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मोदी कैबिनेट का बड़ा फैसला, 14,500 करोड़ की VGF योजना मंजूर
Rajeshwari Nishad
5 Nov 2026 8:43 PM IST

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नई दिल्ली। देश में अक्षय ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ावा देने और बिजली की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार, 4 नवंबर 2026 को हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में 14,500 करोड़ रुपये की व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण (Viability Gap Funding-VGF) योजना को मंजूरी दी गई। इस योजना के तहत वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 के बीच देश में 92 गीगावॉट-घंटे (GWh) की नई ग्रिड-स्केल ऊर्जा भंडारण क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार का मानना है कि यह फैसला बिजली क्षेत्र में बड़ा बदलाव लाएगा और सौर तथा पवन ऊर्जा के अधिक प्रभावी इस्तेमाल का रास्ता खोलेगा।
केंद्रीय मंत्रिमंडल के इस फैसले से देश में ऊर्जा भंडारण की बड़ी परियोजनाओं को आर्थिक सहायता मिलेगी। योजना के माध्यम से ऐसी तकनीकों को बढ़ावा दिया जाएगा, जिनकी मदद से जरूरत से अधिक उत्पादित बिजली को संग्रहित करके बाद में इस्तेमाल किया जा सकेगा। इससे बिजली की मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
सरकार ने इस योजना के तहत करीब 97,600 करोड़ रुपये के कुल निवेश का अनुमान लगाया है। इसमें केंद्र सरकार की ओर से 14,500 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। इस सहायता का मुख्य उद्देश्य ऊर्जा भंडारण परियोजनाओं की लागत संबंधी चुनौतियों को कम करना और निजी तथा सार्वजनिक क्षेत्र के निवेश को प्रोत्साहित करना है।योजना की खास बात यह है कि इसमें केवल बैटरी आधारित ऊर्जा भंडारण पर निर्भर नहीं रहा जाएगा। सरकार ने अलग-अलग तकनीकों के माध्यम से कुल 92 गीगावॉट-घंटे क्षमता विकसित करने की योजना बनाई है। इसमें 60 गीगावॉट-घंटे की क्षमता पंप्ड स्टोरेज परियोजनाओं, 30 गीगावॉट-घंटे की क्षमता बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम और 2 गीगावॉट-घंटे की क्षमता नई एवं वैकल्पिक ऊर्जा भंडारण तकनीकों से विकसित की जाएगी।
पंप्ड स्टोरेज तकनीक में बिजली की उपलब्धता अधिक होने पर पानी को निचले जलाशय से ऊंचाई पर स्थित जलाशय में पहुंचाया जाता है। बाद में बिजली की जरूरत बढ़ने पर उसी पानी को नीचे छोड़कर टरबाइन के माध्यम से बिजली उत्पन्न की जाती है। इस तरह अतिरिक्त ऊर्जा का उपयोग बाद के समय के लिए किया जा सकता है।वहीं, बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम में बिजली को बड़े बैटरी संयंत्रों में संग्रहित किया जाता है। जब बिजली की मांग बढ़ती है या सौर और पवन ऊर्जा का उत्पादन कम होता है, तब संग्रहित ऊर्जा को ग्रिड में वापस भेजा जा सकता है। यह तकनीक बिजली व्यवस्था को अधिक लचीला बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
दरअसल, भारत में सौर और पवन ऊर्जा उत्पादन तेजी से बढ़ रहा है। हालांकि, इन स्रोतों से हर समय एक जैसी मात्रा में बिजली उपलब्ध नहीं होती। सौर ऊर्जा का उत्पादन सूर्य के प्रकाश पर निर्भर करता है, जबकि पवन ऊर्जा हवा की गति के अनुसार बदलती रहती है। ऐसे में ऊर्जा भंडारण प्रणालियां इस समस्या का समाधान उपलब्ध कराने में मदद कर सकती हैं।नई योजना से दिन के समय तैयार होने वाली अतिरिक्त सौर ऊर्जा को शाम या रात में उपयोग करना आसान हो सकेगा। इसी प्रकार पवन ऊर्जा उत्पादन में उतार-चढ़ाव होने पर संग्रहित बिजली आपूर्ति में संतुलन बनाए रखने में सहायता कर सकती है। इससे पारंपरिक बिजली उत्पादन स्रोतों पर निर्भरता कम करने की दिशा में भी प्रगति होने की उम्मीद है।
सरकार के अनुसार, योजना के तहत विकसित होने वाली नई क्षमता देश की वर्तमान ग्रिड-स्केल ऊर्जा भंडारण क्षमता के लगभग 170 प्रतिशत के बराबर होगी। इसके अलावा, वर्ष 2031-32 तक देश में अनुमानित 411 गीगावॉट-घंटे की ऊर्जा भंडारण आवश्यकता को पूरा करने की दिशा में भी यह महत्वपूर्ण योगदान देगी।इस योजना के तहत परियोजनाओं का आवंटन टैरिफ आधारित प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के माध्यम से किया जाएगा। इसका उद्देश्य पारदर्शिता बनाए रखना और प्रतिस्पर्धा के जरिए परियोजनाओं की लागत को नियंत्रित करना है। सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की बिजली वितरण कंपनियां बैटरी तथा पंप्ड स्टोरेज परियोजनाओं के लिए वित्तीय सहायता प्राप्त करने की पात्र होंगी।
इसके अतिरिक्त, नई ऊर्जा भंडारण तकनीकों से संबंधित परियोजनाओं को सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की संस्थाएं विकसित कर सकेंगी। सरकार को उम्मीद है कि इससे ऊर्जा क्षेत्र में नई तकनीकों के विकास और व्यावसायिक इस्तेमाल को प्रोत्साहन मिलेगा।इस फैसले का एक महत्वपूर्ण पहलू घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देना भी है। सरकार ने बैटरी ऊर्जा भंडारण परियोजनाओं के लिए न्यूनतम 40 प्रतिशत घरेलू सामग्री इस्तेमाल करने की शर्त निर्धारित की है। इसका उद्देश्य भारत में बैटरी और संबंधित उपकरणों के उत्पादन को बढ़ावा देना तथा आयातित सामग्री पर निर्भरता कम करना है।
इस प्रावधान से भारतीय विनिर्माण कंपनियों के लिए नए व्यावसायिक अवसर पैदा हो सकते हैं। इसके साथ ही बैटरी उत्पादन, उपकरण आपूर्ति, परियोजना निर्माण और तकनीकी सेवाओं से जुड़े क्षेत्रों में निवेश बढ़ने की संभावना है। हालांकि, रोजगार और निवेश का वास्तविक प्रभाव परियोजनाओं के क्रियान्वयन तथा बाजार की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।केंद्र सरकार का कहना है कि यह योजना देश की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत बनाने में सहायक होगी। अक्षय ऊर्जा का अधिक उपयोग होने से बिजली उत्पादन व्यवस्था में विविधता आएगी और ऊर्जा आपूर्ति के लिए अधिक विकल्प उपलब्ध होंगे।
आम उपभोक्ताओं के लिए भी यह फैसला महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ऊर्जा भंडारण क्षमता बढ़ने से बिजली ग्रिड की स्थिरता बेहतर हो सकती है और अधिक मांग वाले समय में बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित करने में सहायता मिल सकती है। हालांकि, इससे बिजली की दरों में तत्काल कमी या बिजली कटौती पूरी तरह समाप्त होने की गारंटी नहीं है। इसके परिणाम परियोजनाओं के समय पर पूरा होने और बिजली वितरण व्यवस्था की कार्यक्षमता पर निर्भर करेंगे।कुल मिलाकर, 14,500 करोड़ रुपये की वीजीएफ योजना भारत की स्वच्छ ऊर्जा नीति को आगे बढ़ाने वाला महत्वपूर्ण कदम है। सरकार का लक्ष्य भविष्य की बिजली जरूरतों को पूरा करने के लिए ऐसी व्यवस्था विकसित करना है, जिसमें अक्षय ऊर्जा के साथ बड़े पैमाने पर बिजली संग्रहित करने की सुविधा भी उपलब्ध हो। यदि योजना का प्रभावी क्रियान्वयन होता है, तो आने वाले वर्षों में देश की ऊर्जा सुरक्षा, बिजली आपूर्ति और घरेलू विनिर्माण क्षेत्र को बड़ा लाभ मिल सकता है।
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