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सौरव दास और आशुतोष रांका को लेकर बड़ा अपडेट

Rajeshwari Nishad
23 Oct 2026 11:50 PM IST
सौरव दास और आशुतोष रांका को लेकर बड़ा अपडेट
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नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के दो सह-संयोजकों सौरव दास और आशुतोष रांका की कानूनी मुश्किलें अभी खत्म नहीं हुई हैं। सात दिनों तक जेल में रहने के बाद जमानत पर बाहर आए दोनों नेता शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को एक बार फिर दिल्ली के मंदिर मार्ग स्थित स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (एसईएम) की अदालत में पेश हुए। इस दौरान उनके साथ जमानत देने वाले दोनों जमानती भी मौजूद रहे। अदालत में जमानत से जुड़े दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया हुई। दस्तावेजों से संबंधित सवालों के चलते दोनों नेताओं को 17 नवंबर को दोबारा पेश होने के निर्देश दिए गए हैं।
जानकारी के अनुसार, अदालत के समक्ष सौरव दास के निवास संबंधी दस्तावेजों पर सवाल उठे हैं। रिपोर्ट में दावा किया गया कि उनका आधार कार्ड पुडुचेरी का है, जबकि ग्रेटर कैलाश स्थित आवास के किरायानामे को लेकर भी पुलिस ने आपत्ति जताई है। हालांकि, दस्तावेज के फर्जी होने का अंतिम न्यायिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
जमानत मिलने के बाद फिर कोर्ट में पेशी
सौरव दास और आशुतोष रांका को बुधवार, 21 अक्टूबर को अदालत से जमानत मिलने के बाद जेल से रिहा किया गया था।दोनों लगभग एक सप्ताह तक न्यायिक हिरासत में रहे।रिहाई के समय अदालत ने दोनों से व्यक्तिगत बॉन्ड और जमानती बॉन्ड भरवाए थे।इसके साथ ही कानून का पालन करने और सार्वजनिक शांति बनाए रखने संबंधी लिखित आश्वासन भी लिया गया था।हालांकि, रिहाई के बाद भी जमानतियों के दस्तावेजों का सत्यापन पूरा होना बाकी था।इसी प्रक्रिया के तहत शुक्रवार को दोनों नेताओं को अपने-अपने जमानतियों के साथ अदालत में बुलाया गया।
सौरव दास के दस्तावेजों पर उठे सवाल
शुक्रवार की सुनवाई में सौरव दास के दस्तावेजों को लेकर कुछ आपत्तियां सामने आईं।प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, सौरव का आधार कार्ड पुडुचेरी के पते पर बना हुआ है।वहीं, ग्रेटर कैलाश स्थित उनके कथित निवास से जुड़े किरायानामे को लेकर पुलिस ने सवाल उठाए हैं।एक पुलिस अधिकारी के हवाले से रिपोर्ट में दावा किया गया कि किरायानामा वास्तविक नहीं है।हालांकि, यह पुलिस पक्ष का दावा है। दस्तावेजों की प्रामाणिकता का अंतिम निर्धारण संबंधित जांच और कानूनी प्रक्रिया से होगा।
फिलहाल अदालत ने दस्तावेजों के सत्यापन के लिए आगे की तारीख निर्धारित की है।
17 नवंबर को दोबारा होगी पेशी
शुक्रवार की कार्यवाही के बाद दोनों नेताओं को 17 नवंबर 2026 को फिर उपस्थित होने के निर्देश दिए गए हैं।इस दौरान आवश्यक दस्तावेजों की जांच और लंबित औपचारिकताओं पर विचार किया जा सकता है।जमानत के बाद भी अदालत के आदेशों का पालन करना आवश्यक होता है।किसी आरोपी को जमानत मिलने का अर्थ यह नहीं है कि उसके खिलाफ चल रही कानूनी कार्यवाही समाप्त हो गई है।सौरव और आशुतोष के मामले में भी जांच तथा संबंधित कानूनी प्रक्रिया जारी है।
कौन बने दोनों नेताओं के जमानती?
सौरव दास की जमानत गाजियाबाद में रहने वाले उनके एक मित्र ने दी है।जानकारी के अनुसार, उनके मित्र बच्चों से संबंधित एक गैर-सरकारी संगठन चलाते हैं और एक निजी कॉलेज में प्रोफेसर भी हैं।दूसरी ओर, आशुतोष रांका की जमानत उनकी पत्नी ने दी है।उनकी पत्नी मूल रूप से वाराणसी की रहने वाली हैं और बेंगलुरु में एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में कार्यरत हैं।अदालत ने दोनों जमानतियों को दस्तावेज सत्यापन के लिए उपस्थित होने को कहा था।जमानती की जिम्मेदारी होती है कि वह अदालत द्वारा निर्धारित शर्तों और संबंधित कानूनी दायित्वों का पालन करे।
जंतर-मंतर प्रदर्शन से जुड़ा है मामला
दोनों नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की शुरुआत 13 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर क्षेत्र में हुए प्रदर्शन से जुड़ी है।पुलिस के अनुसार, दोनों नेता उस क्षेत्र में पहुंचे थे, जहां प्रदर्शन को लेकर प्रतिबंधात्मक आदेश लागू थे।पुलिस ने आरोप लगाया था कि प्रदर्शनकारियों ने निजी परिसर के रास्ते प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश किया और सुरक्षा संबंधी निर्देशों का उल्लंघन किया।इसके बाद सौरव दास और आशुतोष रांका को हिरासत में लिया गया।दोनों के खिलाफ संबंधित कानूनी कार्यवाही शुरू की गई।हालांकि, पुलिस के आरोपों पर अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होगा।
पहले दो बार नहीं मिली थी जमानत
मामले में दोनों नेताओं की रिहाई की प्रक्रिया कई दिनों तक चली।शुरुआती दो पेशियों के दौरान अदालत ने जमानत से संबंधित दस्तावेजों और अन्य कानूनी शर्तों पर विचार किया था।
उनकी रिहाई नहीं हो सकी थी।
इसके बाद बुधवार को तीसरी बार मंदिर मार्ग स्थित विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट की अदालत में सुनवाई हुई।करीब डेढ़ घंटे तक चली कार्यवाही के दौरान व्यक्तिगत और जमानती बॉन्ड से जुड़ी प्रक्रिया पूरी की गई।अदालत ने लिखित आश्वासन स्वीकार करने के बाद आगे न्यायिक हिरासत में रखना आवश्यक नहीं माना और दोनों की रिहाई का रास्ता साफ किया।
दोनों से क्राइम ब्रांच ने भी की पूछताछ
शुक्रवार को अदालत में पेशी के अलावा दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने भी सौरव और आशुतोष से पूछताछ की।जानकारी के अनुसार, दोनों नेताओं के खिलाफ दर्ज दो अलग-अलग मामलों के संबंध में जांच एजेंसी ने सवाल पूछे।उन्हें गुरुवार को जांच में शामिल होने के लिए बुलाया गया था, लेकिन दोनों ने अतिरिक्त समय मांगा था।इसके बाद शुक्रवार को वे जांच प्रक्रिया में शामिल हुए।हालांकि, पूछताछ में किन विशिष्ट सवालों पर चर्चा हुई और जांच एजेंसी को क्या जानकारी मिली, इसका विस्तृत आधिकारिक विवरण सामने नहीं आया है।
अदालत ने रखीं ये शर्तें
स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ऋतु राज ने दोनों नेताओं को 50-50 हजार रुपये के व्यक्तिगत और जमानती बॉन्ड प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे।यह व्यवस्था संबंधित जांच समाप्त होने तक लागू रहने की बात कही गई थी।दोनों नेताओं से निर्धारित तारीखों पर अदालत में उपस्थित होने और जमानत की शर्तों का पालन करने को कहा गया।उन्होंने लिखित आश्वासन दिया कि वे सार्वजनिक शांति भंग नहीं करेंगे।इसके अतिरिक्त जंतर-मंतर को कानूनी रूप से प्रदर्शन स्थल घोषित किए जाने तक वहां विरोध प्रदर्शन आयोजित नहीं करने का आश्वासन भी दिया गया।भविष्य के प्रदर्शनों को संवैधानिक और कानूनी दायरे में रखने की बात कही गई।
आशुतोष रांका बोले- आंदोलन जारी रहेगा
अदालत में पेश होने के बाद आशुतोष रांका ने कहा कि उनका आंदोलन आगे भी जारी रहेगा।उन्होंने बताया कि शुक्रवार को जमानतियों से जुड़ी सत्यापन प्रक्रिया हुई और अगली तारीख नवंबर के तीसरे सप्ताह में निर्धारित की गई है।रांका ने कहा कि संगठन का आंदोलन किसी एक व्यक्ति पर निर्भर नहीं है।उनके अनुसार, आंदोलन जेल के भीतर रहने या बाहर रहने से नहीं रुकेगा।उन्होंने यह भी कहा कि वे अपने अनुभवों से सीखकर आगे की रणनीति में आवश्यक बदलाव करेंगे।उनके बयान से संकेत मिलता है कि संगठन आने वाले दिनों में अपनी गतिविधियां जारी रखना चाहता है।
दस्तावेज सत्यापन क्यों जरूरी है?
किसी व्यक्ति को जमानत दिए जाने के दौरान अदालत व्यक्तिगत बॉन्ड और जमानती बॉन्ड स्वीकार कर सकती है।इन दस्तावेजों के माध्यम से संबंधित व्यक्तियों की पहचान, पता और कानूनी जिम्मेदारियों की पुष्टि की जाती है।जमानती से जुड़ी जानकारी का सत्यापन इसलिए महत्वपूर्ण होता है, ताकि आवश्यकता पड़ने पर अदालत की शर्तों का पालन सुनिश्चित किया जा सके।यदि किसी दस्तावेज पर सवाल उठते हैं, तो संबंधित पक्ष से अतिरिक्त जानकारी या सही दस्तावेज मांगे जा सकते हैं।दस्तावेजों की जांच का अर्थ अपने आप अपराध साबित होना नहीं है।
अब अगली सुनवाई पर रहेंगी निगाहें
सौरव दास और आशुतोष रांका की अगली पेशी 17 नवंबर को निर्धारित होने के बाद मामले में कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।अदालत के सामने दस्तावेज सत्यापन और जमानत संबंधी शर्तों का पालन महत्वपूर्ण विषय रहेंगे।वहीं, क्राइम ब्रांच की जांच भी अपने स्तर पर जारी है।
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