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देश में 25 जनवरी से शुरू होगी जनगणना, केंद्र का बड़ा ऐलान

Kiran
31 Oct 2026 8:37 AM IST
नई दिल्ली: गृह मंत्रालय ने लंबे समय से प्रतीक्षित 'भारत की जनगणना 2027' का कार्यक्रम जारी कर दिया है। 30 अक्टूबर 2026 को जारी आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, अधिकांश राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में घर-घर जाकर जनसंख्या की गिनती 25 जनवरी से 28 फरवरी 2027 तक की जाएगी। सरकारी अधिसूचना में कहा गया है, "चुनाव वाले राज्यों - गोवा, उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड और मणिपुर - में जनगणना बाद में कराई जाएगी।" जनगणना अधिनियम, 1948 के तहत भारत के महापंजीयक (रजिस्ट्रार जनरल) कार्यालय द्वारा जारी इस अधिसूचना में फिलहाल कुछ क्षेत्रों को शामिल नहीं किया गया है। इनमें मणिपुर (अगली घोषणा तक), गोवा, उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख, हिमाचल प्रदेश के बर्फबारी वाले दुर्गम क्षेत्र, और केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर शामिल हैं।
घर-घर जाकर होने वाली गिनती शुरू होने से ठीक पहले, 10 जनवरी से 24 जनवरी 2027 तक, नागरिकों के पास एक ऑनलाइन पोर्टल के जरिए खुद अपनी जानकारी दर्ज करने (सेल्फ-एन्यूमरेशन) का विकल्प होगा। दर्ज की गई जानकारी की पुष्टि करने और उसमें सुधार के लिए 1 मार्च से 5 मार्च 2027 तक एक 'संशोधन चरण' (रिविजनल राउंड) चलाया जाएगा। जनगणना के लिए 'संदर्भ तिथि' (रेफरेंस डेट) 1 मार्च 2027 को रात 12:00 बजे (00:00 घंटे) तय की गई है।
भारत में पिछली जनगणना 2011 में हुई थी।
इसके बाद 2021 में होने वाली जनगणना को कोविड-19 महामारी के कारण टाल दिया गया था, जो तब से लंबित है। माना जा रहा है कि 16 साल के अंतराल के बाद होने वाली इस कवायद से अद्यतन जनसांख्यिकीय आंकड़े (डेमोग्राफिक डेटा) मिलेंगे, जो नीति-निर्माण, संसाधनों के आवंटन और कल्याणकारी योजनाओं के लिए बहुत महत्वपूर्ण होंगे।
अधिकारियों ने बताया कि सर्दियों के दौरान बर्फबारी वाले इलाकों में पहुंचना मुश्किल होता है, जबकि जिन राज्यों में चुनाव होने हैं, वहां प्रशासनिक तंत्र का पूरा ध्यान चुनाव प्रक्रिया पर केंद्रित रहता है। जिन क्षेत्रों को अभी शामिल नहीं किया गया है, उनके लिए अलग से तारीखों की घोषणा की जाएगी। इस जनगणना में जनसंख्या की गिनती शामिल होगी और माना जा रहा है कि यह भविष्य के प्रशासनिक और विकासात्मक निर्णयों का आधार बनेगी। सरकार ने इस बात पर जोर दिया है कि यह प्रक्रिया नागरिकों की भागीदारी से पूरी की जाएगी, जिसमें डिजिटल माध्यम से खुद जानकारी दर्ज करने के साथ-साथ जनगणना कर्मियों द्वारा घर-घर जाकर किए जाने वाले पारंपरिक सर्वेक्षण भी शामिल होंगे।
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