- Home
- /
- दिल्ली-एनसीआर
- /
- CEC विवाद: ज्ञानेश...
दिल्ली-एनसीआर
CEC विवाद: ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में आज अहम सुनवाई
Tara Tandi
5 Oct 2026 12:01 PM IST

x
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट सोमवार को उन याचिकाओं पर सुनवाई करेगा जिनमें इस बात को चुनौती दी गई है कि क्या मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार अकेले उन शक्तियों का इस्तेमाल कर सकते हैं जो संविधान के तहत पूरे बहु-सदस्यीय चुनाव आयोग को दी गई हैं।
सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी कॉज़ लिस्ट के अनुसार, भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी. मोहना की बेंच इस मामले पर सुनवाई करेगी।
यह मामला पहले 29 सितंबर को वरिष्ठ वकील विकास सिंह ने CJI के सामने उठाया था, जिसके बाद CJI ने कहा था: "इसे अगले हफ़्ते लिस्ट करें।"
याचिका में ECI (चुनाव आयोग) को चलाने वाले सामूहिक निर्णय लेने के ढांचे को लागू करने और 'को वारंटो' (अधिकार-पृच्छा) रिट जारी करने की मांग की गई है। यह रिट उस अधिकार के संबंध में मांगी गई है जिसके तहत CEC ने कथित तौर पर चुनाव आयोग के नाम पर काम किया है।
याचिका में तर्क दिया गया है कि संविधान का अनुच्छेद 324 चुनावों की देखरेख, निर्देशन और नियंत्रण का अधिकार "आयोग" को देता है, न कि किसी एक मुख्य चुनाव आयुक्त को। इसमें 'मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023' की धारा 18 का भी हवाला दिया गया है, जो सामूहिक निर्णय लेने की व्यवस्था करती है और कहती है कि जिन मामलों पर आम सहमति नहीं बनती, उन पर बहुमत से निर्णय लिया जाएगा।
याचिका में चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी के उस समय के लिखित संचार और फ़ाइल नोटिंग का हवाला दिया गया है। आरोप है कि उन्होंने अक्टूबर 2025 और अगस्त 2026 के बीच उन फैसलों और कदमों के बारे में कम से कम 14 आपत्तियां दर्ज की थीं, जो कथित तौर पर उनकी मंज़ूरी के बिना ECI के नाम पर लिए गए थे।
याचिका में विस्तार से बताई गई आपत्तियां उन संचार और आदेशों से संबंधित हैं जो कथित तौर पर चुनाव आयोग की मंज़ूरी के बिना जारी किए गए थे। इनमें बैठकों से पहले एजेंडा और बाद में मिनट्स (कार्यवृत्त) का न होना, मंज़ूरी के बिना विदेश यात्रा, फ़ॉर्म 6 में बदलाव, मतदाता सूची डेटाबेस तक पहुंच और पश्चिम बंगाल में ट्रिब्यूनल के समक्ष अपील दायर करना शामिल है।
याचिका में दो चुनाव आयुक्तों द्वारा "मतदाता सूची डेटाबेस के धीरे-धीरे केंद्रीकरण" और चुनाव आयोग के IT विभाग के काम के बंटवारे में बदलाव को लेकर जताई गई चिंताओं का भी ज़िक्र किया गया है। याचिकाकर्ता ने यह घोषणा करने की मांग की है कि अनुच्छेद 324 के तहत ECI को मिली शक्तियों का इस्तेमाल या उन्हें चुनाव आयोग के काम के तौर पर तब तक नहीं दिखाया जा सकता, जब तक कि वे आयोग को नियंत्रित करने वाले संवैधानिक और कानूनी ढांचे के मुताबिक न हों।
याचिका में सामूहिक निर्णय लेने की प्रक्रिया का पालन सुनिश्चित करने के साथ-साथ विवादित फैसलों से जुड़े संबंधित रिकॉर्ड पेश करने और उन्हें सुरक्षित रखने के लिए भी निर्देश देने की मांग की गई है।
वहीं, ECI का कहना है कि आयुक्तों के बीच सामने आए मतभेदों को संस्थागत "दरार" नहीं माना जा सकता और कई सदस्यों वाली संवैधानिक संस्था में आंतरिक आपत्तियां और लिखित नोट सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हैं।
Next Story





