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82 देशों के राजनयिकों को भारत के प्रीमियम आमों के बॉक्स भेजे गए, BJP की ‘मैंगो डिप्लोमेसी’ पहल

Delhi दिल्ली: भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने राजधानी में 82 देशों के गुप्तचरों को विशेष रूप से तैयार किए गए प्रीमियम भारतीय आमों के बॉक्स पोस्ट किए हैं। इस पहल में भारत की विरासत और कृषि महाविद्यालयों की वैश्विक पहचान को बढ़ावा देने की दिशा में एक सांस्कृतिक उद्यम के रूप में देखा जा रहा है।
इन खास हैम्पर्स में भारत के चार प्रमुख और प्रसिद्ध आमोद-प्रमोद शामिल हैं- गुजरात का गिर केसर, आंध्र प्रदेश का बंगनपल्ली, उत्तर प्रदेश का दशहरी और बनारसी लंगड़ा। ये सभी सामान अपने स्वाद, सुगंध और क्षेत्रीय पहचान के लिए देश और विदेश में प्रसिद्ध हैं।
इस पहल का उद्देश्य भारत की कृषि विरासत को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर लाना है और यह दर्शाता है कि भारतीय कृषि विरासत को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान प्राप्त है। इसे समर के इस लोकप्रिय फल के माध्यम से भारत की सांस्कृतिक और आर्थिक ताकतों को प्रस्तुत करने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है।
हैम्पर्स की ओर से भेजे गए व्यक्तिगत पत्र में नितिन नवीन ने राजनेताओं की राय तय की और आम आदमी को भारत की मेहमाननवाजी, मित्रता और कृषि परंपरा का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय आम केवल एक फल नहीं है, बल्कि देश की सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा है।
भारत दुनिया के सबसे बड़े आम उत्पादकों में से एक है और यहां उगने वाले आम अपनी गुणवत्ता और स्वाद के लिए विश्वभर में लोकप्रिय हैं। विभिन्न राज्यों की अलग-अलग विशेषताएँ न केवल कृषि विविधता को दर्शाती हैं, बल्कि स्थानीय उद्योग में भी महत्वपूर्ण योगदान देती हैं।
गुजरात के गिर क्षेत्र में बंधे जाने वाले गिर केसर आम अपने केसरिया गुड़े, गहराई मठ और तेज सुगंध के लिए जाना जाता है। वर्ष 2011 में भौगोलिक संकेत (जीआई) टैग प्राप्त हुआ था, जो इसकी विशिष्ट पहचान को प्रमाणित करता है।
उत्तर प्रदेश के मलिहाबाद क्षेत्र का दशहरी अपनी आम प्लास्टिक, बिना रेशे वाले गुड़ और स्वादिष्ट स्वाद के लिए प्रसिद्ध है। इस कलाकार को वर्ष 2009 में जीआई टैग मिला, जिससे इसकी अंतरराष्ट्रीय पहचान और मजबूत हुई।
आंध्र प्रदेश का बैंगनपल्ली आम अपने बड़े आकार, छोटे-पीले टुकड़े और ठोस, रसीले गुडे के लिए जाना जाता है। इस आर्टिस्ट को वर्ष 2017 में जीआई टैग प्रदान किया गया था, जो इसे विशिष्ट पहचान देता है।
इसी तरह का बनारसी लंगड़ा आम भी अपने अनोखे स्वाद और सुगंध के कारण खास पहचान रखता है और देश के प्रमुख आमों में जाना जाता है।
कुल मिलाकर, इस पहल में भारत की कृषि और सांस्कृतिक विरासत के रूप में देखा जा रहा है, जिसके जरिए देश ने दुनिया को अपनी विरासत और कृषि संस्कृति की विविधता से अलग करने की कोशिश की है।





