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दिल्ली-एनसीआर
टूटे चावल से एथनॉल उत्पादन पर केंद्र का बड़ा बयान, महंगाई बढ़ने की आशंका से किया इनकार
nidhi
30 July 2026 7:40 AM IST

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टूटे चावल के उपयोग पर सरकार का स्पष्टीकरण, एथनॉल नीति से महंगाई नहीं बढ़ेगी
नई दिल्ली : केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि एथनॉल उत्पादन के लिए टूटे (ब्रोकन) चावल के उपयोग से देश में चावल की कीमतों या खाद्य महंगाई पर कोई प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा। सरकार का कहना है कि एथनॉल निर्माण में केवल अधिशेष और निर्धारित श्रेणी के टूटे चावल का उपयोग किया जा रहा है, जिससे आम उपभोक्ताओं के लिए उपलब्ध खाद्यान्न पर कोई दबाव नहीं पड़ेगा।
सरकार ने यह स्पष्टीकरण ऐसे समय में दिया है, जब एथनॉल उत्पादन के लिए चावल के उपयोग को लेकर विभिन्न स्तरों पर सवाल उठाए जा रहे थे। कुछ विशेषज्ञों ने आशंका जताई थी कि यदि खाद्यान्न का बड़ा हिस्सा ईंधन उत्पादन में इस्तेमाल होगा तो बाजार में कीमतें बढ़ सकती हैं। हालांकि सरकार ने इन आशंकाओं को खारिज करते हुए कहा कि खाद्य सुरक्षा और सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) की जरूरतों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।
केवल अधिशेष टूटे चावल का हो रहा उपयोग
सरकारी अधिकारियों के अनुसार, एथनॉल उत्पादन में सामान्य उपभोग वाले चावल की बजाय टूटे चावल का इस्तेमाल किया जा रहा है। यह वह श्रेणी है जिसका उपयोग आम तौर पर सीमित खाद्य और औद्योगिक उद्देश्यों के लिए होता है। इसलिए इससे बाजार में उपलब्ध खाद्यान्न की आपूर्ति प्रभावित नहीं होगी।
सरकार ने यह भी कहा कि देश में पर्याप्त खाद्यान्न भंडार उपलब्ध है और आवश्यक जरूरतों को पूरा करने के बाद ही एथनॉल निर्माण के लिए कच्चा माल आवंटित किया जाता है।
एथनॉल मिश्रण कार्यक्रम को मिलेगा बढ़ावा
केंद्र सरकार पेट्रोल में एथनॉल मिश्रण बढ़ाने की नीति पर लगातार काम कर रही है। इसका उद्देश्य कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना, किसानों को अतिरिक्त आय के अवसर उपलब्ध कराना और पर्यावरण के अनुकूल ईंधन को बढ़ावा देना है।
एथनॉल मिश्रण कार्यक्रम के तहत गन्ना, मक्का और अन्य स्वीकृत कृषि उत्पादों के साथ-साथ कुछ परिस्थितियों में टूटे चावल का भी उपयोग किया जाता है। सरकार का कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया तय मानकों और उपलब्धता के आधार पर संचालित की जाती है।
खाद्य सुरक्षा पर नहीं पड़ेगा असर
सरकार ने भरोसा दिलाया है कि देश की खाद्य सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह सुरक्षित है। सार्वजनिक वितरण प्रणाली, गरीब कल्याण योजनाओं और अन्य सरकारी जरूरतों के लिए आवश्यक अनाज की उपलब्धता सुनिश्चित करने के बाद ही अतिरिक्त स्टॉक का उपयोग एथनॉल उत्पादन में किया जाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कच्चे माल का चयन संतुलित तरीके से किया जाए और खाद्यान्न भंडारण पर लगातार निगरानी रखी जाए, तो एथनॉल कार्यक्रम और खाद्य सुरक्षा दोनों के बीच संतुलन बनाए रखा जा सकता है।
किसानों और ऊर्जा क्षेत्र को होगा लाभ
सरकार का कहना है कि एथनॉल उत्पादन से किसानों को अपनी फसलों के बेहतर दाम मिलने की संभावना बढ़ती है। साथ ही, जैव ईंधन के उपयोग से प्रदूषण कम करने और ऊर्जा आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को भी मजबूती मिलती है।
फिलहाल केंद्र सरकार ने दोहराया है कि एथनॉल बनाने में टूटे चावल के इस्तेमाल से खाद्यान्न की उपलब्धता या महंगाई पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा और इस संबंध में सभी आवश्यक निगरानी तंत्र सक्रिय हैं।
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