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नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन की नई राष्ट्रीय टीम का ऐलान होने के साथ ही अब राजनीतिक गलियारों में एक और बड़े बदलाव की चर्चा तेज हो गई है। सवाल उठ रहा है कि क्या भाजपा संगठन में फेरबदल के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने केंद्रीय मंत्रिमंडल में भी बदलाव करने वाले हैं? फिलहाल सरकार या भाजपा की ओर से कैबिनेट फेरबदल की कोई आधिकारिक तारीख घोषित नहीं की गई है, लेकिन हाल की नियुक्तियों और पिछले कुछ सप्ताह की राजनीतिक गतिविधियों ने अटकलों को जरूर हवा दी है।
17 अगस्त को घोषित नितिन नबीन की नई टीम में स्मृति ईरानी और राम माधव जैसे बड़े नेताओं की संगठन में वापसी हुई है। वहीं केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल को भाजपा का राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष बनाया जाना खास तौर पर चर्चा का विषय बन गया है। इसी नियुक्ति के बाद यह सवाल और तेज हो गया कि क्या संगठन में आए बदलाव का अगला चरण मोदी सरकार के मंत्रिपरिषद में फेरबदल हो सकता है।
पीयूष गोयल की नियुक्ति से क्यों बढ़ी चर्चा?
पीयूष गोयल मोदी सरकार में केंद्रीय मंत्री हैं। अब उन्हें भाजपा संगठन में राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी भी दी गई है। इसी फैसले को लेकर राजनीतिक विश्लेषकों और मीडिया रिपोर्टों में संभावित कैबिनेट फेरबदल की चर्चा हो रही है।
हालांकि पार्टी की जिम्मेदारी मिलने का अर्थ अपने आप यह नहीं है कि कोई नेता केंद्रीय मंत्रिमंडल से बाहर होने वाला है। भाजपा में नेता सरकार और संगठन दोनों स्तरों पर जिम्मेदारियां निभाते रहे हैं। इसलिए गोयल की नियुक्ति को मंत्रिमंडल में बदलाव की पुष्टि नहीं माना जा सकता।
मोदी-शाह की बैठक के बाद से चल रही अटकलें
कैबिनेट फेरबदल की चर्चा नई नहीं है। जुलाई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बीच लंबी बैठक के बाद भी भाजपा संगठन और केंद्रीय मंत्रिमंडल में संभावित बदलाव की अटकलें तेज हुई थीं।
उस समय रिपोर्टों में कहा गया था कि चर्चा भाजपा के नए संगठनात्मक ढांचे को अंतिम रूप देने के साथ संभावित मंत्रिमंडल फेरबदल से भी जुड़ी हो सकती है। हालांकि बैठक के एजेंडे को लेकर कोई आधिकारिक विस्तृत जानकारी जारी नहीं की गई थी।
अब संगठनात्मक फेरबदल का एक बड़ा हिस्सा पूरा हो जाने के बाद राजनीतिक नजरें स्वाभाविक रूप से केंद्र सरकार पर टिक गई हैं।
क्या नए चेहरों को मिल सकता है मौका?
अगर प्रधानमंत्री मोदी मंत्रिपरिषद में बदलाव करते हैं तो नए चेहरों को जगह मिलने की संभावना पर भी चर्चा होगी। भाजपा के सामने आने वाले वर्षों में कई महत्वपूर्ण विधानसभा चुनाव हैं। इसके अलावा 2029 के लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए पार्टी संगठन और सरकार दोनों में क्षेत्रीय तथा सामाजिक संतुलन बनाने की कोशिश कर सकती है।
नितिन नबीन की नई टीम में भी महिला और अल्पसंख्यक प्रतिनिधित्व के साथ अलग-अलग सामाजिक समूहों को जगह दी गई है। रिपोर्टों के मुताबिक नई राष्ट्रीय टीम में 10 महिलाओं और छह अल्पसंख्यक समुदायों से जुड़े नेताओं को जिम्मेदारी मिली है।
इसी तरह संभावित मंत्रिमंडल फेरबदल में राज्यों और सहयोगी दलों के प्रतिनिधित्व को भी ध्यान में रखा जा सकता है।
कुछ मंत्रियों को संगठन में भेजने की चर्चा
भाजपा के संगठनात्मक फेरबदल से पहले आई रिपोर्टों में यह संभावना भी जताई गई थी कि केंद्र सरकार के कुछ मंत्रियों को पार्टी संगठन में भेजा जा सकता है। संगठन और सरकार के बीच नेताओं की अदला-बदली भाजपा में पहले भी होती रही है।
नितिन नबीन की टीम तैयार होने के दौरान भी ऐसी अटकलें सामने आई थीं कि कुछ केंद्रीय मंत्रियों की जिम्मेदारियों में बदलाव हो सकता है।
लेकिन अभी तक इस संबंध में प्रधानमंत्री कार्यालय या भाजपा नेतृत्व की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। इसलिए संभावित नामों को लेकर चल रही चर्चाओं को फिलहाल अटकल के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
चुनावी राज्यों का समीकरण भी महत्वपूर्ण
भाजपा के लिए आने वाला चुनावी कैलेंडर काफी महत्वपूर्ण है। नई राष्ट्रीय टीम को भी आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखकर तैयार किए जाने की बात सामने आई है। स्मृति ईरानी जैसे अनुभवी नेताओं को संगठन में वापस लाना और राम माधव को बड़ी जिम्मेदारी देना इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
अगर केंद्रीय मंत्रिमंडल में फेरबदल होता है तो उत्तर प्रदेश सहित चुनावी रूप से महत्वपूर्ण राज्यों के प्रतिनिधित्व पर भी नजर रहेगी। इसके साथ NDA के सहयोगी दलों के राजनीतिक समीकरण भी किसी संभावित बदलाव में महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
फिलहाल इंतजार आधिकारिक ऐलान का
नितिन नबीन की नई टीम आने के बाद भाजपा के संगठनात्मक बदलाव की तस्वीर काफी हद तक साफ हो गई है। अब सबकी निगाह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अगले कदम पर है। कैबिनेट फेरबदल की चर्चा जरूर तेज है, लेकिन अभी इसे तय फैसला नहीं कहा जा सकता।
पीयूष गोयल को संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी, मोदी-शाह की पूर्व बैठक और चुनावी तैयारियों के कारण इन अटकलों को राजनीतिक आधार मिला है। लेकिन मंत्रिपरिषद में किसे शामिल किया जाएगा, किसकी जिम्मेदारी बदलेगी या फेरबदल कब होगा, इसे लेकर कोई आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है।
ऐसे में नितिन नबीन को नई टीम मिलने के बाद अगला बड़ा राजनीतिक सवाल यही है कि क्या अब प्रधानमंत्री मोदी भी अपनी 'टीम' में बदलाव करेंगे। इसका जवाब प्रधानमंत्री के आधिकारिक फैसले के बाद ही मिलेगा।
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