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New Delhi नई दिल्ली : भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने गुरुवार को कांग्रेस पार्टी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस एक बार फिर “टुकड़े-टुकड़े” मानसिकता की ओर बढ़ रही है। पार्टी ने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस में उन नेताओं की कोई अहमियत नहीं है, जो “परिवार” को प्राथमिकता नहीं देते।
BJP का यह बयान पंजाब कांग्रेस में हाल ही में हुए संगठनात्मक फेरबदल और वरिष्ठ नेता मनीष तिवारी को कथित तौर पर साइडलाइन किए जाने के बाद सामने आया है। इस घटनाक्रम के बाद मनीष तिवारी द्वारा सोशल मीडिया पर “लोगों और संस्थाओं की असुरक्षा” को लेकर की गई टिप्पणी को लेकर भी राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।
BJP नेताओं ने तिवारी के पोस्ट का हवाला देते हुए कहा कि कांग्रेस के भीतर असंतोष और अस्थिरता लगातार बढ़ रही है। पार्टी का दावा है कि यह स्थिति दिखाती है कि कांग्रेस संगठनात्मक स्तर पर कमजोर होती जा रही है और अंदरूनी मतभेद खुलकर सामने आ रहे हैं।
भाजपा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस में निर्णय लेने की प्रक्रिया कुछ सीमित लोगों के इर्द-गिर्द केंद्रित है, जिसके कारण वरिष्ठ नेताओं की भूमिका को नजरअंदाज किया जा रहा है। इसी वजह से पार्टी के भीतर असंतोष की स्थिति पैदा हो रही है।
मनीष तिवारी के हालिया पोस्ट को लेकर BJP ने कहा कि यह केवल व्यक्तिगत प्रतिक्रिया नहीं है, बल्कि यह कांग्रेस की अंदरूनी कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। पार्टी ने कहा कि जब अनुभवी नेता भी अपनी नाराजगी सार्वजनिक रूप से व्यक्त करने लगें, तो यह संगठन के लिए चिंता का विषय होता है।
BJP प्रवक्ताओं ने यह भी कहा कि कांग्रेस का रवैया लगातार “परिवार-केंद्रित राजनीति” की ओर झुका हुआ है, जहां संगठन से ज्यादा प्राथमिकता एक विशेष नेतृत्व संरचना को दी जाती है। इसके कारण पार्टी के भीतर लोकतांत्रिक प्रक्रिया कमजोर पड़ती जा रही है।
इस पूरे विवाद के बीच कांग्रेस की ओर से अब तक कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पंजाब कांग्रेस में हुए बदलावों के बाद पार्टी के भीतर असंतोष की चर्चाएं पहले से ही चल रही थीं।
विशेषज्ञों का कहना है कि मनीष तिवारी जैसे वरिष्ठ नेताओं की प्रतिक्रिया से यह संकेत मिलता है कि कांग्रेस के भीतर निर्णय प्रक्रिया और संगठनात्मक संतुलन को लेकर मतभेद गहरे हो सकते हैं।
वहीं BJP इस मुद्दे को लेकर लगातार कांग्रेस पर हमलावर बनी हुई है और इसे पार्टी की आंतरिक कमजोरी के रूप में पेश कर रही है।
कुल मिलाकर, पंजाब कांग्रेस के संगठनात्मक बदलाव और उसके बाद उपजे विवाद ने एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति में सियासी बयानबाजी को तेज कर दिया है, जिसमें दोनों प्रमुख दल एक-दूसरे पर निशाना साधते नजर आ रहे हैं।





