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उज्ज्वला योजना में बड़ा बदलाव, सब्सिडी वाले LPG सिलेंडर की सीमा घटाकर 4 प्रति वर्ष

Kavita2
9 Jun 2026 1:35 PM IST
उज्ज्वला योजना में बड़ा बदलाव, सब्सिडी वाले LPG सिलेंडर की सीमा घटाकर 4 प्रति वर्ष
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Delhi दिल्ली: केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के तहत मिलने वाले सब्सिडी वाले LPG सिलेंडरों की संख्या में बड़ा बदलाव किया है। अब लाभार्थियों को हर साल केवल चार सब्सिडी वाले 14.2 किलोग्राम LPG सिलेंडर मिलेंगे। इस फैसले के बाद योजना से जुड़े करोड़ों परिवारों पर असर पड़ने की संभावना है।

प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना की शुरुआत वर्ष 2016 में की गई थी, जिसका उद्देश्य गरीब परिवारों की महिलाओं को स्वच्छ ईंधन उपलब्ध कराना था। शुरुआत में इस योजना के तहत लाभार्थियों को सालाना 12 सिलेंडर सब्सिडी दर पर उपलब्ध कराए जाते थे। बाद में इसे घटाकर नौ सिलेंडर कर दिया गया था। अब इसे और कम करते हुए चार सिलेंडर प्रति वर्ष कर दिया गया है।

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव प्रवीण मल खनूजा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि यह बदलाव लाभार्थियों की औसत वार्षिक खपत को ध्यान में रखते हुए किया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य योजना को अधिक व्यावहारिक और उपयोग आधारित बनाना है, ताकि संसाधनों का सही तरीके से उपयोग हो सके।

नई व्यवस्था के तहत अब प्रत्येक पात्र लाभार्थी को सीमित संख्या में LPG सिलेंडर पर 300 रुपये की सब्सिडी दी जाएगी। यह सब्सिडी सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से भेजी जाएगी।

अधिकारियों के अनुसार, हाल के वर्षों में LPG की कीमतों में बदलाव और वितरण लागत को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है। सरकार का मानना है कि वास्तविक उपयोग के आधार पर सब्सिडी प्रणाली को संतुलित करना आवश्यक है।

उज्ज्वला योजना ने पिछले वर्षों में ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों में स्वच्छ ईंधन के उपयोग को बढ़ावा दिया है। हालांकि, सब्सिडी सिलेंडरों की संख्या में लगातार कटौती के बाद अब लाभार्थियों के बीच खर्च को लेकर चिंता भी जताई जा रही है।

सरकारी सूत्रों का कहना है कि योजना का मुख्य उद्देश्य अब भी गरीब परिवारों को स्वच्छ ईंधन उपलब्ध कराना ही है, लेकिन इसे वित्तीय रूप से अधिक टिकाऊ बनाने के लिए समय-समय पर बदलाव किए जा रहे हैं।

इस नए फैसले के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इसका ग्रामीण और गरीब परिवारों की रसोई खर्च पर क्या प्रभाव पड़ता है।

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