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जाति समता नियम और NEET पेपर लीक... धर्मेंद्र प्रधान के कार्यकाल में उठे कई बड़े विवाद
nidhi
26 July 2026 7:12 AM IST

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धर्मेंद्र प्रधान का कार्यकाल विवादों में, जाति समता नियम से लेकर NEET पेपर लीक तक कई मुद्दों ने घेरा
New Delhi: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का कार्यकाल शिक्षा क्षेत्र में कई बड़े सुधारों और नई नीतियों के लिए चर्चा में रहा, लेकिन इसी दौरान कई ऐसे विवाद भी सामने आए जिन्होंने सरकार और शिक्षा मंत्रालय को कठघरे में खड़ा कर दिया। नई शिक्षा नीति (NEP) के क्रियान्वयन से लेकर भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता, NEET पेपर लीक, आरक्षण और जाति समता नियम जैसे मुद्दों पर लगातार राजनीतिक और सामाजिक बहस देखने को मिली।
विपक्ष ने कई मामलों में सरकार और शिक्षा मंत्रालय पर सवाल उठाए, जबकि केंद्र सरकार ने इन मुद्दों पर सुधारात्मक कदम उठाने और पारदर्शिता बढ़ाने का दावा किया।
1. NEET पेपर लीक विवाद
धर्मेंद्र प्रधान के कार्यकाल का सबसे बड़ा विवाद NEET-UG परीक्षा में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं को लेकर रहा। परीक्षा परिणामों और प्रश्नपत्र लीक के आरोपों के बाद देशभर में छात्रों ने प्रदर्शन किए। मामले की जांच केंद्रीय एजेंसियों को सौंपी गई और कई राज्यों में गिरफ्तारियां भी हुईं।
सरकार ने इसके बाद सार्वजनिक परीक्षाओं को अधिक सुरक्षित बनाने और पेपर लीक रोकने के लिए कानून को और सख्त करने की दिशा में कदम बढ़ाए।
2. जाति समता नियम पर विवाद
शिक्षा क्षेत्र में लागू किए गए जाति समता (Roster/Reservation) से जुड़े नियमों को लेकर भी कई विश्वविद्यालयों, शिक्षकों के संगठनों और राजनीतिक दलों ने सवाल उठाए। विरोध करने वालों का कहना था कि इन नियमों का प्रभाव नियुक्तियों और प्रतिनिधित्व पर पड़ सकता है, जबकि सरकार का पक्ष था कि नियम संवैधानिक प्रावधानों और न्यायिक दिशा-निर्देशों के अनुरूप हैं।
3. प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता पर सवाल
NEET के अलावा अन्य भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं में भी अनियमितताओं के आरोप समय-समय पर सामने आए। कई प्रतियोगी परीक्षाओं के अभ्यर्थियों ने परीक्षा प्रणाली में सुधार, समयबद्ध जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
4. NTA की कार्यप्रणाली पर उठे प्रश्न
राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली भी विवादों के केंद्र में रही। परीक्षा संचालन, परिणाम घोषित करने की प्रक्रिया और परीक्षा केंद्रों के प्रबंधन को लेकर छात्रों और विपक्षी दलों ने कई सवाल उठाए। सरकार ने बाद में एजेंसी के कामकाज की समीक्षा और सुधार की घोषणा की।
5. नई शिक्षा नीति पर राजनीतिक बहस
नई शिक्षा नीति (NEP) को लेकर भी अलग-अलग राज्यों और राजनीतिक दलों के बीच मतभेद देखने को मिले। जहां केंद्र सरकार ने इसे शिक्षा क्षेत्र में ऐतिहासिक सुधार बताया, वहीं कुछ राज्यों और शिक्षा विशेषज्ञों ने इसके कुछ प्रावधानों पर आपत्तियां जताईं।
सरकार का पक्ष
केंद्र सरकार का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने, डिजिटल निगरानी मजबूत करने और परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित बनाने के लिए लगातार सुधार किए जा रहे हैं। सरकार ने पेपर लीक रोकने के लिए कड़े कानून, तकनीकी सुरक्षा और जवाबदेही तय करने जैसे उपायों पर जोर दिया है।
विपक्ष के आरोप
विपक्ष का आरोप है कि लगातार सामने आए विवादों ने छात्रों का भरोसा कमजोर किया है। विपक्ष ने शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार, परीक्षा एजेंसियों की जवाबदेही और निष्पक्ष जांच की मांग की है।
आगे की चुनौती
विशेषज्ञों का मानना है कि देश की परीक्षा प्रणाली को अधिक विश्वसनीय बनाने के लिए केवल कानून सख्त करना पर्याप्त नहीं होगा। तकनीकी सुरक्षा, पारदर्शी परीक्षा प्रक्रिया, मजबूत निगरानी और समयबद्ध कार्रवाई जैसे कदम भी समान रूप से जरूरी होंगे।
धर्मेंद्र प्रधान का कार्यकाल जहां शिक्षा सुधारों के लिए याद किया जाएगा, वहीं इन विवादों ने यह भी दिखाया कि देश की परीक्षा और उच्च शिक्षा व्यवस्था में भरोसा बनाए रखने के लिए लगातार संस्थागत सुधारों की आवश्यकता बनी हुई है।
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