- Home
- /
- दिल्ली-एनसीआर
- /
- छह महीने से राशन नहीं...
छह महीने से राशन नहीं लिया तो कार्ड होगा अस्थायी रूप से बंद, 1 अक्टूबर से नई व्यवस्था

नई दिल्ली। राशन कार्डधारकों के लिए अक्टूबर से पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम यानी PDS में अहम बदलाव लागू होने जा रहा है। ऐसे राशन कार्ड, जिनसे लगातार छह महीने तक अनाज नहीं लिया गया है, उन्हें ‘साइलेंट’ या निष्क्रिय कार्ड मानते हुए अस्थायी रूप से बंद किया जा सकता है। केंद्र सरकार ने SMART-PDS प्रणाली में ऐसे निष्क्रिय राशन कार्ड और डुप्लिकेट लाभार्थियों की पहचान के लिए नई व्यवस्था तैयार की है, जो 1 अक्टूबर 2026 से लागू होगी।
नई व्यवस्था का उद्देश्य राशन वितरण से जुड़े डेटाबेस को अधिक सटीक बनाना और ऐसे लाभार्थियों की पहचान करना है जिनके नाम पर लंबे समय से राशन नहीं लिया जा रहा है। इसके साथ ही डुप्लिकेट, संदिग्ध और अपात्र लाभार्थियों की भी जांच की जाएगी। सरकार का कहना है कि इससे वास्तविक जरूरतमंद परिवारों तक खाद्यान्न पहुंचाने और PDS में मौजूद गलत या दोहरे रिकॉर्ड को हटाने में मदद मिलेगी।
हालांकि छह महीने तक राशन नहीं लेने का मतलब यह नहीं है कि राशन कार्ड हमेशा के लिए तुरंत रद्द हो जाएगा। केंद्र की नई मानक संचालन प्रक्रिया यानी SOP के मुताबिक ऐसे कार्ड पहले अस्थायी रूप से निष्क्रिय किए जाएंगे। इसके बाद संबंधित लाभार्थी को तीन महीने का समय दिया जाएगा, जिसमें वह e-KYC और आवश्यक सत्यापन पूरा कर अपना राशन कार्ड दोबारा सक्रिय करा सकेगा।
इस व्यवस्था के तहत लाभार्थी को यह साबित करना होगा कि वह अभी भी सरकारी राशन योजना के लिए पात्र है। इसके लिए आधार आधारित e-KYC, मोबाइल नंबर से जुड़ी जानकारी और अन्य आवश्यक रिकॉर्ड का सत्यापन किया जा सकता है। सत्यापन सही पाए जाने के बाद राशन कार्ड को फिर सक्रिय किया जा सकेगा और लाभार्थी दोबारा खाद्यान्न प्राप्त कर सकेगा।
इसलिए राशन कार्डधारकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यदि उनका कार्ड लंबे समय से इस्तेमाल नहीं हुआ है तो वे अपने रिकॉर्ड की स्थिति की जांच करा लें। विशेष रूप से ऐसे परिवार, जो किसी कारणवश छह महीने या उससे अधिक समय से राशन नहीं ले पाए हैं, उन्हें e-KYC और अन्य विवरण समय पर अपडेट कराने की जरूरत पड़ सकती है।
सरकार PDS डेटाबेस में डुप्लिकेट लाभार्थियों की पहचान पर भी जोर दे रही है। कई मामलों में एक ही व्यक्ति का नाम अलग-अलग रिकॉर्ड में दर्ज होने, परिवार के सदस्य की मृत्यु के बाद नाम बने रहने या पात्रता समाप्त हो जाने के बावजूद लाभ जारी रहने जैसी स्थितियां सामने आती हैं। नई डिजिटल व्यवस्था के जरिए ऐसे रिकॉर्ड को चिन्हित किया जाएगा।
SMART-PDS प्रणाली में यह प्रक्रिया स्वचालित तरीके से भी काम करेगी। यदि किसी कार्ड से तय अवधि तक कोई राशन लेन-देन दर्ज नहीं होता है तो सिस्टम उसे निष्क्रिय कार्ड के तौर पर पहचान सकता है। इसके बाद राज्य सरकार और संबंधित खाद्य विभाग सत्यापन की प्रक्रिया आगे बढ़ा सकते हैं।
केंद्र सरकार ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को भी इस प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभाने को कहा है। लाभार्थियों का सत्यापन स्थानीय स्तर पर किया जाएगा, क्योंकि राशन कार्ड जारी करने और पात्रता की जांच की जिम्मेदारी मुख्य रूप से राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की होती है।
झारखंड में भी छह महीने से इस्तेमाल नहीं किए गए राशन कार्डों को 1 अक्टूबर से निलंबित करने की तैयारी की गई है। राज्य के खाद्य विभाग ने बताया है कि निष्क्रिय कार्डों की पहचान और सत्यापन के लिए अभियान चलाया जाएगा। राज्य में पहले से ही लाखों अपात्र राशन कार्ड हटाए जाने की कार्रवाई की जा चुकी है।
राशन व्यवस्था में डिजिटल सत्यापन का दायरा पिछले कुछ समय में लगातार बढ़ा है। केंद्र सरकार के मुताबिक जुलाई 2026 के अंत तक राशन लाभार्थियों का e-KYC कवरेज 90 प्रतिशत से अधिक हो चुका था। सरकार ने ePOS मशीनों के जरिए मोबाइल नंबर जोड़ने और e-KYC आधारित रिकॉर्ड अपडेट करने के लिए भी नई प्रक्रिया लागू की है।
इस पूरी कवायद का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत मुफ्त या सब्सिडी वाला राशन केवल पात्र लाभार्थियों को मिले। लंबे समय तक निष्क्रिय रिकॉर्ड बने रहने से राज्यों के कोटे और लाभार्थी सूची में गड़बड़ी की संभावना रहती है। ऐसे नाम हटने के बाद पात्र लेकिन अब तक सूची से बाहर लोगों को जगह देने में भी मदद मिल सकती है।
राशन कार्डधारकों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि कार्ड के निष्क्रिय होने पर घबराने की जरूरत नहीं है। यदि लाभार्थी वास्तव में पात्र है तो उसके पास सत्यापन और e-KYC के जरिए अपना कार्ड दोबारा सक्रिय कराने का अवसर रहेगा। नई SOP में इसके लिए तीन महीने की पुनः सत्यापन अवधि रखी गई है।
फिलहाल आधिकारिक तौर पर उपलब्ध जानकारी में छह महीने से निष्क्रिय सभी कार्डों को सीधे और स्थायी रूप से समाप्त करने की बात नहीं है। व्यवस्था पहले अस्थायी निष्क्रियता और फिर सत्यापन की है। इसलिए लंबे समय से राशन नहीं लेने वाले कार्डधारकों के लिए सबसे जरूरी कदम अपने राशन कार्ड की स्थिति, e-KYC और आधार से जुड़ी जानकारी की जांच कराना होगा।
1 अक्टूबर से SMART-PDS में नई व्यवस्था शुरू होने के बाद निष्क्रिय, डुप्लिकेट और संदिग्ध रिकॉर्ड की पहचान तेज होने की उम्मीद है। ऐसे में कार्डधारकों के लिए समय पर सत्यापन पूरा करना जरूरी होगा, ताकि पात्र होने के बावजूद उनका राशन लाभ बाधित न हो।





