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जाली दस्तावेजों से बिजनेस लोन फर्जीवाड़े का खुलासा

Ratna Netam
3 Oct 2026 2:28 PM IST
जाली दस्तावेजों से बिजनेस लोन फर्जीवाड़े का खुलासा
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नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस के साइबर नॉर्थ पुलिस स्टेशन ने जाली दस्तावेजों और पहचान संबंधी जानकारी का कथित तौर पर दुरुपयोग कर बिजनेस लोन लेने वाले एक फर्जीवाड़ा गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने एक महिला उद्यमी की कंपनी के नाम पर उसकी जानकारी और सहमति के बिना करीब 7.30 लाख रुपये का बिजनेस लोन लेने के मामले में मुख्य आरोपी को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि आरोपी ने कथित तौर पर कारोबारी की पहचान और कंपनी से जुड़े दस्तावेजों का इस्तेमाल कर वित्तीय संस्थान से लोन हासिल किया।पुलिस के मुताबिक, इस मामले की शुरुआत बुराड़ी निवासी महिला उद्यमी एन. सिंह की शिकायत से हुई। वह ‘मेडिनेक्स हर्बो केयर’ नाम से कारोबार चलाती हैं। शिकायत में उन्होंने बताया कि उनकी जानकारी के बिना उनकी पहचान और कंपनी के दस्तावेजों का इस्तेमाल कर बिजनेस लोन लिया गया। महिला का आरोप था कि उन्होंने न तो इस लोन के लिए आवेदन किया था और न ही किसी को अपनी ओर से लोन लेने की अनुमति दी थी।
कंपनी के नाम पर लिया गया था लोन
पुलिस जांच के अनुसार, दिसंबर 2023 में शिकायतकर्ता की कंपनी के नाम पर 7.30 लाख रुपये का बिजनेस लोन लिया गया था। कथित तौर पर यह रकम कोटक महिंद्रा बैंक के एक खाते में जमा की गई। शुरुआत में शिकायतकर्ता को इस लेनदेन की जानकारी नहीं थी। लोन उनके नाम और कंपनी के दस्तावेजों से जुड़ा होने के बावजूद संबंधित राशि का उपयोग उनकी जानकारी के बिना किया गया।जांचकर्ताओं के मुताबिक, इस तरह के मामलों में आरोपी अक्सर पीड़ित के पैन, आधार, कंपनी रजिस्ट्रेशन से जुड़े दस्तावेज, बैंकिंग जानकारी या अन्य पहचान संबंधी विवरण का इस्तेमाल करते हैं। मामले में भी पुलिस इसी पहलू को ध्यान में रखकर दस्तावेजों और लेनदेन की कड़ियों की जांच कर रही है।
CIBIL स्कोर प्रभावित होने के बाद सामने आया मामला
शिकायतकर्ता को कथित फर्जी लोन के बारे में जुलाई 2025 में जानकारी मिली। हालांकि, उन्हें यह भी पता चला कि यह लोन दिसंबर 2023 में ही कंपनी के नाम पर लिया जा चुका था। इसके बाद मामले की गंभीरता तब और बढ़ गई, जब जनवरी 2026 में महिला ने अपनी बेटी के लिए एजुकेशन लोन लेने की कोशिश की।एजुकेशन लोन के लिए आवेदन के दौरान बैंकिंग और क्रेडिट रिकॉर्ड की जांच की गई तो महिला के नाम पर पहले से दर्ज 7.30 लाख रुपये के बिजनेस लोन की जानकारी सामने आई। इस अनधिकृत लोन का असर उनके CIBIL स्कोर पर भी पड़ा था। इसके बाद महिला को पता चला कि उनकी कंपनी के नाम पर लिया गया ऋण उनके वित्तीय रिकॉर्ड में दर्ज हो चुका है।पीड़िता ने पुलिस को बताया कि उन्होंने इस लोन के लिए आवेदन नहीं किया था। कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के जरिए उनके नाम का इस्तेमाल किया गया था। इसके बाद उन्होंने साइबर पुलिस से शिकायत की और मामले की जांच शुरू हुई।
दस्तावेजों और बैंक खाते की जांच
शिकायत मिलने के बाद साइबर नॉर्थ थाना पुलिस ने मामले से जुड़े दस्तावेज, लोन आवेदन, बैंक खाते और लेनदेन की जानकारी जुटानी शुरू की। पुलिस ने कथित रूप से इस्तेमाल किए गए दस्तावेजों की जांच के साथ उस बैंक खाते की भी पड़ताल की, जिसमें लोन की रकम जमा हुई थी।जांच के दौरान पुलिस ने डिजिटल और बैंकिंग रिकॉर्ड का विश्लेषण किया। आरोप है कि इन रिकॉर्ड्स से आरोपी तक पहुंचने में मदद मिली। पुलिस ने संदिग्ध के बैंकिंग लेनदेन, मोबाइल नंबर, पहचान दस्तावेज और अन्य तकनीकी जानकारी को भी जांच के दायरे में लिया।इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए मामले के मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी से पूछताछ के जरिए यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि उसने शिकायतकर्ता की कंपनी से संबंधित दस्तावेज और पहचान की जानकारी कैसे हासिल की और इस पूरी प्रक्रिया में उसके साथ और कौन-कौन लोग शामिल थे।
गिरोह में और लोगों की भूमिका की जांच
पुलिस अब यह भी पता लगा रही है कि मामला केवल एक फर्जी लोन तक सीमित है या आरोपी ने इसी तरीके से अन्य लोगों के नाम और दस्तावेजों का इस्तेमाल कर भी ऋण लिया है। जांच एजेंसियां यह जानकारी जुटाने की कोशिश कर रही हैं कि कथित आरोपी तक महिला की कंपनी से जुड़े संवेदनशील दस्तावेज कैसे पहुंचे।इसके अलावा बैंक खाते में आई रकम के आगे के लेनदेन की भी जांच की जा रही है। अगर रकम को अलग-अलग खातों में ट्रांसफर किया गया है, तो पुलिस उन खातों और उनसे जुड़े लोगों की पहचान करने का प्रयास कर सकती है। इसी आधार पर संभावित अन्य आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है।
कारोबारियों के लिए भी गंभीर चेतावनी
यह मामला कारोबारी दस्तावेजों और पहचान संबंधी जानकारी की सुरक्षा से जुड़े जोखिम को भी सामने लाता है। बिजनेस लोन के लिए आमतौर पर कंपनी की पहचान और वित्तीय स्थिति से जुड़े कई दस्तावेजों की जरूरत होती है। ऐसे में यदि संवेदनशील कागजात गलत हाथों में पहुंच जाएं, तो उनका कथित तौर पर गलत इस्तेमाल किया जा सकता है।विशेषज्ञों के अनुसार, कारोबारियों को अपने पैन, आधार, बैंक स्टेटमेंट, कंपनी रजिस्ट्रेशन और डिजिटल दस्तावेजों को साझा करते समय सावधानी बरतनी चाहिए। किसी भी अनजान लोन, क्रेडिट कार्ड या बैंक खाते की जानकारी सामने आने पर तुरंत संबंधित बैंक और क्रेडिट ब्यूरो से संपर्क करना जरूरी है।
CIBIL रिकॉर्ड पर नजर रखना जरूरी
इस घटना में शिकायतकर्ता को अनधिकृत लोन की जानकारी उस समय मिली, जब वह अपनी बेटी के लिए एजुकेशन लोन लेने पहुंचीं और उनके क्रेडिट रिकॉर्ड में पुराना ऋण सामने आया। ऐसे में समय-समय पर CIBIL जैसी क्रेडिट रिपोर्ट की जांच करना भी महत्वपूर्ण हो सकता है।क्रेडिट रिपोर्ट में किसी ऐसे लोन या खाते की जानकारी दिखाई दे, जिसे व्यक्ति ने लिया ही नहीं है, तो तुरंत संबंधित बैंक या वित्तीय संस्था को शिकायत करनी चाहिए। इसके साथ ही साइबर अपराध की स्थिति में पुलिस या संबंधित साइबर शिकायत प्रणाली में रिपोर्ट दर्ज कराना आवश्यक है।दिल्ली पुलिस की इस कार्रवाई के बाद अब जांच का अगला चरण आरोपी से पूछताछ और कथित फर्जीवाड़े की पूरी कड़ी का पता लगाना है। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि 7.30 लाख रुपये के इस लोन के पीछे कितने लोग शामिल थे और क्या इसी तरीके से दूसरे कारोबारियों को भी निशाना बनाया गया है।
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