- Home
- /
- दिल्ली-एनसीआर
- /
- CBI ने कोर्ट में रखे...
CBI ने कोर्ट में रखे सबूत, रेलवे टेंडर घोटाले में बढ़ी मुश्किलें

नई दिल्ली। रेलवे टेंडर से जुड़े कथित भ्रष्टाचार मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने अदालत में कई गंभीर दावे किए हैं। जांच एजेंसी का कहना है कि रेलवे टेंडर प्रक्रिया से जुड़ी गोपनीय और महत्वपूर्ण जानकारियां रिश्वत के बदले एक निजी कंपनी तक पहुंचाई जा रही थीं। सीबीआई के मुताबिक, इस कथित नेटवर्क के जरिए निजी कंपनी को टेंडर में अनुचित लाभ पहुंचाने की कोशिश की गई और इसके बदले कुछ रेलवे अधिकारियों को अवैध भुगतान किया गया।
मामले की सुनवाई राउज एवेन्यू स्थित विशेष सीबीआई अदालत में हुई। सुनवाई के दौरान सीबीआई ने अदालत के सामने अपनी जांच से जुड़े तथ्यों को रखा। एजेंसी ने दावा किया कि रेलवे टेंडर प्रक्रिया में शामिल कुछ अधिकारियों और निजी कंपनी से जुड़े लोगों के बीच सांठगांठ थी। आरोप है कि टेंडर जारी होने से पहले ही उससे जुड़ी संवेदनशील जानकारी कंपनी तक पहुंचाई जाती थी, ताकि उसे बोली प्रक्रिया में फायदा मिल सके।
सीबीआई ने अदालत को बताया कि जांच के दौरान ट्रैप कार्रवाई की गई थी, जिसमें एक लाख रुपये बरामद किए जाने का दावा किया गया है। एजेंसी के अनुसार, निजी कंपनी मेश इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े आरोपी मोहम्मद शारिक अली अपने सहयोगी एजाज अली के माध्यम से रेलवे अधिकारियों तक रिश्वत पहुंचाने का काम करते थे।
जांच एजेंसी का आरोप है कि सह-आरोपित लेनिन शर्मा और कुछ अन्य रेलवे अधिकारियों के माध्यम से टेंडर प्रक्रिया से संबंधित गोपनीय जानकारियां हासिल की जाती थीं। इन जानकारियों का इस्तेमाल कंपनी को टेंडर हासिल करने में मदद पहुंचाने के लिए किया जाता था। सीबीआई ने अदालत में दावा किया कि आरोपितों के बीच हुई बातचीत और चैट रिकॉर्ड से इस कथित नेटवर्क के संकेत मिले हैं।
सीबीआई के अनुसार, उत्तरी रेलवे के कुछ अधिकारियों ने कंपनी को भरोसा दिलाया था कि टेंडर उसी कंपनी को मिलेगा या फिर कम से कम 50 प्रतिशत आपूर्ति का काम उसे दिया जाएगा। इसके बदले रिश्वत देने की बात सामने आने का दावा एजेंसी ने किया है।
जांच एजेंसी ने अदालत को बताया कि तीन जुलाई को की गई ट्रैप कार्रवाई के दौरान उत्तरी रेलवे के चीफ मैटेरियल्स मैनेजर (स्टोर्स) नरेंद्र सिंह के कार्यालय बैग से एक लाख रुपये बरामद किए गए। इसके अलावा सीबीआई ने आरोप लगाया कि मोहम्मद शारिक अली ने सह-आरोपित लेनिन शर्मा को भी 50 हजार रुपये दिए थे।
हालांकि, मामले में बचाव पक्ष ने सीबीआई के आरोपों को खारिज किया है। आरोपियों की ओर से अदालत में कहा गया कि संबंधित टेंडर प्रक्रिया जेम पोर्टल के माध्यम से पूरी तरह ऑनलाइन हुई थी। इसलिए इसमें किसी व्यक्ति के हस्तक्षेप की संभावना नहीं थी। बचाव पक्ष ने दावा किया कि आरोपी रेलवे कार्यालय केवल गुणवत्ता जांच और अन्य औपचारिक प्रक्रियाओं के लिए गए थे, रिश्वत देने या लेने के उद्देश्य से नहीं।
मामले की सुनवाई के दौरान विशेष सीबीआई अदालत ने नरेंद्र सिंह और मोहम्मद शारिक अली को सशर्त जमानत प्रदान कर दी। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि सुनवाई के दौरान की गई टिप्पणियां मामले के अंतिम निर्णय को प्रभावित नहीं करेंगी। अदालत ने कहा कि जांच और ट्रायल कानून के अनुसार आगे जारी रहेंगे।
रेलवे टेंडर घोटाले का यह मामला सरकारी खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता और भ्रष्टाचार रोकने की व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। सीबीआई की जांच आगे बढ़ने के साथ अब यह साफ होगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और कथित नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल थे। फिलहाल एजेंसी मामले से जुड़े अन्य सबूत जुटाने में लगी हुई है।





