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करोड़ों की ऑनलाइन ठगी का मामला, दस्तावेजी गलती से कमजोर हुआ केस

नई दिल्ली। देश के चर्चित 14.84 करोड़ रुपये के डिजिटल अरेस्ट साइबर ठगी मामले में राउज एवेन्यू स्थित विशेष अदालत ने आरोपी दिव्यांग पटेल को जमानत दे दी है। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि आरोप गंभीर होने के बावजूद किसी व्यक्ति को हिरासत में रखने के लिए कानूनी प्रक्रिया का पालन करना जरूरी है। गिरफ्तारी के आधार की जानकारी समय पर आरोपी और उसके परिजनों को नहीं देना संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है।
सीबीआई के विशेष न्यायाधीश सुशांत चंगोत्रा ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि जांच अधिकारी प्रथम दृष्टया यह साबित नहीं कर सके कि आरोपी को उसकी गिरफ्तारी के कारण और उससे जुड़े दस्तावेज समय पर उपलब्ध कराए गए थे। अदालत ने माना कि यह संविधान के अनुच्छेद 21 और अनुच्छेद 22(1) के तहत मिले अधिकारों का उल्लंघन है।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि आरोपपत्र दाखिल हो जाने के बाद भी गिरफ्तारी के दौरान हुई संवैधानिक प्रक्रिया की कमी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यदि किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी कानून में तय नियमों के अनुसार नहीं होती है तो उसे राहत मिल सकती है। इसी आधार पर अदालत ने आरोपी दिव्यांग पटेल को जमानत देने का फैसला सुनाया।
हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोप बेहद गंभीर हैं। जांच एजेंसी के अनुसार, वह इस बड़े साइबर अपराध की साजिश में अहम भूमिका निभा रहा था। इसके बावजूद अदालत ने कहा कि गंभीर आरोप किसी व्यक्ति के मौलिक अधिकारों को खत्म नहीं कर सकते और जांच एजेंसियों को हर स्थिति में कानूनी प्रक्रिया का पालन करना होगा।
यह मामला दिल्ली के एक बुजुर्ग एनआरआई डॉक्टर दंपती से हुई 14.84 करोड़ रुपये की डिजिटल अरेस्ट ठगी से जुड़ा है। आरोप है कि साइबर अपराधियों ने खुद को सरकारी अधिकारी और जांच एजेंसी का कर्मचारी बताकर पीड़ितों को डराया और डिजिटल अरेस्ट का झांसा देकर करोड़ों रुपये ठग लिए।
जांच एजेंसियों के मुताबिक, ठगी की रकम में से करीब चार करोड़ रुपये आरोपी दिव्यांग पटेल के एनजीओ के बैंक खाते में पहुंचे थे। इसके बाद इन पैसों को दूसरे खातों में ट्रांसफर किया गया। सीबीआई ने अदालत में दलील दी थी कि आरोपी संगठित साइबर अपराध नेटवर्क का हिस्सा है और उसकी भूमिका महत्वपूर्ण रही है। जांच एजेंसी ने जमानत का विरोध भी किया था।
दिल्ली पुलिस की आईएफएसओ यूनिट ने मामले की जांच करते हुए वडोदरा निवासी दिव्यांग पटेल को गिरफ्तार किया था। पुलिस का आरोप था कि आरोपी ने साइबर ठगी के लिए इस्तेमाल किए गए पैसों के लेनदेन में मदद की थी। जांच के दौरान बैंक खातों, डिजिटल रिकॉर्ड और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की जांच की गई।
अदालत ने आरोपी को कुछ शर्तों के साथ जमानत दी है। उसे 50 हजार रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि के एक जमानती पर रिहा करने का आदेश दिया गया है। साथ ही अदालत ने निर्देश दिया है कि आरोपी जांच में सहयोग करेगा, किसी गवाह को प्रभावित करने की कोशिश नहीं करेगा और अदालत की अनुमति के बिना देश छोड़कर नहीं जाएगा।
इस मामले ने एक बार फिर साइबर अपराधों की बढ़ती चुनौती और जांच एजेंसियों के लिए कानूनी प्रक्रिया के पालन की अहमियत को सामने ला दिया है। अदालत के फैसले से यह संदेश गया है कि अपराध की गंभीरता के बावजूद गिरफ्तारी और जांच में संवैधानिक नियमों का पालन अनिवार्य है। वहीं, जांच एजेंसियों के सामने अब मामले की आगे की कार्रवाई और अन्य आरोपियों तक पहुंचने की चुनौती बनी हुई है।





