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UN सुरक्षा परिषद में सुधार की मांग तेज, BRICS ने पहलगाम हमले की निंदा की
Kiran
28 Oct 2026 9:37 AM IST

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नई दिल्ली, ब्रिक्स संसदीय मंच (BRICS Parliamentary Forum) के दो दिवसीय सम्मेलन में मंगलवार को एक संयुक्त घोषणापत्र अपनाया गया। इसमें 2025 के पहलगाम हमले और आतंकवाद की सभी घटनाओं की कड़ी निंदा की गई। साथ ही, आतंकवाद के हर रूप से लड़ने का संकल्प लिया गया और किसी भी देश के आंतरिक मामलों में दखल न देने पर जोर दिया गया। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा घोषित इस संयुक्त घोषणापत्र में एकतरफा आर्थिक और द्वितीयक प्रतिबंधों (secondary sanctions) की भी निंदा की गई। इसमें कहा गया कि इस तरह के दबाव डालने वाले कदमों का मानवाधिकारों पर बहुत बुरा असर पड़ता है, जिसमें लोगों के विकास, स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा का अधिकार भी शामिल है।
ब्रिक्स संसदीय मंच ने संयुक्त राष्ट्र (UN) और उसकी सुरक्षा परिषद में व्यापक सुधारों का समर्थन किया। मंच ने कहा कि इन सुधारों से संयुक्त राष्ट्र को अधिक न्यायपूर्ण, निष्पक्ष, लोकतांत्रिक, प्रतिनिधिमूलक, प्रभावी और कुशल बनाया जाना चाहिए, ताकि यह आज की वास्तविकताओं और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की जरूरतों को बेहतर ढंग से दर्शा सके। घोषणापत्र में कहा गया, "हम आतंकवाद की किसी भी घटना की कड़ी निंदा करते हैं। चाहे उसका मकसद कुछ भी हो, वह कभी भी, कहीं भी और किसी के भी द्वारा किया गया हो, यह एक आपराधिक और अनुचित कृत्य है। हम 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर (पहलगाम) में हुए आतंकवादी हमले की कड़े शब्दों में निंदा करते हैं, जिसमें 26 लोग मारे गए थे और कई अन्य घायल हो गए थे।"
घोषणापत्र में आगे कहा गया, "हम आतंकवाद के सभी रूपों से लड़ने के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हैं। इसमें आतंकवादियों की सीमा-पार आवाजाही, आतंकवाद के लिए फंडिंग और उन्हें मिलने वाली सुरक्षित पनाहगाहों को खत्म करना शामिल है।" मंच ने कहा कि आतंकवाद को किसी धर्म, राष्ट्रीयता, सभ्यता या जातीय समूह से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। साथ ही, आतंकवादी गतिविधियों में शामिल लोगों और उनका समर्थन करने वालों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए और उन्हें संबंधित राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत न्याय के दायरे में लाया जाना चाहिए।
"हम आतंकवाद के प्रति 'जीरो टॉलरेंस' (बिल्कुल बर्दाश्त न करने) की नीति अपनाने का आग्रह करते हैं और आतंकवाद से निपटने में अपनाए जाने वाले दोहरे मानदंडों को खारिज करते हैं।" इसमें कहा गया है, "हम आतंकवाद से निपटने में देशों की प्राथमिक जिम्मेदारी पर जोर देते हैं। साथ ही, आतंकवादी खतरों को रोकने और उनका मुकाबला करने के लिए किए जा रहे वैश्विक प्रयासों को अंतरराष्ट्रीय कानून (जिसमें संयुक्त राष्ट्र चार्टर भी शामिल है) के तहत अपने दायित्वों का पूरी तरह से पालन करना चाहिए..."
फोरम ने कहा कि वह आतंकवाद-रोधी सहयोग को और गहरा करने की उम्मीद करता है। साथ ही, इसने संयुक्त राष्ट्र के ढांचे के भीतर 'अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक सम्मेलन' (Comprehensive Convention on International Terrorism) को जल्द से जल्द अंतिम रूप देने और अपनाने का आह्वान किया है। इसके अलावा, संयुक्त राष्ट्र द्वारा नामित सभी आतंकवादियों और आतंकवादी संगठनों के खिलाफ ठोस कार्रवाई करने की मांग की है।
इसमें कहा गया, "हम संयुक्त राष्ट्र चार्टर में निहित सिद्धांतों - जैसे संप्रभु समानता, आपसी सम्मान, आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करना और अंतरराष्ट्रीय विवादों का शांतिपूर्ण समाधान - के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हैं। ये सिद्धांत वैश्विक स्थिरता, शांति और विकास के लिए आवश्यक आधार हैं।" फोरम ने इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान के लिए अपना अटूट समर्थन दोहराया। यह समर्थन 'टू-स्टेट सॉल्यूशन' (दो-राज्य समाधान) पर आधारित है, जिसमें अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र के संबंधित प्रस्तावों के अनुसार, दोनों देश शांति और सुरक्षा के साथ एक-दूसरे के बगल में रह सकें। इसने फिलिस्तीनी लोगों के आत्मनिर्णय के अधिकार, स्वतंत्रता और एक स्वतंत्र व संप्रभु राज्य के अधिकार पर जोर दिया। फोरम ने पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ते तनाव पर गहरी चिंता जताई। साथ ही, सभी पक्षों से अधिकतम संयम बरतने और ऐसी किसी भी कार्रवाई से बचने का आह्वान किया, जिससे स्थिति और बिगड़ सकती है।
इसने अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के सभी उल्लंघनों की कड़ी निंदा की। इसमें नागरिकों और नागरिक बुनियादी ढांचे पर जानबूझकर किए गए हमले (ब्रिक्स सदस्य देशों में भी), मानवीय सहायता तक पहुंच को रोकना या उसमें बाधा डालना, और मानवीय सहायता कर्मियों को निशाना बनाना शामिल है। ईरान और संयुक्त अरब अमीरात, जो पश्चिम एशिया के संघर्ष में सीधे तौर पर शामिल हैं, ब्रिक्स के सदस्य हैं। भारत के अलावा, ब्रिक्स के अन्य सदस्य देश हैं: ब्राजील, रूस, चीन, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया और दक्षिण अफ्रीका।
फोरम ने अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के सभी उल्लंघनों के लिए जवाबदेही तय करने की आवश्यकता पर जोर दिया। इसमें कहा गया, "हम अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के प्रति सम्मान, उसके पालन और प्रभावी कार्यान्वयन को बढ़ावा देने के लिए ब्रिक्स सदस्यों द्वारा किए जा रहे अंतरराष्ट्रीय प्रयासों को मान्यता देते हैं।"
जलवायु परिवर्तन से निपटने की तात्कालिकता को समझते हुए, ब्रिक्स संसदीय निकाय ने बातचीत और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से प्रयासों को तेज करने का आह्वान किया है। इसका उद्देश्य 'राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान' (NDCs) को लागू करना और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने (mitigation) तथा उनके अनुकूल ढलने (adaptation) के प्रयासों को मजबूत करना है। UNFCCC के उद्देश्यों और इसके पेरिस समझौते के लक्ष्यों को, जहाँ तक लागू हो, प्राप्त करने के उद्देश्य से। यह मंच उभरती हुई तकनीकों - जिनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और सूचना एवं संचार तकनीकें (ICTs) शामिल हैं - की परिवर्तनकारी क्षमता को स्वीकार करता है।
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