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दिल्ली-एनसीआर
वायु प्रदूषण से निपटने के लिए केंद्र सरकार की नई पहल भूपेंद्र यादव ने की अहम बैठक
Ratna Netam
17 Oct 2026 4:40 PM IST

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नई दिल्ली। दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते वायु प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने तकनीक आधारित समाधानों पर जोर देना शुरू कर दिया है। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने शनिवार, 17 अक्टूबर 2026 को स्टार्टअप्स और तकनीकी नवाचार से जुड़ी कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ महत्वपूर्ण बैठक की। इस दौरान प्रदूषण नियंत्रण के लिए किफायती, प्रभावी और बड़े स्तर पर लागू किए जा सकने वाले तकनीकी उपायों पर चर्चा हुई। बैठक का मुख्य उद्देश्य प्रदूषण के स्रोतों की पहचान करना, वास्तविक समय में निगरानी को मजबूत बनाना और नियमों का प्रभावी पालन सुनिश्चित करना था।
साफ हवा के लिए सरकार की नई पहल
यह बैठक केंद्र सरकार के 'साफ हवा में हिस्सेदारी, हम सभी की है जिम्मेदारी' अभियान के तहत आयोजित की गई। इस अभियान का उद्देश्य वायु प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए सरकारी संस्थाओं, तकनीकी विशेषज्ञों, स्टार्टअप्स और आम नागरिकों की भागीदारी बढ़ाना है।केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि प्रदूषण नियंत्रण के लिए केवल नीतियां बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि ऐसे तकनीकी समाधान विकसित करना भी जरूरी है, जिन्हें जमीन पर प्रभावी तरीके से लागू किया जा सके।बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि नई तकनीकों का उपयोग वास्तविक परिस्थितियों में प्रदूषण कम करने और निगरानी व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए किया जाए।
रियल-टाइम मॉनिटरिंग पर विशेष जोर
बैठक के दौरान प्रदूषण की वास्तविक समय में निगरानी करने वाली तकनीकों पर विस्तार से चर्चा हुई। इनमें आधुनिक सेंसर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल निगरानी प्रणाली जैसे उपाय शामिल रहे।इन तकनीकों की मदद से प्रदूषण फैलाने वाले स्रोतों की पहचान करने और संबंधित एजेंसियों तक समय पर जानकारी पहुंचाने की क्षमता बढ़ाई जा सकती है।सरकार का उद्देश्य ऐसी निगरानी व्यवस्था विकसित करना है, जिसके जरिए औद्योगिक उत्सर्जन, वाहनों से निकलने वाले धुएं और अन्य प्रदूषणकारी गतिविधियों का बेहतर आकलन किया जा सके।
AI और ड्रोन तकनीक से प्रदूषण पर निगरानी
बैठक में स्टार्टअप्स ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित प्रदूषण स्रोतों की पहचान, ड्रोन मैपिंग, औद्योगिक उत्सर्जन की निगरानी और पराली जलाने की घटनाओं का पता लगाने से जुड़े तकनीकी समाधान प्रस्तुत किए।इसके अतिरिक्त प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र प्रणाली और औद्योगिक निगरानी उपकरणों में छेड़छाड़ रोकने वाली तकनीकों पर भी चर्चा हुई।केंद्रीय मंत्री ने प्रदूषण प्रबंधन से जुड़े नौ प्रमुख क्षेत्रों में तकनीकी समाधान तलाशने पर जोर दिया। इन समाधानों को मौजूदा सरकारी योजनाओं के साथ जोड़कर लागू करने की संभावनाओं पर विचार किया गया।
केंद्रीय और दिल्ली सरकार के मंत्री रहे मौजूद
इस महत्वपूर्ण बैठक में केंद्रीय पर्यावरण राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह और दिल्ली सरकार के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा भी उपस्थित रहे।इसके अलावा केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय, आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, दिल्ली सरकार, वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM), केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।बैठक में विभिन्न विभागों के बीच समन्वय बढ़ाने और तकनीकी नवाचारों को सरकारी प्रदूषण नियंत्रण कार्यक्रमों से जोड़ने पर चर्चा की गई।
पराली और औद्योगिक प्रदूषण को रोकने की तैयारी
केंद्रीय मंत्री ने कृषि अवशेषों के प्रबंधन और पराली जलाने से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए प्रभावी तकनीकी उपाय तलाशने पर भी जोर दिया।उन्होंने संबंधित एजेंसियों को पराली भंडारण के लिए दिशा-निर्देश तैयार करने और खेतों में कृषि अवशेषों के सुरक्षित भंडारण के व्यावहारिक मॉडल विकसित करने की संभावनाएं तलाशने को कहा।औद्योगिक प्रदूषण की निगरानी को मजबूत बनाने के लिए निरंतर उत्सर्जन निगरानी प्रणाली के आंकड़ों को संयंत्रों के संचालन संबंधी जानकारी से जोड़ने पर भी चर्चा हुई।
पहले से चल रहे प्रदूषण नियंत्रण अभियान को मिलेगी मजबूती
दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण कम करने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें पहले से विभिन्न कार्यक्रम चला रही हैं। इनमें ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP), स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देना, इलेक्ट्रिक वाहनों का विस्तार और वायु गुणवत्ता निगरानी नेटवर्क को मजबूत करना शामिल है।इससे पहले 13 अक्टूबर को केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने दिल्ली के आनंद विहार में प्रदूषण नियंत्रण उपायों की समीक्षा की थी। उस दौरान 13 नए वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्रों का उद्घाटन भी किया गया था।
तकनीक के जरिए स्वच्छ हवा देने का लक्ष्य
सरकार का मानना है कि प्रदूषण नियंत्रण में नई तकनीकों का उपयोग बढ़ाने से निगरानी और नियमों के पालन की व्यवस्था अधिक प्रभावी बनाई जा सकती है।स्टार्टअप्स के साथ आयोजित इस बैठक के जरिए ऐसे समाधान खोजने की कोशिश की जा रही है, जो कम लागत में उपलब्ध हों और दिल्ली-एनसीआर के विभिन्न क्षेत्रों में लागू किए जा सकें।हालांकि, इन तकनीकों को व्यापक स्तर पर लागू करने और उनके वास्तविक प्रभाव का आकलन करने के लिए आगे परीक्षण तथा संबंधित एजेंसियों के निर्णय आवश्यक होंगे।
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