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CBSE रिजल्ट गड़बड़ी: राहुल गांधी का सरकार पर हमला, शिक्षा मंत्री पर कार्रवाई की मांग

Delhi दिल्ली: लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने गुरुवार को CBSE रिजल्ट में कथित गड़बड़ियों को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को छात्रों के भविष्य की चिंता होती, तो वे शिक्षा मंत्री को पद से हटा देते।
राहुल गांधी की यह टिप्पणी उस समय आई जब शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने CBSE की ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली में कोएम्प्ट एडुटेक को शामिल करने को लेकर उठाए गए सवालों पर राहुल गांधी की आलोचना की थी। मंत्री ने आरोप लगाया था कि कांग्रेस नेता लगातार चुनावी हार के कारण अपनी सोच में बदलाव कर चुके हैं।
इस विवाद के बीच राहुल गांधी ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यह मामला लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ा हुआ है और इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा, “धर्मेंद्र प्रधान जी, आप मुझ पर जितना चाहें हमला कर सकते हैं, लेकिन इससे आप अपने गुनाहों से बरी नहीं होंगे।”
राहुल गांधी ने यह भी दावा किया कि यह मुद्दा लगभग 18.5 लाख छात्रों से जुड़ा है और सरकार को इस पर जवाब देना ही होगा। उन्होंने कहा कि छात्रों के भविष्य के साथ किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता।
Dharmendra Pradhan ji, you can attack me all you want but it won’t absolve you of your crimes. Nor will it stop me from demanding answers for 18.5 lakh children.
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) May 28, 2026
Why was the CBSE OSM contract handed to COEMPT - a company already mired in controversy under its old name,… https://t.co/Xy8MbBTnTL
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड से जुड़े कथित अनियमितताओं को लेकर विपक्ष लगातार सरकार से पारदर्शिता की मांग कर रहा है। राहुल गांधी ने कहा कि अगर तकनीकी या मूल्यांकन प्रक्रिया में गड़बड़ी हुई है, तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
शिक्षा मंत्रालय की ओर से हालांकि इस मामले पर पहले ही सफाई दी जा चुकी है, जिसमें कहा गया है कि मूल्यांकन प्रणाली को अधिक पारदर्शी और डिजिटल बनाने के लिए तकनीकी कंपनियों की मदद ली जाती है और इसका उद्देश्य परीक्षा प्रक्रिया को बेहतर बनाना है।
भारत सरकार ने विपक्ष के आरोपों को राजनीतिक प्रेरित बताते हुए कहा है कि सरकार छात्रों की सुविधा और शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए लगातार सुधार कर रही है।
इस पूरे विवाद ने शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा मूल्यांकन प्रणाली को लेकर राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। विपक्ष जहां इसे छात्रों के भविष्य से जोड़कर गंभीर मुद्दा बता रहा है, वहीं सरकार इसे प्रशासनिक सुधार का हिस्सा बता रही है।
फिलहाल यह मामला राजनीतिक और शैक्षिक दोनों ही स्तरों पर चर्चा में बना हुआ है और आगे इस पर संसद या संबंधित समितियों में भी बहस तेज होने की संभावना है।





