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सांसों पर राहत: दिल्ली में इस साल 229 में से 150 दिन साफ रही हवा

नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली की हवा को लेकर एक बेहद राहत भरी खबर सामने आई है। राजधानी के निवासियों ने सोमवार तक इस साल (2026) के बीते कुल 229 दिनों में से 150 दिन साफ और सांस लेने योग्य हवा का आनंद लिया है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, वैश्विक महामारी और लॉकडाउन वाले वर्ष 2020 के बाद से यह पहला मौका है, जब दिल्ली में साल के शुरुआती आठ महीनों में इतने अधिक दिन वायु गुणवत्ता (AQI) 'साफ-सुथरी' और संतोषजनक श्रेणी में दर्ज की गई है।
यह आंकड़ा दिल्ली की आबो-हवा में आ रहे गुणात्मक बदलाव और प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में किए जा रहे लगातार प्रयासों के सकारात्मक परिणामों को दर्शाता है।
आंकड़ों की जुबानी: 2020 के बाद सबसे अच्छा प्रदर्शन
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के वायु गुणवत्ता बुलेटिन के अनुसार, दिल्ली में इस वर्ष जनवरी से लेकर अगस्त के मध्य तक कुल 229 दिनों का विश्लेषण किया गया। इसमें से 150 दिनों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) या तो 'अच्छा' (Good - 0 से 50), 'संतोषजनक' (Satisfactory - 51 से 100) या 'मध्यम' (Moderate - 101 से 200) श्रेणी में दर्ज किया गया।
वर्ष 2020 के दौरान कोविड-19 महामारी के कारण लागू राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन के समय वाहनों की आवाजाही और औद्योगिक गतिविधियां पूरी तरह ठप थीं, जिसके चलते हवा में अभूतपूर्व सुधार देखा गया था। लेकिन सामान्य व्यावसायिक और औद्योगिक गतिविधियों के बहाल रहने के बावजूद इस वर्ष 150 दिनों तक वायु गुणवत्ता का बेहतर बने रहना एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
किन कारणों से सुधरी दिल्ली की हवा?
पर्यावरण विशेषज्ञों और मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि इस वर्ष दिल्ली-एनसीआर की हवा में आए इस उल्लेखनीय सुधार के पीछे कई अनुकूल कारण और प्रशासनिक कदम जिम्मेदार रहे हैं:
अनुकूल मौसमी दशाएं और बारिश: मानसून के इस सीजन में लगातार और रुक-रुक कर हुई प्री-मानसून व मानसूनी बारिश ने हवा में मौजूद हानिकारक कणों (PM 2.5 और PM 10) को धोने का काम किया है। तेज हवाओं ने भी प्रदूषकों को छितराने में मदद की।
इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को बढ़ावा: दिल्ली सरकार की इलेक्ट्रिक वाहन नीति के सफल क्रियान्वयन के कारण सड़कों पर सार्वजनिक और निजी इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या में भारी वृद्धि हुई है, जिससे वाहनों से होने वाले उत्सर्जित प्रदूषण में कमी आई है।
कड़े निर्माण मानक: सीएक्यूएम (CAQM) और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) द्वारा निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण के कड़े नियमों (एंटी-स्मॉग गन का उपयोग, हरी नेट लगाना) का कड़ाई से पालन कराया गया।
औद्योगिक इकाइयों का पीएनजी (PNG) पर ट्रांसफर: दिल्ली और आसपास के एनसीआर क्षेत्रों में चल रही अधिकांश अधिकृत औद्योगिक इकाइयों को स्वच्छ ईंधन (Natural Gas) पर स्थानांतरित किया जा चुका है।
दिल्लीवासियों को मिली स्वास्थ्य संबंधी राहत
साफ हवा वाले दिनों की संख्या बढ़ने से राजधानी के स्वास्थ्य परिदृश्य पर भी सकारात्मक प्रभाव देखने को मिला है। विशेष रूप से बुजुर्गों, बच्चों और श्वसन संबंधी बीमारियों (जैसे अस्थमा, ब्रोंकाइटिस) से पीड़ित मरीजों को इस वर्ष अस्पतालों के चक्कर कम काटने पड़े हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, पीएम 2.5 और पीएम 10 के स्तर में कमी से हृदय और फेफड़ों के रोगों का जोखिम कम होता है।
सर्दी के मौसम के लिए चुनौती बरकरार
यद्यपि 150 दिनों की साफ हवा एक बड़ी राहत लेकर आई है, लेकिन पर्यावरण विशेषज्ञों ने आगाह किया है कि असली परीक्षा आगामी सर्दियों के महीनों में होगी।
अक्टूबर के उत्तरार्ध से लेकर नवंबर और दिसंबर के दौरान पराली जलाने की घटनाएं, हवा की गति धीमी होना, तापमान में गिरावट (इनवर्जन इफेक्ट) और पटाखों का धुआं मिलकर वायु गुणवत्ता को पुनः 'गंभीर' (Severe) श्रेणी में धकेल देते हैं। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) और दिल्ली सरकार ने अभी से 'ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान' (GRAP) को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए रणनीतियां बनानी शुरू कर दी हैं।
प्रदूषण से लड़ाई में नागरिक सहभागिता जरूरी
पर्यावरणविदों का कहना है कि 150 दिन साफ हवा में सांस लेना इस बात का प्रमाण है कि यदि प्रकृति का सहयोग मिले और सख्त नीतियां लागू हों, तो प्रदूषण पर विजय पाई जा सकती है। हालांकि, इसे पूरे वर्ष बनाए रखने के लिए सार्वजनिक परिवहन के उपयोग, वृक्षारोपण और कचरा न जलाने जैसी आदतों को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाना होगा।





