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किसानों के लिए केंद्र सरकार का बड़ा प्लान खेती के साथ बिजली उत्पादन का मिलेगा मौका
Ratna Netam
19 Oct 2026 4:35 PM IST

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नई दिल्ली। देश के किसानों की आय बढ़ाने और स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार एक नई पहल पर काम कर रही है। नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) एग्रीवोल्टाइक्स तकनीक को केंद्र समर्थित योजना के दायरे में लाने की तैयारी कर रहा है। इस मॉडल के तहत किसान अपनी कृषि भूमि पर खेती करने के साथ-साथ सौर ऊर्जा का उत्पादन भी कर सकेंगे। इससे किसानों को फसल उत्पादन के अलावा बिजली उत्पादन से अतिरिक्त आमदनी प्राप्त करने का अवसर मिल सकता है।नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के सचिव संतोष कुमार सारंगी ने सोमवार, 19 अक्टूबर को बताया कि सरकार इस मॉडल को देश के विभिन्न राज्यों में लागू करने के लिए वित्तीय सहायता देने की संभावनाओं पर विचार कर रही है। इसके लिए वित्त मंत्रालय के साथ बातचीत की जा रही है।
किसानों को खेती के साथ बिजली उत्पादन का मिलेगा अवसर
संतोष कुमार सारंगी ने एग्रीवोल्टाइक्स पर आयोजित होने वाले सम्मेलन से पहले पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि केंद्र सरकार का उद्देश्य राज्यों को इस तकनीक को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है।उन्होंने बताया कि मंत्रालय एक ऐसी केंद्रीय योजना तैयार करने की दिशा में काम कर रहा है, जिसके माध्यम से राज्यों को शुरुआती सहायता उपलब्ध कराई जा सके।सरकार का प्रयास है कि किसान अपनी जमीन का बेहतर इस्तेमाल कर सकें और कृषि उत्पादन के साथ नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में भी भागीदारी निभाएं।
क्या है एग्रीवोल्टाइक्स तकनीक?
एग्रीवोल्टाइक्स एक ऐसी आधुनिक तकनीक है, जिसमें एक ही कृषि भूमि पर खेती और सौर ऊर्जा उत्पादन की व्यवस्था की जाती है।इसके तहत खेतों में सोलर पैनल इस तरह लगाए जाते हैं कि उनके नीचे या आसपास फसलें उगाई जा सकें। पैनलों की ऊंचाई, उनके बीच की दूरी और फसलों का चयन इस मॉडल की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।इस तकनीक से जमीन का दोहरा उपयोग संभव होता है। कुछ परिस्थितियों में सोलर पैनलों से मिलने वाली आंशिक छाया फसलों को अत्यधिक गर्मी से बचाने में भी सहायक हो सकती है। हालांकि, इसका लाभ स्थानीय मौसम, फसल और परियोजना की डिजाइन पर निर्भर करता है।
पीएम-कुसुम योजना में किया जा सकता है शामिल
मंत्रालय के सचिव ने बताया कि एग्रीवोल्टाइक्स को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के लिए दो विकल्पों पर विचार किया जा रहा है।पहला विकल्प इस तकनीक को प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान यानी पीएम-कुसुम जैसी मौजूदा योजना में शामिल करना है। दूसरा विकल्प इसके लिए अलग केंद्रीय योजना शुरू करना हो सकता है।सरकार पीएम-कुसुम के अगले चरण में आधुनिक सिंचाई प्रणालियों और एग्रीवोल्टाइक्स जैसी तकनीकों को बढ़ावा देने की संभावनाओं पर भी काम कर रही है।
वित्त मंत्रालय से सहायता को लेकर बातचीत
सारंगी ने कहा कि केंद्र सरकार चाहती है कि अधिक से अधिक राज्य इस मॉडल को अपनाएं। इसके लिए शुरुआती वित्तीय प्रोत्साहन महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।मंत्रालय वित्त मंत्रालय के साथ मिलकर सहायता की रूपरेखा तैयार करने पर विचार कर रहा है। हालांकि, अभी एग्रीवोल्टाइक्स के लिए अलग सब्सिडी की राशि, पात्रता और आवेदन प्रक्रिया की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी मिलने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि किसानों को कितनी वित्तीय सहायता दी जाएगी और योजना किन राज्यों में लागू होगी।
पीएम-कुसुम योजना के जरिए सौर ऊर्जा को बढ़ावा
केंद्र सरकार पहले से ही पीएम-कुसुम योजना के माध्यम से किसानों को सौर ऊर्जा अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है।इस योजना के तहत कृषि पंपों के सौरीकरण और सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने के लिए विभिन्न प्रकार की सहायता उपलब्ध कराई जाती रही है।मंत्रालय के अनुसार, पीएम-कुसुम योजना का मूल लक्ष्य कृषि क्षेत्र में डीजल पर निर्भरता कम करना और किसानों की आय बढ़ाना है। योजना में किसानों द्वारा बिजली वितरण कंपनियों को सौर ऊर्जा बेचने का प्रावधान भी शामिल है।
किसानों की आय बढ़ाने में मददगार हो सकती है तकनीक
एग्रीवोल्टाइक्स मॉडल से किसानों के लिए आय के अतिरिक्त स्रोत विकसित होने की संभावना है। खेती से मिलने वाली आमदनी के साथ सौर ऊर्जा उत्पादन से भी आर्थिक लाभ प्राप्त किया जा सकता है।विशेषज्ञों के अनुसार, इस तकनीक को बड़े स्तर पर अपनाने के लिए सोलर पैनलों की लागत, फसलों पर छाया का प्रभाव, सिंचाई व्यवस्था और बिजली खरीद संबंधी नियमों पर ध्यान देना जरूरी होगा।इसके अलावा राज्यों की कृषि परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग तकनीकी मॉडल अपनाने की आवश्यकता पड़ सकती है।
राज्यों को मिलेगी नई तकनीक अपनाने की प्रेरणा
केंद्र सरकार का मानना है कि राज्यों को शुरुआती प्रोत्साहन मिलने से कृषि क्षेत्र में सौर ऊर्जा के इस्तेमाल का विस्तार हो सकता हैएग्रीवोल्टाइक्स मॉडल का व्यापक उपयोग खेती और ऊर्जा उत्पादन के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने में मदद कर सकता है। साथ ही इससे स्वच्छ ऊर्जा क्षमता बढ़ाने के राष्ट्रीय प्रयासों को भी समर्थन मिलेगा।फिलहाल मंत्रालय योजना की वित्तीय और प्रशासनिक रूपरेखा पर काम कर रहा है। अंतिम निर्णय के बाद ही किसानों के लिए सहायता और क्रियान्वयन की विस्तृत व्यवस्था स्पष्ट होगी।
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