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दिल्ली-एनसीआर
आत्मनिर्भर पंचायतों के निर्माण पर केंद्र का जोर, गांवों में लगेंगे EV चार्जिंग स्टेशन
Ratna Netam
31 Oct 2026 3:13 PM IST

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नई दिल्ली। देश की ग्रामीण पंचायतों को आर्थिक रूप से मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। केंद्रीय पंचायती राज एवं मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने सभी संबंधित पक्षों से आत्मनिर्भर पंचायत और विकसित पंचायत बनाने के लिए मिलकर प्रयास करने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत का लक्ष्य तभी हासिल किया जा सकता है, जब देश की ग्राम पंचायतें मजबूत, सक्षम और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनें। इसी दिशा में पंचायतों के पास उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करने और आय के नए स्रोत विकसित करने की आवश्यकता है।केंद्रीय मंत्री 30 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला में संबोधित कर रहे थे। पंचायती राज मंत्रालय की ओर से आयोजित यह कार्यशाला पीपुल्स प्लान कैंपेन (People's Plan Campaign) 2026-27 के तहत आयोजित की गई। इसमें देशभर से 400 से अधिक प्रतिनिधियों और अधिकारियों ने भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान पीपुल्स प्लान कैंपेन 2026-27 की हिंदी और अंग्रेजी पुस्तिका का विमोचन भी किया गया। इसके साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने और पंचायतों की आमदनी बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए।
पंचायतों की जमीन पर बनेंगे EV चार्जिंग स्टेशन
कार्यशाला का सबसे महत्वपूर्ण पहलू पंचायती राज मंत्रालय और कन्वर्जेंस एनर्जी सर्विसेज लिमिटेड (CESL) के बीच हुआ समझौता रहा। इसके तहत देशभर में पंचायतों की जमीन पर इलेक्ट्रिक वाहन (EV) चार्जिंग स्टेशन और बैटरी स्वैपिंग स्टेशन स्थापित करने की योजना बनाई गई है। CESL, एनर्जी एफिशिएंसी सर्विसेज लिमिटेड (EESL) की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी है, जो केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय के अंतर्गत आती है।इस समझौते का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए जरूरी बुनियादी ढांचा विकसित करना और पंचायतों के लिए आय के नए अवसर तैयार करना है। अभी तक इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चार्जिंग सुविधाएं मुख्य रूप से शहरी क्षेत्रों और बड़े शहरों में विकसित की जा रही हैं। लेकिन इस पहल के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में भी चार्जिंग सुविधाओं का विस्तार करने का रास्ता खुलेगा।इस योजना के तहत ग्राम पंचायतों, ब्लॉक पंचायतों और जिला पंचायतों के पास उपलब्ध उपयुक्त जमीन का इस्तेमाल किया जा सकेगा। राज्य और राष्ट्रीय राजमार्गों के आसपास मौजूद पंचायत भूमि पर भी संभावित चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जा सकेंगे। इन केंद्रों पर दोपहिया, तिपहिया, चारपहिया और मध्यम एवं भारी वाहनों के लिए चार्जिंग की सुविधाएं विकसित करने की योजना है। बैटरी स्वैपिंग स्टेशन के माध्यम से ऐसे इलेक्ट्रिक वाहनों को भी सुविधा मिल सकेगी, जिनमें चार्जिंग के बजाय बैटरी बदलने की व्यवस्था होती है।
पंचायतों को होगी नियमित आमदनी
इस समझौते का एक बड़ा फायदा पंचायतों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करना है। पंचायतों के सामने लंबे समय से अपनी आमदनी बढ़ाने और सरकारी अनुदान पर निर्भरता कम करने की चुनौती रही है। ऐसे में पंचायतों की जमीन को आय के स्रोत के रूप में विकसित करने की यह पहल महत्वपूर्ण मानी जा रही है।चार्जिंग और बैटरी स्वैपिंग स्टेशन स्थापित होने से पंचायतों को अपने स्वयं के राजस्व (Own Source Revenue-OSR) में वृद्धि करने का अवसर मिलेगा। इस आय का इस्तेमाल स्थानीय विकास कार्यों, नागरिक सुविधाओं, बुनियादी ढांचे और सामुदायिक कल्याण से जुड़ी योजनाओं में किया जा सकेगा।समझौते के अनुसार, पंचायती राज मंत्रालय राज्यों के पंचायती राज विभागों के साथ समन्वय स्थापित करेगा। इसके माध्यम से उपयुक्त स्थानों की पहचान और उनकी निगरानी की जाएगी। वहीं CESL की जिम्मेदारी साइट का आकलन करने, मांग के अनुसार व्यवस्था तैयार करने, उपकरणों की आपूर्ति, स्थापना, परीक्षण, संचालन शुरू करने और रखरखाव की होगी।इससे पंचायतों को इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग के लिए जरूरी तकनीकी व्यवस्था विकसित करने में सहयोग मिलेगा। हालांकि, अलग-अलग स्थानों पर स्टेशन स्थापित करने की प्रक्रिया संबंधित साइट की उपयुक्तता और मांग के आकलन पर निर्भर करेगी।
प्रधानमंत्री विकसित ग्राम स्वराज योजना पर भी चर्चा
कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ने प्रधानमंत्री विकसित ग्राम स्वराज योजना (PM VGSY) के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इस महत्वपूर्ण योजना को मंजूरी दी है। यह पहल विकसित भारत के राष्ट्रीय लक्ष्य के अनुरूप ग्रामीण शासन व्यवस्था को मजबूत और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में तैयार की गई है।योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी योजनाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने, ग्राम सभाओं में चर्चा और विचार-विमर्श को प्रोत्साहित करने तथा केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर जोर दिया जाएगा। इसके लिए विभिन्न विभागों की योजनाओं को एक साझा डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने की दिशा में भी काम किया जाएगा।इसके साथ ही ग्राम पंचायत विकास योजना (GPDP) को समय पर तैयार करने और पंचायत प्रतिनिधियों एवं संबंधित हितधारकों की क्षमता बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। सरकार का उद्देश्य है कि ग्राम पंचायतें स्थानीय जरूरतों और उपलब्ध संसाधनों को ध्यान में रखते हुए विकास की योजनाएं तैयार करें। इससे गांवों में विकास कार्यों की प्राथमिकताएं स्थानीय स्तर पर तय करने में मदद मिलेगी।केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पंचायतें तभी वास्तविक अर्थों में आत्मनिर्भर बन सकती हैं, जब ग्राम सभाएं आत्मविश्वास के साथ विकास की योजनाएं तैयार करें, पंचायतों के अपने राजस्व में लगातार वृद्धि हो और सरकार के अलग-अलग स्तरों के बीच बेहतर तालमेल बना रहे। उन्होंने पंचायतों से अपनी आय बढ़ाने के लिए स्थायी स्रोत तलाशने और प्रदर्शन आधारित अनुदान प्राप्त करने की पात्रता मजबूत करने का भी आह्वान किया।
विकास योजनाओं में आम नागरिकों की भागीदारी जरूरी
कार्यशाला में पंचायती राज मंत्रालय के सचिव डॉ. विनीत जोशी ने भी ग्रामीण विकास योजनाओं में जनभागीदारी और तकनीक के इस्तेमाल को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2018 से 'सबकी योजना, सबका विकास' थीम के तहत संचालित पीपुल्स प्लान कैंपेन ग्राम, ब्लॉक और जिला पंचायतों की विकास योजनाएं तैयार करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है।उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ग्राम पंचायत विकास योजनाएं केवल सरकारी योजनाओं और उपलब्ध बजट तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उनमें स्थानीय लोगों की जरूरतों, अपेक्षाओं और विकास संबंधी प्राथमिकताओं को भी शामिल किया जाना चाहिए। इसके लिए ग्राम सभाओं की सक्रिय भागीदारी, स्थानीय आंकड़ों का इस्तेमाल और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय जरूरी है।उन्होंने बताया कि 16वें वित्त आयोग ने वर्ष 2026 से 2031 की अवधि के लिए देश के 28 राज्यों में विधिवत गठित पंचायती राज संस्थाओं और ग्रामीण स्थानीय निकायों के लिए कुल 4,35,236 करोड़ रुपये के अनुदान की सिफारिश की है। ऐसे में पंचायतों की जिम्मेदारी बढ़ गई है कि वे उपलब्ध वित्तीय संसाधनों का पारदर्शी और प्रभावी इस्तेमाल करें। साथ ही अपनी आय बढ़ाने के लिए भी ठोस प्रयास करें।
राज्य और जिला स्तर पर भी होंगे कार्यक्रम
राष्ट्रीय कार्यशाला के बाद राज्य, जिला और ब्लॉक स्तर पर भी जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य पंचायत प्रतिनिधियों को वित्तीय प्रबंधन, विकास योजनाओं की तैयारी, डिजिटल प्लेटफॉर्म के उपयोग और विभिन्न सरकारी योजनाओं के समन्वय की जानकारी देना होगा।कार्यशाला में पेयजल एवं स्वच्छता, कचरा प्रबंधन, जल संरक्षण और पंचायतों की वित्तीय आत्मनिर्भरता जैसे मुद्दों पर भी चर्चा की गई। अधिकारियों ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं का बेहतर संचालन सुनिश्चित करने के लिए पंचायतों की भूमिका महत्वपूर्ण है।कुल मिलाकर, पंचायतों की जमीन पर EV चार्जिंग और बैटरी स्वैपिंग स्टेशन स्थापित करने का समझौता ग्रामीण अर्थव्यवस्था और स्वच्छ परिवहन दोनों के लिहाज से महत्वपूर्ण कदम है। इससे एक ओर गांवों में इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए सुविधाओं का विस्तार हो सकता है, वहीं दूसरी ओर पंचायतों को अपनी नियमित आमदनी बढ़ाने का अवसर मिलेगा। केंद्र सरकार की इस पहल का वास्तविक लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि राज्यों और स्थानीय पंचायतों में इसे कितनी प्रभावी तरीके से लागू किया जाता है।
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