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जामिया में छात्रों से मिलने पहुंचे सांसदों पर केस दर्ज

Ratna Netam
25 Oct 2026 9:58 PM IST
जामिया में छात्रों से मिलने पहुंचे सांसदों पर केस दर्ज
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नई दिल्ली। जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में जारी छात्र आंदोलन के बीच दिल्ली पुलिस ने कुछ सांसदों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। विश्वविद्यालय प्रशासन की शिकायत के आधार पर यह कार्रवाई कथित तौर पर बिना अनुमति परिसर में प्रवेश करने के आरोप में की गई है। ये सांसद विश्वविद्यालय में प्रदर्शन कर रहे छात्रों से मिलने पहुंचे थे। इस घटनाक्रम के बाद छात्र आंदोलन और विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच जारी विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है।छात्र विश्वविद्यालय में जामिया मिलिया इस्लामिया स्टूडेंट्स यूनियन (JMISU) को बहाल करने, प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई वापस लेने और विश्वविद्यालय के चीफ प्रॉक्टर को पद से हटाने की मांग कर रहे हैं। इन मांगों को लेकर छात्रों ने 12 अक्टूबर से विरोध प्रदर्शन और भूख हड़ताल शुरू की थी।
छात्र संघ बहाली समेत तीन प्रमुख मांगों को लेकर आंदोलन
जामिया मिलिया इस्लामिया में छात्र आंदोलन की शुरुआत 12 अक्टूबर को हुई थी। प्रदर्शनकारी छात्र विश्वविद्यालय में छात्र संघ को बहाल करने और चुनाव कराने की मांग कर रहे हैं। इसके अलावा वे आंदोलन में शामिल छात्रों के खिलाफ की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई वापस लेने और चीफ प्रॉक्टर को हटाने की मांग भी कर रहे हैं।छात्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय में निर्वाचित छात्र संघ की बहाली से विद्यार्थियों को अपनी समस्याएं प्रशासन के सामने रखने के लिए एक प्रभावी मंच मिल सकेगा। छात्र संघ के चुनाव लंबे समय से नहीं हुए हैं, इसलिए इसे बहाल करना आंदोलन की प्रमुख मांग बन गया है।
सांसदों के परिसर में प्रवेश को लेकर विवाद
विश्वविद्यालय प्रशासन की शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कुछ सांसद बिना अनुमति परिसर में पहुंचे और प्रदर्शन के दौरान माहौल को प्रभावित किया। इस शिकायत के आधार पर दिल्ली पुलिस ने मामला दर्ज किया है।मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस घटनाक्रम में कांग्रेस सांसद इमरान मसूद और इमरान प्रतापगढ़ी के नाम सामने आए हैं। सांसदों के प्रदर्शन में शामिल होने और छात्रों से मुलाकात करने के प्रयास के बीच विश्वविद्यालय प्रशासन ने परिसर में प्रवेश को लेकर आपत्ति जताई।हालांकि, बिना अनुमति प्रवेश और प्रदर्शन को प्रभावित करने से जुड़े आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही निकाला जा सकेगा। मामला दर्ज होने का अर्थ यह नहीं है कि आरोप अदालत में साबित हो चुके हैं।
भूख हड़ताल के दौरान बढ़ा तनाव
विरोध प्रदर्शन के शुरुआती दिनों में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को परिसर में निर्धारित स्थान से हटाने की कोशिश की थी। इसके बाद छात्रों का आंदोलन और तेज हो गया। प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को लेकर भूख हड़ताल पर भी बैठे हैं।विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि परिसर में विरोध प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थान का उपयोग किया जाना चाहिए। प्रशासन ने छात्रों से आंदोलन समाप्त कर सामान्य शैक्षणिक गतिविधियां बहाल करने की अपील भी की है। दूसरी ओर, छात्र संगठन अपनी मांगों पर ठोस निर्णय और समयबद्ध कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
विश्वविद्यालय में तनाव के बीच आगे की कार्रवाई पर नजर
जामिया में जारी विवाद अब छात्र संघ की बहाली की मांग से आगे बढ़कर विश्वविद्यालय प्रशासन, प्रदर्शनकारी छात्रों और राजनीतिक प्रतिनिधियों के बीच टकराव का विषय बन गया है।एक ओर छात्र अनुशासनात्मक कार्रवाई वापस लेने और चीफ प्रॉक्टर को हटाने की मांग कर रहे हैं, वहीं प्रशासन परिसर में व्यवस्था बनाए रखने पर जोर दे रहा है। सांसदों के खिलाफ दर्ज मामले की जांच और छात्र आंदोलन को लेकर प्रशासन के अगले कदमों पर अब नजर रहेगी।फिलहाल, इस पूरे मामले में पुलिस की जांच और विश्वविद्यालय प्रशासन की आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। छात्र संघ की बहाली, चुनाव की तारीख और अनुशासनात्मक कार्रवाई वापस लेने जैसे मुद्दों पर समाधान निकलने के बाद ही आंदोलन समाप्त होने की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
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