित किया है, जिससे इस अधिनियम के सभी प्रावधान प्रभावी हो गए हैं। मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना का नंबर जीएसआर 870(ई) है।इस कानून को संसद के दोनों सदनों से अप्रैल 2026 में मंजूरी मिली थी। राज्यसभा ने इसे 1 अप्रैल और लोकसभा ने 2 अप्रैल को पारित किया था। इसके बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 9 अप्रैल 2026 को अधिनियम को अपनी स्वीकृति दी थी। राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद इसे अधिनियम संख्या 9, वर्ष 2026 के रूप में प्रकाशित किया गया। हालांकि, इसके प्रावधान लागू होने के लिए केंद्र सरकार की ओर से अलग अधिसूचना जारी किया जाना आवश्यक था, जो अब जारी कर दी गई है।
नए कानून का मुख्य उद्देश्य केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में ग्रुप-ए जनरल ड्यूटी अधिकारियों और अन्य संबंधित अधिकारियों की नियुक्ति तथा सेवा शर्तों से जुड़े नियमों को एक व्यापक कानूनी व्यवस्था के अंतर्गत लाना है। इसमें सीधी भर्ती, पदोन्नति, प्रतिनियुक्ति और सेवा से जुड़े प्रशासनिक विषय शामिल हैं।केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल देश की आंतरिक सुरक्षा, सीमाओं की निगरानी और महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाते हैं। इनमें केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF), सीमा सुरक्षा बल (BSF), केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF), भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) और सशस्त्र सीमा बल (SSB) शामिल हैं।
ये बल अलग-अलग अधिनियमों और सेवा नियमों के अंतर्गत कार्य करते हैं। नए कानून के माध्यम से संबंधित अधिकारियों की भर्ती और प्रशासनिक व्यवस्था के लिए एक साझा कानूनी ढांचा उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया है।अधिनियम के अनुसार, ग्रुप-ए जनरल ड्यूटी अधिकारी की श्रेणी में असिस्टेंट कमांडेंट और उससे ऊपर के पदों पर कार्यरत संबंधित अधिकारी शामिल हैं। इसके अतिरिक्त कानून में प्रतिनियुक्ति पर आने वाले भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारियों, भारतीय सेना से संबंधित अधिकारियों और निर्धारित भर्ती नियमों के अंतर्गत नियुक्त अन्य अधिकारियों के लिए भी प्रावधान किए गए हैं।
इस कानून का एक महत्वपूर्ण पहलू वरिष्ठ पदों पर आईपीएस अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति से संबंधित है। अधिनियम के अनुसार, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में महानिरीक्षक (IG) स्तर के 50 प्रतिशत पद आईपीएस अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति से भरे जाने का प्रावधान है। इसी प्रकार अतिरिक्त महानिदेशक (ADG) स्तर के कम से कम 67 प्रतिशत पद आईपीएस अधिकारियों के लिए निर्धारित किए गए हैं।इसके अलावा विशेष महानिदेशक और महानिदेशक स्तर के सभी पद आईपीएस अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति के माध्यम से भरे जाने का प्रावधान किया गया है। इन व्यवस्थाओं के माध्यम से वरिष्ठ नेतृत्व पदों पर आईपीएस अधिकारियों की भूमिका को वैधानिक आधार दिया गया है।
सरकार ने कानून की प्रस्तावना में कहा है कि केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण दायित्व निभाते हैं। इन बलों को राज्यों और केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों के साथ समन्वय बनाकर काम करना पड़ता है। ऐसे में प्रशासनिक व्यवस्था और विभिन्न सेवाओं के बीच तालमेल आवश्यक माना गया है।कानून में यह भी उल्लेख किया गया है कि केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की परिचालन आवश्यकताएं अन्य सरकारी संगठनों से अलग होती हैं। इन बलों में सख्त कमान प्रणाली, निर्धारित पदानुक्रम और विशेष परिचालन जिम्मेदारियां होती हैं। इसलिए भर्ती और सेवा शर्तों से जुड़े नियमों में इन विशेषताओं को ध्यान में रखने की आवश्यकता बताई गई है।
हालांकि, वरिष्ठ पदों पर आईपीएस अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति का मुद्दा लंबे समय से विवाद का विषय रहा है। केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के कैडर अधिकारियों की पदोन्नति और उच्च पदों तक पहुंच से जुड़े मामलों पर न्यायिक कार्यवाही भी हुई है।सुप्रीम कोर्ट के समक्ष भी इस विषय से जुड़े मामले पहुंचे हैं। इनमें पूर्व न्यायिक निर्देशों के अनुपालन और नए कानून की वैधता से संबंधित मुद्दे शामिल हैं। अक्टूबर 2026 में न्यायालय में दो संबंधित याचिकाओं को एक साथ सुने जाने की प्रक्रिया को लेकर भी चर्चा हुई थी।
नए कानून से पहले विभिन्न बलों के अधिकारियों की सेवा शर्तें उनके संबंधित अधिनियमों और भर्ती नियमों के अनुसार निर्धारित होती थीं। अब केंद्रीय गृह मंत्रालय को अधिनियम के प्रावधानों के तहत भर्ती, पदोन्नति और प्रतिनियुक्ति से संबंधित नियम बनाने का अधिकार दिया गया है।अधिनियम में यह व्यवस्था भी की गई है कि पहले से लागू संबंधित भर्ती नियम तब तक प्रभावी रहेंगे, जब तक उन्हें निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के अनुसार बदला नहीं जाता। इससे नई व्यवस्था लागू होने के दौरान सेवा नियमों में निरंतरता बनाए रखने का प्रावधान किया गया है।
कानून के अंतर्गत केंद्र सरकार को अधिसूचना के माध्यम से अनुसूचियों में संशोधन करने की शक्ति भी दी गई है। इसके साथ ही अधिनियम के तहत बनाए जाने वाले नियमों और जारी अधिसूचनाओं को संसद के समक्ष रखने की व्यवस्था शामिल है।एक अन्य महत्वपूर्ण प्रावधान अधिकारियों को पहले से प्राप्त वित्तीय लाभों से संबंधित है। अधिनियम के अनुसार, पूर्व आदेशों के अंतर्गत दिए गए वित्तीय लाभ नए आदेश जारी होने तक जारी रह सकते हैं। इसका उद्देश्य मौजूदा सेवा व्यवस्थाओं और नई कानूनी प्रणाली के बीच प्रशासनिक निरंतरता बनाए रखना है।केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में भर्ती और पदोन्नति की व्यवस्था का महत्व इसलिए भी है, क्योंकि इन बलों में बड़ी संख्या में अधिकारी और जवान देश के विभिन्न हिस्सों में सुरक्षा संबंधी जिम्मेदारियां निभाते हैं। इनकी सेवाएं सीमावर्ती क्षेत्रों, आंतरिक सुरक्षा अभियानों, औद्योगिक प्रतिष्ठानों और अन्य महत्वपूर्ण स्थानों पर ली जाती हैं।
अधिकारियों की नियुक्ति, पदोन्नति और उच्च पदों पर तैनाती की व्यवस्था सीधे तौर पर इन बलों के प्रशासन और नेतृत्व संरचना से जुड़ी होती है। इसलिए नए कानून के प्रावधानों का प्रभाव मुख्य रूप से संबंधित अधिकारियों की सेवा व्यवस्था और वरिष्ठ पदों की नियुक्तियों पर पड़ेगा।हालांकि, इस अधिनियम को सभी CAPF जवानों की भर्ती प्रक्रिया में तत्काल बदलाव या नई भर्ती की घोषणा के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। इसका प्रमुख विषय ग्रुप-ए जनरल ड्यूटी अधिकारियों और अन्य निर्धारित अधिकारी श्रेणियों की प्रशासनिक तथा सेवा संबंधी व्यवस्था है।
गृह मंत्रालय की अधिसूचना के बाद अब कानून के प्रावधान लागू हो गए हैं। आगे संबंधित भर्ती नियमों, पदोन्नति प्रक्रियाओं और प्रतिनियुक्ति व्यवस्थाओं को अधिनियम के अनुरूप संचालित किया जाएगा।फिलहाल केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) अधिनियम, 2026 के लागू होने से CAPF की अधिकारी सेवा व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण कानूनी परिवर्तन हुआ है। इस कानून के तहत भर्ती, पदोन्नति और वरिष्ठ नेतृत्व पदों के लिए वैधानिक प्रावधान निर्धारित किए गए हैं। आने वाले समय में संबंधित नियमों के क्रियान्वयन और न्यायिक प्रक्रियाओं के परिणामों के आधार पर इसके प्रशासनिक प्रभाव अधिक स्पष्ट होंगे।
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