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लाल किले के स्वतंत्रता दिवस समारोह से राहुल गांधी की गैरमौजूदगी पर भाजपा का हमला

नई दिल्ली। 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर दिल्ली के लाल किले पर आयोजित मुख्य समारोह में कांग्रेस नेता राहुल गांधी की अनुपस्थिति को लेकर राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने लगातार दूसरे साल राहुल गांधी के कार्यक्रम में शामिल नहीं होने पर निशाना साधा है।
भाजपा ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी का राष्ट्रीय समारोह से दूर रहना उनकी राजनीतिक सोच को दर्शाता है। वहीं, कांग्रेस की ओर से इस मुद्दे पर अभी कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
भाजपा प्रवक्ता ने राहुल गांधी पर साधा निशाना
भाजपा प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर राहुल गांधी की गैरमौजूदगी पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि लाल किले का स्वतंत्रता दिवस समारोह देश के सबसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय आयोजनों में से एक है और इसमें विपक्ष के प्रमुख नेताओं की मौजूदगी लोकतांत्रिक परंपरा का हिस्सा होती है।
उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी का समारोह में शामिल नहीं होना देशभक्ति की भावना के विपरीत है। भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि विपक्ष के नेता होने के नाते राहुल गांधी को ऐसे राष्ट्रीय कार्यक्रमों में भाग लेना चाहिए।
‘वंदे मातरम’ को लेकर भी उठाए सवाल
प्रदीप भंडारी ने अपने बयान में इस बार लाल किले पर पहली बार स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान प्रस्तुत किए गए राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम का भी जिक्र किया।
उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी का कार्यक्रम से दूर रहना वंदे मातरम के प्रति उनकी कथित नाराजगी को दर्शाता है। हालांकि, कांग्रेस की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।
भाजपा ने लगाए गंभीर आरोप
भाजपा प्रवक्ता ने राहुल गांधी की अनुपस्थिति को लेकर कड़ा बयान देते हुए कहा कि उनकी मानसिकता देश के राष्ट्रीय प्रतीकों और परंपराओं के प्रति सम्मान की कमी को दर्शाती है।
उन्होंने राहुल गांधी को विपक्ष के नेता पद के लिए अयोग्य तक बताया और उनकी राजनीतिक सोच पर सवाल उठाए।
हालांकि, कांग्रेस समर्थकों का कहना है कि भाजपा इस मुद्दे को राजनीतिक रंग दे रही है और विपक्ष के नेता की भूमिका को लेकर अनावश्यक विवाद खड़ा किया जा रहा है।
लाल किले पर हुआ भव्य समारोह
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लाल किले की प्राचीर पर 80वें स्वतंत्रता दिवस का मुख्य समारोह आयोजित किया गया। प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय ध्वज फहराने के बाद देशवासियों को संबोधित किया।
समारोह में केंद्र सरकार के कई वरिष्ठ मंत्री और गणमान्य व्यक्ति शामिल हुए। इनमें गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और विदेश मंत्री एस जयशंकर प्रमुख रूप से मौजूद रहे।
इसके अलावा भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पीके मिश्रा और शक्तिकांत दास सहित कई वरिष्ठ अधिकारी भी कार्यक्रम में शामिल हुए।
पिछले साल भी हुई थी चर्चा
राहुल गांधी की लाल किले के स्वतंत्रता दिवस समारोह से अनुपस्थिति को लेकर पिछले वर्ष भी राजनीतिक विवाद हुआ था। 2024 के समारोह में उनकी बैठने की व्यवस्था को लेकर भी विपक्ष और सरकार के बीच आरोप-प्रत्यारोप हुए थे।
उस समय विपक्षी दलों ने आरोप लगाया था कि लोकसभा में विपक्ष के नेता होने के बावजूद राहुल गांधी को पीछे की पंक्ति में बैठाया गया। वहीं, रक्षा मंत्रालय ने सफाई देते हुए कहा था कि बैठने की व्यवस्था में बदलाव ओलंपिक खिलाड़ियों के लिए स्थान उपलब्ध कराने के कारण किया गया था।
राष्ट्रीय समारोहों में विपक्ष की भूमिका पर बहस
स्वतंत्रता दिवस का लाल किले का समारोह देश की एकता और लोकतांत्रिक परंपराओं का प्रतीक माना जाता है। ऐसे कार्यक्रमों में सरकार के साथ विपक्ष के नेताओं की मौजूदगी को भी महत्वपूर्ण माना जाता है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि राष्ट्रीय पर्वों के आयोजन अक्सर राजनीतिक संदेशों का हिस्सा बन जाते हैं और नेताओं की मौजूदगी या अनुपस्थिति पर चर्चा होना आम बात है।
सियासी बयानबाजी तेज
राहुल गांधी की अनुपस्थिति को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज होने के संकेत हैं। भाजपा ने जहां इसे राष्ट्रीय भावना से जोड़ते हुए सवाल उठाए हैं, वहीं कांग्रेस की ओर से आगे कोई प्रतिक्रिया आने पर इस मुद्दे पर और बहस हो सकती है।
फिलहाल लाल किले के समारोह में राहुल गांधी की गैरमौजूदगी ने स्वतंत्रता दिवस के राष्ट्रीय आयोजन को लेकर एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है।





