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प्रणब मुखर्जी की समाधि निर्माण को केंद्र की मंजूरी, राष्ट्रीय स्मृति स्थल में बनेगा स्मारक

नई दिल्ली : केंद्र सरकार ने भारत के पूर्व राष्ट्रपति और भारत रत्न से सम्मानित प्रणब मुखर्जी की समाधि के निर्माण को मंजूरी दे दी है। उनकी समाधि दिल्ली के राजघाट परिसर स्थित राष्ट्रीय स्मृति (राष्ट्रीय स्मृति स्थल) में बनाई जाएगी। इस फैसले के बाद स्मारक निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ा दी गई है।
प्रणब मुखर्जी का निधन 31 अगस्त 2020 को दिल्ली में हुआ था। वह 84 वर्ष के थे। देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद राष्ट्रपति के अलावा उन्होंने केंद्र सरकार में वित्त, विदेश और रक्षा जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी भी संभाली थी। उनके लंबे राजनीतिक और प्रशासनिक योगदान को देखते हुए उनकी समाधि बनाने का निर्णय लिया गया है।
केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद अब समाधि निर्माण से जुड़ी औपचारिक प्रक्रियाएं शुरू हो गई हैं। स्मारक के डिजाइन और निर्माण योजना पर काम आगे बढ़ाया जा रहा है। इसके लिए संबंधित विभागों के बीच समन्वय किया जा रहा है।
जानकारी के अनुसार, वर्ष 2026 में दिल्ली शहरी कला आयोग (DUAC) ने समाधि के प्रारूप में कुछ डिजाइन संबंधी संशोधन सुझाए थे। इसके बाद केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (CPWD) ने संशोधित प्राथमिक प्रस्ताव तैयार कर डीयूएसी को सौंप दिया है। अब इस प्रस्ताव पर आगे की प्रक्रिया चल रही है।
केंद्रीय लोक निर्माण विभाग समाधि निर्माण से जुड़े बजट का इंतजार कर रहा है। इसके लिए बनाए गए ट्रस्ट से धनराशि मिलने के बाद निर्माण कार्य को गति मिलने की उम्मीद है।
राष्ट्रीय स्मृति स्थल देश के पूर्व प्रधानमंत्रियों और प्रमुख नेताओं की स्मृतियों को संरक्षित करने के लिए विकसित किया गया महत्वपूर्ण परिसर है। यहां कई पूर्व राष्ट्रीय नेताओं के स्मारक बनाए गए हैं। अब इसी परिसर में प्रणब मुखर्जी की समाधि भी बनाई जाएगी।
प्रणब मुखर्जी भारतीय राजनीति के उन नेताओं में शामिल रहे हैं, जिन्होंने कई दशकों तक देश की सेवा की। उनका राजनीतिक जीवन पांच दशक से अधिक समय तक चला। वह कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं में रहे और केंद्र सरकार में कई अहम पदों पर कार्य किया।
वर्ष 2012 में प्रणब मुखर्जी देश के राष्ट्रपति चुने गए थे। राष्ट्रपति बनने से पहले उन्होंने वित्त मंत्री, विदेश मंत्री और रक्षा मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पद संभाले। उनके अनुभव और संसदीय ज्ञान के कारण उन्हें भारतीय राजनीति का एक कुशल रणनीतिकार माना जाता था।
उनके योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें वर्ष 2019 में देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया था। राष्ट्रपति पद से हटने के बाद भी वह सार्वजनिक जीवन और सामाजिक विषयों से जुड़े रहे।
समाधि निर्माण का उद्देश्य उनके योगदान और सार्वजनिक जीवन की विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना है। स्मारक स्थल पर उनके जीवन, राजनीतिक यात्रा और देश के प्रति योगदान को दर्शाने की योजना भी बनाई जा सकती है।
अधिकारियों के अनुसार, समाधि निर्माण में वास्तुकला, पर्यावरण और स्मारक की गरिमा को ध्यान में रखा जाएगा। राष्ट्रीय स्मृति स्थल परिसर की मौजूदा संरचना और आसपास के वातावरण के अनुरूप डिजाइन तैयार किया जा रहा है।
प्रणब मुखर्जी के परिवार और समर्थकों के लिए भी यह एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। उनके लंबे राजनीतिक सफर और देश के विकास में योगदान को देखते हुए उनकी स्मृति को स्थायी रूप से संरक्षित करने की दिशा में यह पहल की गई है।
केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद अब सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी होने के साथ समाधि निर्माण का रास्ता साफ हो गया है। बजट और अंतिम डिजाइन को मंजूरी मिलने के बाद निर्माण कार्य शुरू होने की संभावना है।
प्रणब मुखर्जी की समाधि राष्ट्रीय स्मृति स्थल में देश के एक अनुभवी राजनेता और पूर्व राष्ट्रपति के योगदान की याद के रूप में स्थापित होगी, जहां आने वाली पीढ़ियां उनके सार्वजनिक जीवन और उपलब्धियों को जान सकेंगी।





