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Farmers के लिए बड़ी सौगात, नए यूरिया संयंत्रों से घटेगी आयात पर निर्भरता

Ratna Netam
15 July 2026 9:38 PM IST
Farmers  के लिए बड़ी सौगात, नए यूरिया संयंत्रों से घटेगी आयात पर निर्भरता
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New Delhi नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की अहम बैठक में देश की आर्थिक और औद्योगिक क्षमता को बढ़ाने वाले कई बड़े फैसलों को मंजूरी दी गई है। सरकार ने भारत को यूरिया उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने, सेमीकंडक्टर क्षेत्र को मजबूत करने और रेलवे नेटवर्क के विस्तार के लिए महत्वपूर्ण योजनाओं पर मुहर लगाई है।

कैबिनेट ने ‘राष्ट्रीय निवेश नीति-2026’ को मंजूरी दी है, जिसके तहत देश में एक करोड़ टन अतिरिक्त यूरिया उत्पादन क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा डिजिटल क्षेत्र में भारत को वैश्विक केंद्र बनाने के लिए ₹1.27 लाख करोड़ की ‘सेमीकॉन 2.0’ योजना और ओडिशा-झारखंड में रेलवे की दो बड़ी मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को भी स्वीकृति दी गई है।

यूरिया उत्पादन में आत्मनिर्भर बनेगा भारत

कैबिनेट बैठक के बाद केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि देश में यूरिया की मांग हर साल करीब 5 प्रतिशत की दर से बढ़ रही है। वर्तमान में भारत में सालाना लगभग 4 करोड़ टन यूरिया की जरूरत होती है, जबकि घरेलू उत्पादन करीब 3 करोड़ टन है। मांग और उत्पादन के बीच एक करोड़ टन का अंतर पूरा करने के लिए भारत को यूरिया का आयात करना पड़ता है।

नई निवेश नीति-2026 के तहत देश में प्राकृतिक गैस आधारित 8 से 9 नए आधुनिक यूरिया संयंत्र स्थापित किए जाएंगे। यह योजना वर्ष 2012 की नई निवेश नीति (NIP-2012) का विस्तारित रूप है।

इस नीति में निवेशकों को आकर्षित करने के लिए कई प्रावधान किए गए हैं। इसमें स्मार्ट सब्सिडी व्यवस्था, यूरिया प्लांट संचालित करने वाली कंपनियों को 12 से 16 प्रतिशत तक सुनिश्चित रिटर्न और विदेशी मुद्रा विनिमय जोखिम से सुरक्षा देने के लिए विशेष वित्तीय ढांचा शामिल है।

सेमीकॉन 2.0 से मजबूत होगा भारत का चिप उद्योग

कैबिनेट ने भारत के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को बढ़ावा देने के लिए ‘सेमीकॉन 2.0’ योजना को भी मंजूरी दी है। इस योजना के लिए अगले छह वर्षों में ₹1,27,500 करोड़ का बजटीय प्रावधान किया गया है।

सरकार का लक्ष्य इस योजना के माध्यम से देश में करीब ₹4 लाख करोड़ का निवेश आकर्षित करना है। इसके तहत सालाना ₹2 लाख करोड़ के चिप उत्पादन और ₹1 लाख करोड़ के निर्यात का लक्ष्य रखा गया है।

योजना के तहत भारत में पहली सेमीकंडक्टर फैब यूनिट वर्ष 2028 तक शुरू होने की संभावना जताई गई है। वर्तमान में देश में 105 से अधिक स्टार्टअप चिप डिजाइन के क्षेत्र में काम कर रहे हैं, जिन्हें आधुनिक तकनीक और वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

इसके अलावा देश के 315 विश्वविद्यालयों में 68 हजार से अधिक छात्रों को चिप डिजाइनिंग के लिए आधुनिक ईडीए टूल्स के माध्यम से प्रशिक्षण दिया जा चुका है। आने वाले समय में इस कार्यक्रम का विस्तार किया जाएगा।

ओडिशा और झारखंड को रेलवे की बड़ी सौगात

कैबिनेट की आर्थिक मामलों की समिति (CCEA) ने रेलवे की दो बड़ी मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं की अनुमानित लागत ₹3,907 करोड़ है और इन्हें वर्ष 2030-31 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

इनमें ओडिशा के पारादीप-हरिदासपुर रेलखंड का दोहरीकरण और झारखंड-ओडिशा सीमा पर राजखरसावां-डांगोपोसी रेलखंड पर चौथी लाइन का निर्माण शामिल है।

करीब 145 किलोमीटर लंबे इस नए रेल नेटवर्क से ओडिशा और झारखंड के 1,526 गांवों की लगभग 14 लाख आबादी को लाभ मिलेगा। इससे खनिज परिवहन, व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।

परियोजनाओं के पूरा होने से ललितगिरि बौद्ध परिसर और मेघाहातुबुरू पहाड़ियों जैसे पर्यटन स्थलों तक पहुंच भी आसान होगी। सरकार के अनुसार, इन रेल परियोजनाओं से हर साल करीब 6 करोड़ लीटर तेल आयात की बचत होगी और कार्बन उत्सर्जन में लगभग 29 करोड़ किलोग्राम की कमी आएगी।

कैबिनेट के इन फैसलों को भारत की आत्मनिर्भरता, डिजिटल विकास और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

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