- Home
- /
- दिल्ली-एनसीआर
- /
- भारतीय वायु सेना में...
दिल्ली-एनसीआर
भारतीय वायु सेना में बड़ा बदलाव अब फोकस समग्र क्षमता पर
Ratna Netam
7 Oct 2026 8:51 PM IST

x
नई दिल्ली। भारतीय वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने बुधवार को कहा कि भारतीय वायु सेना अब केवल अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर केंद्रित सोच से आगे बढ़कर क्षमता-केंद्रित दृष्टिकोण अपना रही है। उन्होंने कहा कि अलग-अलग प्रणालियों के बेहतर एकीकरण और संयुक्त क्षमता विकसित करने की दिशा में जो बदलाव आज दिखाई दे रहे हैं, वे कई साल पहले शुरू की गई प्रक्रियाओं का परिणाम हैं।
एयर चीफ मार्शल सिंह ने सुब्रतो पार्क स्थित एयर फोर्स ऑडिटोरियम में भारतीय वायु सेना की 94वीं वर्षगांठ से पहले आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ये बातें कहीं। उन्होंने वायु सेना के आधुनिकीकरण, क्षमता निर्माण और बदलती सैन्य जरूरतों के अनुरूप हो रहे बदलावों पर विस्तार से चर्चा की।
सिंह ने कहा कि भारतीय वायु सेना ने पिछले कुछ वर्षों में अपनी सोच और कार्यप्रणाली में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। पहले ध्यान किसी खास विमान, हथियार प्रणाली या प्लेटफॉर्म की क्षमता पर अधिक रहता था, लेकिन अब जोर इस बात पर है कि अलग-अलग संसाधनों को एक साथ जोड़कर पूरी सैन्य क्षमता को किस तरह अधिक प्रभावी बनाया जाए।
उन्होंने कहा कि आधुनिक युद्धक्षेत्र में केवल अत्याधुनिक लड़ाकू विमान या हथियार प्रणाली होना पर्याप्त नहीं है। जरूरत इस बात की है कि सेंसर, हथियार, कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम, नेटवर्क और अलग-अलग प्लेटफॉर्म आपस में बेहतर तालमेल के साथ काम करें। इसी वजह से एकीकरण को भारतीय वायु सेना की भविष्य की रणनीति में अधिक महत्व दिया जा रहा है।
एयर चीफ मार्शल एपी सिंह के मुताबिक, वायु सेना इस दिशा में पहले ही कई कदम उठा चुकी है। उन्होंने कहा कि हाल के ऑपरेशनल अनुभवों से भी यह संकेत मिला है कि IAF जिस रास्ते पर आगे बढ़ रही है, वह सही है। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि बदलाव और आधुनिकीकरण की रफ्तार को और तेज करने की गुंजाइश मौजूद है।
उन्होंने कहा कि सैन्य क्षमता विकसित करना एक लगातार चलने वाली प्रक्रिया है। नई तकनीक आने, खतरे की प्रकृति बदलने और युद्ध के तौर-तरीकों में बदलाव के साथ वायु सेना को भी अपनी जरूरतों और रणनीति की समीक्षा करनी होती है।
IAF प्रमुख ने कहा कि प्लेटफॉर्म-केंद्रित दृष्टिकोण में आमतौर पर यह देखा जाता है कि किसी विशेष विमान, मिसाइल या सिस्टम की क्षमता क्या है। इसके विपरीत क्षमता-केंद्रित दृष्टिकोण का मकसद यह तय करना है कि किसी मिशन को पूरा करने के लिए किन-किन संसाधनों को एक साथ इस्तेमाल किया जाए और उनका अधिकतम प्रभाव कैसे हासिल किया जाए।
उन्होंने एकीकरण को भविष्य की सैन्य तैयारियों का अहम आधार बताया। विभिन्न प्रणालियों और इकाइयों के बीच सूचनाओं का तेजी से आदान-प्रदान, लक्ष्य की पहचान, निर्णय लेने की प्रक्रिया और जरूरत के अनुसार हथियारों के इस्तेमाल की क्षमता आधुनिक सैन्य अभियानों में निर्णायक हो सकती है।
सिंह ने कहा कि इस दिशा में भारतीय वायु सेना का काम अचानक शुरू नहीं हुआ है। इसकी नींव कई वर्ष पहले रखी गई थी और समय के साथ इससे जुड़ी प्रक्रियाओं को मजबूत किया गया है। वर्तमान बदलाव उसी दीर्घकालिक रणनीति का परिणाम हैं।
वायु सेना प्रमुख ने आधुनिकीकरण से जुड़े कार्यक्रमों का उल्लेख करते हुए संकेत दिया कि IAF भविष्य की चुनौतियों को ध्यान में रखकर अपनी क्षमताओं का विस्तार कर रही है। इनमें नई तकनीक, बेहतर नेटवर्किंग, निगरानी, संचार और परिचालन समन्वय जैसे पहलू शामिल हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी आधुनिक वायु सेना के लिए तकनीक बेहद महत्वपूर्ण है, लेकिन तकनीक को प्रभावी बनाने के लिए प्रशिक्षित मानव संसाधन और स्पष्ट परिचालन रणनीति भी उतनी ही आवश्यक है। अलग-अलग प्लेटफॉर्म को एक ही ऑपरेशनल नेटवर्क में जोड़कर उनके बेहतर इस्तेमाल पर जोर दिया जा रहा है।
एयर चीफ मार्शल सिंह ने हाल के ऑपरेशनल अनुभवों का जिक्र करते हुए कहा कि इनसे वायु सेना को अपनी रणनीति और तैयारियों की वास्तविक परिस्थितियों में समीक्षा करने का अवसर मिला है। उनके मुताबिक, इन अनुभवों ने इस बात को मजबूत किया है कि क्षमता-केंद्रित और एकीकृत दृष्टिकोण अपनाना सही दिशा है।
भारतीय वायु सेना की 94वीं वर्षगांठ से पहले आयोजित इस कार्यक्रम में भविष्य की सैन्य चुनौतियों और IAF की तैयारियों का मुद्दा प्रमुख रहा। वायु सेना स्थापना दिवस हर साल 8 अक्टूबर को मनाया जाता है। इस अवसर पर IAF अपने इतिहास, उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं को भी सामने रखती है।
भारतीय वायु सेना बदलते सुरक्षा माहौल को देखते हुए अपनी परिचालन क्षमताओं में लगातार बदलाव कर रही है। आधुनिक युद्ध में साइबर, स्पेस, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर, ड्रोन, लंबी दूरी के हथियार और नेटवर्क आधारित ऑपरेशन का महत्व तेजी से बढ़ा है। ऐसे में अलग-अलग क्षमताओं के बीच बेहतर तालमेल की आवश्यकता भी बढ़ रही है।
सिंह ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि वायु सेना की रणनीति केवल नए प्लेटफॉर्म हासिल करने तक सीमित नहीं है। असली लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि मौजूदा और भविष्य के संसाधन एक-दूसरे के साथ मिलकर अधिक प्रभावी तरीके से काम करें।
उन्होंने कहा कि भारतीय वायु सेना सही दिशा में आगे बढ़ रही है, लेकिन इस परिवर्तन की गति को और बेहतर किया जा सकता है। उनका यह बयान इस बात की ओर संकेत करता है कि आने वाले समय में क्षमता निर्माण, एकीकरण और आधुनिकीकरण से जुड़ी प्रक्रियाओं को और गति दी जा सकती है।
वायु सेना प्रमुख ने इस बात पर भी जोर दिया कि भविष्य के युद्धों में तेजी से निर्णय लेना और वास्तविक समय में जानकारी साझा करना महत्वपूर्ण होगा। ऐसे माहौल में अलग-अलग सिस्टम का आपस में जुड़ा होना सैन्य अभियानों की सफलता में बड़ी भूमिका निभाएगा।
IAF का क्षमता-केंद्रित दृष्टिकोण इसी आवश्यकता को ध्यान में रखकर विकसित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य यह देखना है कि किसी ऑपरेशन में उपलब्ध सभी संसाधनों का संयुक्त उपयोग करके बेहतर परिणाम कैसे हासिल किए जाएं।
एयर चीफ मार्शल एपी सिंह का बयान ऐसे समय आया है जब भारतीय वायु सेना अपनी 94वीं वर्षगांठ मना रही है और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप अपनी युद्ध क्षमता को मजबूत करने पर काम कर रही है।
कुल मिलाकर, IAF प्रमुख ने यह संदेश दिया कि भारतीय वायु सेना का आधुनिकीकरण केवल नए विमानों या हथियारों की खरीद तक सीमित नहीं है। इसके बजाय फोकस अब संपूर्ण क्षमता, एकीकृत संचालन और विभिन्न सैन्य संसाधनों को एक साझा नेटवर्क के तहत प्रभावी ढंग से इस्तेमाल करने पर है। सिंह के मुताबिक, हाल के परिचालन अनुभवों ने इस दिशा को सही साबित किया है, हालांकि उन्होंने यह भी माना कि आगे बढ़ने की रफ्तार को और तेज किया जा सकता है।
Next Story





