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सोनम वांगचुक की पदयात्रा में नहीं पहुंचे CJP के बड़े नेता, सोशल मीडिया पर जताया समर्थन

Kavita2
24 Sept 2026 9:20 AM IST
सोनम वांगचुक की पदयात्रा में नहीं पहुंचे CJP के बड़े नेता, सोशल मीडिया पर जताया समर्थन
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नई दिल्ली/लद्दाख। सामाजिक और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की लद्दाख में आयोजित पदयात्रा के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रमुख नेताओं की मौजूदगी को लेकर सवाल उठ रहे हैं। वांगचुक ने लद्दाख से जुड़े मुद्दों पर देशभर के लोगों से समर्थन की अपील की थी। CJP के संस्थापक और राष्ट्रीय संयोजक अभिजीत दीपके ने भी सोशल मीडिया पर लोगों से लद्दाख के समर्थन में खड़े होने की अपील की, लेकिन उपलब्ध रिपोर्टों में दीपके, सौरभ दास या आशुतोष रांका के स्वयं पदयात्रा में शामिल होने की पुष्टि नहीं मिलती।

सोनम वांगचुक और CJP के बीच संबंध इस साल जुलाई में उस समय चर्चा में आए थे, जब वांगचुक CJP के नेतृत्व में चल रहे विरोध प्रदर्शन के समर्थन में भूख हड़ताल पर बैठे थे। उन्होंने 28 जून से शुरू हुआ अपना अनशन 26 दिनों के बाद 23 जुलाई को समाप्त किया था। उस समय वांगचुक की भूख हड़ताल ने आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर काफी चर्चा दिलाई थी।

वांगचुक ने केंद्रीय मंत्रियों जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह से मुलाकात के बाद अपना अनशन समाप्त किया था। उन्होंने उस समय बताया था कि विभिन्न राजनीतिक दलों के 65 सांसद उनसे मिलने पहुंचे थे या उन्होंने पत्रों के जरिए अनशन समाप्त करने की अपील की थी। दूसरी ओर, CJP ने कहा था कि उसका आंदोलन आगे भी जारी रहेगा।

CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने वांगचुक के अनशन समाप्त करने के फैसले का स्वागत किया था। उन्होंने कहा था कि वांगचुक ने अपनी सेहत को जोखिम में डालकर देशभर के लोगों का ध्यान आंदोलन की ओर आकर्षित किया। CJP के नेताओं ने उस समय सार्वजनिक रूप से वांगचुक की भूमिका की सराहना की थी।

इसके बाद सितंबर में वांगचुक ने लद्दाख के मुद्दों को लेकर एक बार फिर देश के लोगों से साथ आने की अपील की। उन्होंने 9 सितंबर को गृह मंत्रालय के साथ हुई बैठक का जिक्र करते हुए कहा था कि इसमें कोई अंतिम समाधान नहीं निकला और अगली बैठक की तारीख तय की गई। इसी क्रम में 19 से 24 सितंबर के बीच पदयात्रा आयोजित करने की बात सामने आई। वांगचुक ने लोगों से इस अभियान में सहयोग की अपील की थी।

इस अपील पर अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया के माध्यम से समर्थन जताया और लोगों से लद्दाख के साथ खड़े होने को कहा। हालांकि सोशल मीडिया पर समर्थन और स्वयं पदयात्रा में शामिल होने के बीच अंतर को लेकर अब चर्चा हो रही है। उपलब्ध सार्वजनिक रिपोर्टों में CJP के शीर्ष नेतृत्व के लद्दाख पहुंचकर इस पदयात्रा में हिस्सा लेने की पुष्टि नहीं होती। इसे सीधे तौर पर वांगचुक और CJP के बीच मतभेद का प्रमाण मानना भी उचित नहीं होगा, क्योंकि नेताओं की गैरमौजूदगी के कारण पर स्पष्ट आधिकारिक बयान उपलब्ध नहीं है।

सोनम वांगचुक और CJP के संबंधों को लेकर इससे पहले भी अटकलें लग चुकी हैं। जुलाई में वांगचुक ने 26 दिन बाद अपना अनशन CJP या विपक्षी नेताओं की मौजूदगी में नहीं, बल्कि केंद्रीय मंत्रियों के साथ बातचीत के बाद समाप्त किया था। इसके बाद CJP और वांगचुक के बीच रिश्तों में कथित खटास की चर्चा सामने आई थी। हालांकि CJP की ओर से ऐसी अटकलों पर प्रतिक्रिया दी गई थी और आंदोलन से जुड़े मुद्दों पर समर्थन जारी रखने की बात कही गई थी।

अगस्त में वांगचुक ने CJP नेतृत्व और संगठन की भविष्य की भूमिका पर भी अपनी राय रखी थी। उन्होंने कहा था कि अभिजीत दीपके, सौरभ दास और आशुतोष रांका की राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं हो सकती हैं। साथ ही उनकी इच्छा थी कि संगठन दबाव समूह के रूप में काम करे और राजनीतिक मंच बनने से बचे। यह बयान भी दोनों पक्षों के रिश्तों को लेकर चर्चा का कारण बना था।

CJP के संगठनात्मक ढांचे में भी पिछले कुछ महीनों में बदलाव हुए हैं। अगस्त में अभिजीत दीपके को राष्ट्रीय संयोजक की जिम्मेदारी दी गई, जबकि सौरभ दास और आशुतोष रांका को भी संगठन में बड़ी जिम्मेदारियां मिलीं। तीनों चेहरे CJP के प्रमुख नेतृत्व में शामिल हैं और अलग-अलग राज्यों में शिक्षा, बेरोजगारी और अन्य जनहित के मुद्दों पर अभियान चला रहे हैं।

हाल के दिनों में CJP के नेता दूसरे राज्यों में भी सक्रिय दिखाई दिए हैं। सौरभ दास ने ओडिशा में स्कूली किताबों की त्रुटियों को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन का समर्थन किया, जबकि आशुतोष रांका राजस्थान में सरकारी स्कूलों की स्थिति को लेकर अभियान में शामिल हुए। इससे यह स्पष्ट है कि संगठन के प्रमुख नेता अलग-अलग मुद्दों पर सक्रिय हैं, लेकिन लद्दाख पदयात्रा में उनकी प्रत्यक्ष मौजूदगी की पुष्टि सामने नहीं आई है।

फिलहाल CJP की ओर से यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि उसके प्रमुख नेता लद्दाख की पदयात्रा में व्यक्तिगत रूप से क्यों शामिल नहीं हुए। इसलिए उनकी गैरमौजूदगी को वांगचुक से दूरी या मतभेद के रूप में प्रस्तुत करना बिना आधिकारिक पुष्टि के निष्कर्ष होगा। इतना जरूर है कि 26 दिनों के अनशन के दौरान CJP के आंदोलन को समर्थन देने वाले सोनम वांगचुक की नई अपील और पदयात्रा में संगठन के शीर्ष नेताओं की भौतिक मौजूदगी का सवाल राजनीतिक चर्चा में आ गया है।

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