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H-1B वीजा धारकों को बड़ी राहत विदेश मंत्रालय ने साफ की स्थिति

Ratna Netam
9 Oct 2026 5:04 PM IST
H-1B वीजा धारकों को बड़ी राहत विदेश मंत्रालय ने साफ की स्थिति
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नई दिल्ली। विदेश मंत्रालय (MEA) ने शुक्रवार को अमेरिकी सरकार द्वारा कुछ कंपनियों को परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन (PERM) कार्यक्रम से हटाने के फैसले को लेकर स्थिति स्पष्ट की है। मंत्रालय ने कहा कि अमेरिकी श्रम विभाग का यह फैसला मौजूदा H-1B वीजा की वैधता या वीजा धारकों और उनके आश्रितों की आव्रजन स्थिति को प्रभावित नहीं करता है। विदेश मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि PERM कार्यक्रम और H-1B वीजा कार्यक्रम अलग-अलग व्यवस्थाएं हैं। इसलिए दोनों को एक ही प्रक्रिया के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।इसके साथ ही भारत ने अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की विदेशी कर्मचारियों को लेकर की गई टिप्पणियों पर कड़ी आपत्ति जताई है। विदेश मंत्रालय ने भारतीय पेशेवरों के संबंध में की गई टिप्पणियों को बेबुनियाद और बेहद आपत्तिजनक बताया। मंत्रालय का यह बयान ऐसे समय सामने आया है, जब अमेरिका में विदेशी कर्मचारियों, रोजगार संबंधी नियमों और आव्रजन नीतियों को लेकर चर्चा जारी है।
विदेश मंत्रालय ने PERM और H-1B के बीच बताया अंतर
नई दिल्ली में आयोजित साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग के दौरान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने अमेरिकी श्रम विभाग के फैसले पर भारत का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि भारत सरकार को कुछ कंपनियों के संबंध में PERM कार्यक्रम से जुड़े अमेरिकी श्रम विभाग के फैसले की जानकारी है।जायसवाल ने कहा, "हमें कुछ कंपनियों के लिए 'परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन' प्रोग्राम यानी PERM से जुड़े अमेरिकी श्रम विभाग के फैसले की जानकारी है। यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि PERM, H-1B वीजा प्रोग्राम से अलग है।"विदेश मंत्रालय के इस बयान का मुख्य उद्देश्य दोनों व्यवस्थाओं के बीच अंतर स्पष्ट करना था। मंत्रालय ने कहा कि अमेरिकी श्रम विभाग का संबंधित फैसला मौजूदा H-1B वीजा धारकों और उनके आश्रितों की स्थिति को प्रभावित नहीं करता है।
मौजूदा H-1B वीजा की वैधता पर असर नहीं
विदेश मंत्रालय ने विशेष रूप से स्पष्ट किया कि PERM कार्यक्रम के संबंध में लिए गए फैसले से पहले से जारी H-1B वीजा की वैधता प्रभावित नहीं होगी। इसके साथ ही वीजा धारकों और उनके आश्रितों की मौजूदा स्थिति पर भी इस फैसले का कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।H-1B वीजा अमेरिका में विशेष योग्यता वाले पेशेवरों को निर्धारित शर्तों के तहत काम करने की अनुमति देने वाली व्यवस्था है। इस कार्यक्रम का उपयोग तकनीक, इंजीनियरिंग, अनुसंधान और अन्य विशेषज्ञता वाले क्षेत्रों में रोजगार के लिए किया जाता है।वहीं, PERM अमेरिकी रोजगार आधारित स्थायी निवास की प्रक्रिया से जुड़ा श्रम प्रमाणन कार्यक्रम है। इसके अंतर्गत निर्धारित नियमों के अनुसार नियोक्ता को श्रम प्रमाणन से संबंधित प्रक्रिया पूरी करनी होती है।दोनों व्यवस्थाओं का उद्देश्य और कानूनी प्रक्रिया अलग होने के कारण PERM से संबंधित किसी फैसले को सीधे H-1B वीजा की समाप्ति के रूप में नहीं समझा जा सकता।हालांकि, विदेश मंत्रालय का स्पष्टीकरण संबंधित अमेरिकी फैसले के तत्काल प्रभाव को लेकर है। व्यक्तिगत आव्रजन मामलों में लागू नियम और परिस्थितियां अलग हो सकती हैं।
जेडी वेंस की टिप्पणियों पर भारत की कड़ी आपत्ति
विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की विदेशी कर्मचारियों को लेकर की गई टिप्पणियों पर भी प्रतिक्रिया दी। मंत्रालय ने भारतीय पेशेवरों के संबंध में की गई बातों को बेबुनियाद और बेहद आपत्तिजनक बताया।भारत की ओर से यह प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण है, क्योंकि बड़ी संख्या में भारतीय पेशेवर अमेरिका में विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हैं। भारतीय पेशेवरों से संबंधित बयान और आव्रजन नीतियां दोनों देशों के बीच रोजगार तथा पेशेवर आवाजाही से जुड़ी चर्चाओं का हिस्सा रहती हैं।विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया से स्पष्ट है कि भारत ने इन टिप्पणियों को लेकर अपना विरोध दर्ज कराया है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में अमेरिकी उपराष्ट्रपति के बयान के पूरे शब्द और उस बयान का विस्तृत संदर्भ नहीं दिया गया है। इसलिए उनके कथन के बारे में अतिरिक्त निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
भारतीय पेशेवरों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है मामला?
अमेरिका में काम करने वाले भारतीय पेशेवरों के लिए H-1B वीजा एक महत्वपूर्ण आव्रजन व्यवस्था है। इस वीजा के माध्यम से योग्य विदेशी कर्मचारियों को अमेरिकी कंपनियों में निर्धारित अवधि और शर्तों के तहत रोजगार मिलता है।ऐसे में जब अमेरिकी श्रम विभाग किसी रोजगार संबंधी कार्यक्रम के तहत कार्रवाई करता है, तो उससे अलग-अलग वीजा व्यवस्थाओं पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव को लेकर सवाल उठ सकते हैं।विदेश मंत्रालय ने इसी संदर्भ में स्पष्ट किया है कि PERM कार्यक्रम से जुड़ा अमेरिकी फैसला मौजूदा H-1B वीजा धारकों की वैध स्थिति को प्रभावित नहीं करता है।इस स्पष्टीकरण से यह अंतर समझने में मदद मिलती है कि स्थायी श्रम प्रमाणन से संबंधित कार्रवाई और अस्थायी रोजगार वीजा की स्थिति अलग विषय हैं। हालांकि, किसी कंपनी के PERM प्रमाणन से संबंधित फैसले का उसके कर्मचारियों की भविष्य की स्थायी निवास प्रक्रिया पर क्या प्रभाव पड़ेगा, यह संबंधित अमेरिकी नियमों और व्यक्तिगत परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।
अमेरिकी श्रम विभाग के फैसले पर भारत की नजर
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत को अमेरिकी श्रम विभाग के संबंधित फैसले की जानकारी है। उन्होंने मीडिया ब्रीफिंग में इस बात पर जोर दिया कि PERM और H-1B को अलग-अलग कार्यक्रमों के रूप में समझा जाना चाहिए।उपलब्ध जानकारी में उन कंपनियों के नाम नहीं बताए गए हैं, जिनके संबंध में अमेरिकी श्रम विभाग ने फैसला लिया है। इसी तरह, कार्रवाई के कारणों और उससे प्रभावित संभावित आवेदनों की संख्या का विवरण भी सामने नहीं आया है।ऐसे में फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि PERM कार्यक्रम के अंतर्गत संबंधित कंपनियों के भविष्य के आवेदनों या लंबित प्रक्रियाओं पर किस स्तर तक प्रभाव पड़ सकता है। इन पहलुओं की स्थिति अमेरिकी श्रम विभाग के विस्तृत आदेश और संबंधित नियमों से स्पष्ट होगी।
भारतीय पेशेवरों को लेकर भारत ने स्पष्ट किया रुख
विदेश मंत्रालय की शुक्रवार की ब्रीफिंग में दो प्रमुख मुद्दे सामने आए। पहला, अमेरिकी श्रम विभाग के PERM संबंधी फैसले का मौजूदा H-1B वीजा और आश्रितों की स्थिति पर प्रभाव नहीं पड़ने का स्पष्टीकरण। दूसरा, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की भारतीय पेशेवरों से संबंधित टिप्पणियों पर भारत की आपत्ति।प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साफ किया कि PERM कार्यक्रम, H-1B वीजा कार्यक्रम से अलग है। मंत्रालय ने मौजूदा वीजा धारकों और उनके आश्रितों की स्थिति को लेकर भ्रम दूर करने का प्रयास किया है।फिलहाल भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि संबंधित अमेरिकी फैसले से मौजूदा H-1B वीजा की वैधता प्रभावित नहीं होती। वहीं, भारतीय पेशेवरों को लेकर की गई टिप्पणियों पर विदेश मंत्रालय ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। इस मामले में आगे की स्थिति अमेरिकी श्रम विभाग के संबंधित आदेशों और आव्रजन नियमों के आधार पर स्पष्ट होगी।
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