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विपक्ष के नारों का भाजपा ने दिया पलटवार, राज्यसभा में गूंजा विवादित बयान

Ratna Netam
6 Aug 2026 6:10 PM IST
विपक्ष के नारों का भाजपा ने दिया पलटवार, राज्यसभा में गूंजा विवादित बयान
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नई दिल्ली : संसद के मानसून सत्र में गतिरोध लगातार गहराता जा रहा है। बीते तीन सप्ताह से जारी सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक के कारण सदन की कार्यवाही बार-बार बाधित हो रही है। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और अन्य विपक्षी दल छात्रों के साथ कथित पुलिस कार्रवाई, अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी और अन्य मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार को घेर रहे हैं। इसी बीच गुरुवार को राज्यसभा में माहौल उस समय और गरमा गया, जब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद अनिल बोंडे ने विपक्ष के नारों का जवाब देते हुए कांग्रेस पर तीखा हमला बोला और सदन में विवादित नारे लगाए।
राज्यसभा में महाराष्ट्र से भाजपा सांसद अनिल बोंडे ने अपने संबोधन के दौरान कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि वर्ष 2014 से पहले देश में भ्रष्टाचार और आतंकवाद को लेकर कांग्रेस पर सवाल उठाए जाते थे। उन्होंने कहा कि पहले लोग कहते थे कि "कोयला चोर कहां मिलेंगे, कांग्रेस के दफ्तर में", "भ्रष्टाचारी कहां मिलेंगे, कांग्रेस के दफ्तर में" और फिर उन्होंने "आतंकवादी कहां मिलेंगे, कांग्रेस के दफ्तर में" जैसे नारे लगाए। उनके इस बयान के बाद सत्ता पक्ष के कई सांसदों ने भी उनका समर्थन करते हुए नारे दोहराने शुरू कर दिए।
सदन में बढ़ते शोर-शराबे के बीच उपसभापति हरिवंश ने तुरंत हस्तक्षेप किया। उन्होंने अनिल बोंडे को ऐसे नारे लगाने से रोकते हुए कहा कि वे केवल विषय पर ही अपनी बात रखें। उपसभापति ने स्पष्ट किया कि केवल विषय से संबंधित टिप्पणियां ही कार्यवाही के रिकॉर्ड का हिस्सा बनेंगी। हालांकि कुछ समय तक सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच नारेबाजी जारी रही, जिससे सदन का माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया।
दूसरी ओर संसद परिसर में विपक्ष का विरोध प्रदर्शन भी लगातार जारी है। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और कई अन्य विपक्षी दलों के सांसद संसद भवन के मकर द्वार के पास एकत्र होकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि अयोध्या स्थित राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान में कथित अनियमितताएं हुई हैं और इस मामले की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। प्रदर्शन के दौरान विपक्षी सांसदों ने हाथों में तख्तियां लेकर "चंदा चोर कहां मिलेंगे, भाजपा के दफ्तर में", "चंदा चोर, गद्दी छोड़" और "अमित शाह जवाब दो" जैसे नारे लगाए।
विपक्ष केवल राम मंदिर के कथित चंदा विवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई को भी प्रमुख मुद्दा बना रहा है। विपक्ष का आरोप है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया, पैलेट गन का इस्तेमाल किया और आंसू गैस के गोले छोड़े, जो लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन है।
इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि विपक्ष संसद की कार्यवाही सुचारू रूप से चलाने में पूरा सहयोग देने को तैयार है, लेकिन इसके लिए आवश्यक है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सदन में आकर छात्रों के खिलाफ हुई कथित पुलिस कार्रवाई पर जवाब दें। खरगे ने कहा कि विपक्ष पिछले 15 दिनों से इस मुद्दे पर गृह मंत्री के बयान की मांग कर रहा है, लेकिन सरकार लगातार इससे बचने की कोशिश कर रही है।
खरगे ने आरोप लगाया कि छात्रों पर की गई कार्रवाई लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर छात्रों पर लाठीचार्ज का आदेश किसने दिया, पैलेट गन चलाने का निर्देश किसने दिया और आंसू गैस के गोले छोड़ने का फैसला किस स्तर पर लिया गया। उन्होंने कहा कि इन सभी सवालों का जवाब संसद के भीतर दिया जाना चाहिए ताकि देश की जनता को सच्चाई पता चल सके।
संसद के भीतर और बाहर जारी इस राजनीतिक टकराव का असर कार्यवाही पर भी साफ दिखाई दे रहा है। लगातार हो रही नारेबाजी और विरोध प्रदर्शन के कारण कई बार सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी है। सरकार जहां विपक्ष पर संसद नहीं चलने देने का आरोप लगा रही है, वहीं विपक्ष का कहना है कि जब तक उसके उठाए गए महत्वपूर्ण मुद्दों पर सरकार जवाब नहीं देगी, तब तक उसका विरोध जारी रहेगा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मानसून सत्र के शेष दिनों में भी सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव जारी रहने की संभावना है। यदि दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बनती है तो महत्वपूर्ण विधायी कार्य और अन्य संसदीय कामकाज प्रभावित हो सकते हैं। ऐसे में अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि सरकार और विपक्ष के बीच बातचीत से गतिरोध समाप्त होता है या संसद का मौजूदा गतिरोध आगे भी जारी रहता है।
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