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विशाखापत्तनम में BRICS खेल और युवा मामलों की बैठक आज से

नई दिल्ली। भारत शनिवार से विशाखापत्तनम में होने वाली BRICS खेल और युवा मामलों के मंत्रियों की दो दिवसीय बैठक की मेजबानी करेगा। केंद्रीय युवा मामले एवं खेल मंत्री मनसुख मांडविया इस महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता करेंगे। बैठक में BRICS के सभी 11 सदस्य देशों के खेल और युवा मामलों से जुड़े मंत्री तथा वरिष्ठ प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे। इसका उद्देश्य खेलों और युवा विकास के क्षेत्र में सदस्य देशों के बीच सहयोग को और मजबूत करना है।
बैठक के अंतिम दिन एक संयुक्त घोषणापत्र जारी किए जाने की योजना है। इसमें खेलों के निर्माण और विकास के साथ-साथ विभिन्न देशों की स्वदेशी खेल विधाओं और पारंपरिक खेलों को बढ़ावा देने से जुड़े मुद्दों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
11 देशों के मंत्री और प्रतिनिधि होंगे शामिल
खेल मंत्रालय के अनुसार, बैठक में BRICS के सभी सदस्य देशों के प्रतिनिधि अपनी बात रखेंगे। इनमें ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं।
इन देशों के प्रतिनिधियों के बीच खेलों से जुड़े विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श होगा। बैठक का व्यापक उद्देश्य खेलों को सामाजिक और आर्थिक विकास के माध्यम के रूप में आगे बढ़ाना तथा युवाओं को खेल गतिविधियों से जोड़ने के लिए सदस्य देशों के बीच सहयोग बढ़ाना है।
खेलों के विकास पर होगी चर्चा
बैठक के दौरान खेलों के निर्माण और विकास से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की जाएगी। इसमें खेलों के लिए बेहतर वातावरण तैयार करने, खिलाड़ियों को आवश्यक अवसर उपलब्ध कराने और खेलों के माध्यम से युवाओं को सशक्त बनाने जैसे विषय प्रमुख हो सकते हैं।
BRICS देशों में खेलों की अलग-अलग परंपराएं और व्यवस्थाएं हैं। ऐसे में बैठक के जरिए सदस्य देश अपने अनुभव साझा कर सकते हैं और एक-दूसरे की सफल पहलों से सीखने के अवसर तलाश सकते हैं।
खेल प्रतिभाओं की पहचान और उन्हें आगे बढ़ाने के लिए प्रभावी तंत्र विकसित करना भी इस तरह के अंतरराष्ट्रीय सहयोग का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकता है।
स्वदेशी खेलों को मिलेगा महत्व
बैठक की खास विशेषता स्वदेशी और पारंपरिक खेल विधाओं पर जोर होगा। BRICS देशों में कई ऐसे पारंपरिक खेल मौजूद हैं, जिनका ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व है।
भारत में कबड्डी, खो-खो, मल्लखंभ और अन्य पारंपरिक खेलों की समृद्ध परंपरा रही है। इसी तरह BRICS के दूसरे सदस्य देशों में भी स्थानीय खेल और पारंपरिक खेल गतिविधियां लोकप्रिय हैं।
संयुक्त घोषणापत्र में स्वदेशी खेलों को संरक्षित करने, उन्हें नई पीढ़ी तक पहुंचाने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा देने से जुड़े संकल्प शामिल किए जा सकते हैं।
युवाओं की भागीदारी बढ़ाने पर जोर
बैठक में खेलों के साथ युवा मामलों को भी प्रमुखता दी जाएगी। सदस्य देश युवाओं को खेल, नेतृत्व, कौशल विकास और सामाजिक गतिविधियों से जोड़ने के लिए अपने अनुभव साझा करेंगे।
युवा आबादी किसी भी देश की सबसे बड़ी ताकतों में से एक होती है। खेल युवाओं में अनुशासन, नेतृत्व, टीम भावना और स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
इसलिए BRICS देशों के बीच युवा कार्यक्रमों के आदान-प्रदान और खेल गतिविधियों में युवाओं की अधिक भागीदारी के लिए नए रास्ते तलाशे जा सकते हैं।
संयुक्त घोषणापत्र पर रहेगी नजर
दो दिवसीय बैठक का सबसे महत्वपूर्ण परिणाम संयुक्त घोषणापत्र के रूप में सामने आएगा। अंतिम दिन जारी होने वाले इस दस्तावेज में बैठक के दौरान हुई चर्चाओं और सदस्य देशों की साझा प्रतिबद्धताओं को शामिल किया जाएगा।
घोषणापत्र के जरिए BRICS देशों के बीच खेल और युवा मामलों में भविष्य के सहयोग की दिशा तय होने की उम्मीद है। इसमें खेल विकास, स्वदेशी खेलों के संरक्षण और युवाओं को अवसर देने जैसे विषयों को प्रमुखता मिल सकती है।
भारत के लिए अहम अवसर
भारत द्वारा इस बैठक की मेजबानी ऐसे समय में हो रही है जब देश अंतरराष्ट्रीय खेल मंच पर अपनी भूमिका को लगातार मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। भारत में खेलों के बुनियादी ढांचे, प्रतिभा विकास और विभिन्न खेल विधाओं को बढ़ावा देने पर लगातार जोर दिया जा रहा है।
विशाखापत्तनम में होने वाली बैठक भारत को BRICS देशों के साथ अपने अनुभव साझा करने और खेल क्षेत्र में सहयोग के नए अवसर तलाशने का मंच उपलब्ध कराएगी।
साथ ही, भारत अपने पारंपरिक खेलों और युवा केंद्रित कार्यक्रमों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत कर सकेगा।
खेलों के जरिए सहयोग मजबूत करने की कोशिश
BRICS समूह आर्थिक और राजनीतिक सहयोग के साथ अब विभिन्न सामाजिक क्षेत्रों में भी साझेदारी बढ़ाने पर जोर दे रहा है। खेल ऐसा क्षेत्र है जहां देशों के बीच लोगों और युवाओं के स्तर पर सीधे संपर्क की संभावनाएं अधिक होती हैं।
खेल प्रतियोगिताओं, प्रशिक्षण कार्यक्रमों, विशेषज्ञों के आदान-प्रदान और स्वदेशी खेलों के प्रचार के जरिए सदस्य देशों के बीच संबंधों को और मजबूत किया जा सकता है।





