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Supreme Court में फाइल गायब होने का मामला, चीफ जस्टिस हुए नाराज

Kanchan Paikara
17 Jun 2026 7:33 PM IST
Supreme Court में फाइल गायब होने का मामला, चीफ जस्टिस हुए नाराज
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क्योंकि हर केस से जुड़े दस्तावेज न्यायिक निर्णय का आधार होते हैं।

New Delhi : सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री में एक केस फाइल के कथित रूप से खो जाने के मामले ने बुधवार को अदालत में हलचल पैदा कर दी। इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने कहा कि वह स्वयं इस पूरे मामले को देखेंगे और संबंधित लापरवाही की जांच कराई जाएगी।

जानकारी के अनुसार, एक मामले की सुनवाई के दौरान यह बात सामने आई कि संबंधित फाइल सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री में उपलब्ध नहीं है। जैसे ही यह तथ्य अदालत के समक्ष रखा गया, पीठ ने इस पर गंभीर चिंता जताई। सीजेआई सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि न्यायिक प्रक्रिया में इस तरह की चूक को हल्के में नहीं लिया जा सकता और इसकी पूरी जांच जरूरी है।

अदालत में हुई इस चर्चा के दौरान यह भी संकेत दिया गया कि न्यायालय की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और रिकॉर्ड प्रबंधन अत्यंत महत्वपूर्ण है। किसी भी केस फाइल का गायब होना न केवल संबंधित मामले की सुनवाई को प्रभावित कर सकता है, बल्कि न्यायिक व्यवस्था की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े करता है।

सीजेआई ने कहा कि वह इस मामले को व्यक्तिगत रूप से देखेंगे और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों। उन्होंने रजिस्ट्री प्रणाली में सुधार और जवाबदेही तय करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

इस घटना के बाद कोर्ट रजिस्ट्री की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। न्यायालय परिसर में रिकॉर्ड संभालने की प्रक्रिया को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि हर केस से जुड़े दस्तावेज न्यायिक निर्णय का आधार होते हैं। ऐसे में किसी फाइल का गायब होना एक गंभीर प्रशासनिक चूक माना जा रहा है।

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट जैसी सर्वोच्च संस्था में इस तरह की घटना का सामने आना चिंताजनक है। इससे न केवल संबंधित केस की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है, बल्कि अन्य मामलों में भी रिकॉर्ड प्रबंधन को लेकर सतर्कता की आवश्यकता बढ़ जाती है।

फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की जांच के संकेत दिए हैं और उम्मीद है कि आने वाले दिनों में रजिस्ट्री की कार्यप्रणाली को लेकर कुछ सख्त कदम उठाए जा सकते हैं। अदालत की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि न्यायिक व्यवस्था में किसी भी तरह की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

कुल मिलाकर, यह मामला एक बार फिर न्यायिक प्रणाली में रिकॉर्ड प्रबंधन और प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़ा करता है, जिस पर अब सुप्रीम कोर्ट खुद निगरानी रखने की बात कह रहा है।

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