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5 अक्टूबर को दिल्ली में कांग्रेस की बड़ी रणनीतिक बैठक
Ratna Netam
1 Oct 2026 10:01 PM IST

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नई दिल्ली। चुनाव आयोग और मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर जारी राजनीतिक टकराव के बीच कांग्रेस ने अपने आंदोलन की आगे की रणनीति तय करने के लिए 5 अक्टूबर को नई दिल्ली में अहम बैठक बुलाई है। बैठक में सभी AICC प्रभारी और प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष शामिल होंगे। इसमें चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों को लेकर राज्यों में चल रहे विरोध प्रदर्शनों और आगामी कार्यक्रमों के स्वरूप पर चर्चा की जाएगी।
कांग्रेस पिछले कुछ समय से मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठा रही है। पार्टी का आरोप है कि SIR के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए और इस पूरी प्रक्रिया में पर्याप्त पारदर्शिता नहीं बरती गई। कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए उनके इस्तीफे की मांग की है। ये कांग्रेस के राजनीतिक आरोप हैं, जबकि चुनाव आयोग ने गड़बड़ी और पक्षपात के आरोपों को खारिज किया है।
5 अक्टूबर की बैठक में कांग्रेस नेतृत्व अलग-अलग राज्यों से मिले फीडबैक पर भी चर्चा कर सकता है। पार्टी का उद्देश्य राष्ट्रीय स्तर के अभियान को प्रदेश और बूथ स्तर तक पहुंचाने के लिए एक समान रणनीति तैयार करना है। उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में कांग्रेस पहले ही चुनाव आयोग के खिलाफ कार्यक्रम शुरू कर चुकी है। उत्तर प्रदेश कांग्रेस ने 2 से 8 अक्टूबर तक ‘लोकतंत्र बचाओ सप्ताह’ के तहत कार्यक्रम आयोजित करने की घोषणा की है।
यह बैठक ऐसे समय होने जा रही है जब कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर संयुक्त कार्यक्रम भी तैयार कर रहे हैं। 30 सितंबर को नई दिल्ली में विपक्षी दलों की बैठक हुई थी, जिसमें SIR, मतदाता सूची और मुख्य चुनाव आयुक्त से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की गई। बैठक के बाद चुनाव आयोग के खिलाफ विरोध कार्यक्रम, रैलियां और मार्च आयोजित करने की योजना सामने आई।
कांग्रेस की प्रमुख मांगों में मतदाता सूची में किए गए बदलावों की पूरी जानकारी सार्वजनिक करना और हटाए गए नामों की प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता सुनिश्चित करना शामिल है। पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी भी हाल के दिनों में मतदाता सूची संशोधन को लेकर चुनाव आयोग पर कई सवाल उठा चुके हैं। कांग्रेस का कहना है कि किसी भी पात्र मतदाता का नाम प्रक्रिया संबंधी कमियों के कारण सूची से नहीं हटना चाहिए।
विवाद का एक प्रमुख आधार देश के कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चल रही मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया है। हाल की रिपोर्टों में चुनाव आयोग के भीतर भी कुछ प्रक्रियाओं को लेकर चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों का दावा किया गया था। एक जांच रिपोर्ट में कहा गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले दस महीनों में SIR से जुड़े विभिन्न फैसलों और प्रक्रियाओं पर कई बार लिखित आपत्तियां दर्ज कराई थीं।
चुनाव आयोग ने इन रिपोर्टों पर स्पष्ट किया है कि आयोग के सदस्यों के बीच किसी विषय पर अलग-अलग विचार होना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है। आयोग का कहना है कि SIR समेत उसके अंतिम फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी से सर्वसम्मति से लिए गए। आयोग ने इस धारणा को भी खारिज किया कि मतदाता सूची संशोधन की प्रक्रिया किसी राजनीतिक दल के पक्ष या विरोध में संचालित की जा रही है।
इसके साथ ही चुनाव आयोग ने मतदाता सूची से जुड़े अपने सॉफ्टवेयर और कुछ प्रक्रियाओं की समीक्षा के लिए भी कदम उठाए हैं। हालिया विवाद के बाद आयोग ने प्रक्रिया की समीक्षा की और कुछ राज्यों में मतदाताओं से जुड़े मामलों में घर-घर जाकर दस्तावेज एकत्र करने समेत अतिरिक्त उपाय किए हैं। आयोग का कहना है कि उसका उद्देश्य मतदाता सूची को सही और अद्यतन रखना है तथा सभी कदम कानून के तहत उठाए जा रहे हैं।
दिल्ली में भी मतदाता सूची को लेकर विवाद सामने आया था। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बेला एस्टेट इलाके का उदाहरण देते हुए बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने का आरोप लगाया। चुनाव आयोग ने जवाब में कहा कि उस क्षेत्र में कई मतदाताओं के दर्ज पते और वास्तविक आवासीय स्थिति में बदलाव आया था और इसी आधार पर प्रक्रिया की गई। आयोग ने कांग्रेस के आरोपों से अलग तथ्य पेश किए।
कांग्रेस अब इस पूरे मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक अभियान का रूप देने की तैयारी कर रही है। 5 अक्टूबर की बैठक में प्रदेश अध्यक्षों और AICC प्रभारियों से अपने-अपने राज्यों में मतदाता सूची से जुड़े मामलों, संगठन की तैयारियों और विरोध कार्यक्रमों पर जानकारी देने की उम्मीद है। इसके आधार पर आगे की रणनीति और कार्यक्रमों का प्रारूप तय किया जा सकता है।
विपक्षी दलों ने भी चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों पर संयुक्त कार्रवाई की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। 30 सितंबर की बैठक में चुनाव आयोग तक मार्च, विभिन्न राज्यों में रैलियां और जिला स्तर पर विरोध कार्यक्रमों पर चर्चा हुई। इससे संकेत मिलता है कि आने वाले दिनों में मतदाता सूची और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली राजनीतिक बहस के प्रमुख मुद्दों में बनी रहेगी।
दूसरी ओर चुनाव आयोग लगातार यह कह रहा है कि मतदाता सूची तैयार करने और उसमें संशोधन की प्रक्रिया संवैधानिक तथा कानूनी प्रावधानों के तहत की जाती है। आयोग ने अपने भीतर मतभेद के दावों के बावजूद कहा है कि अंतिम संस्थागत फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं और पात्र मतदाताओं को सूची में शामिल करने के लिए दावे तथा आपत्तियां दर्ज कराने की व्यवस्था मौजूद है।
अब 5 अक्टूबर की कांग्रेस बैठक पर नजर रहेगी। इसमें पार्टी अपने आंदोलन के अगले चरण, राज्यों के बीच समन्वय और चुनाव आयोग से जुड़ी मांगों को लेकर आगे की दिशा तय करेगी। कांग्रेस जहां इस मुद्दे को चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और मतदाता अधिकारों से जोड़ रही है, वहीं चुनाव आयोग आरोपों को खारिज करते हुए अपनी प्रक्रिया को कानूनसम्मत बता रहा है।
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