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दिल्ली में अवैध निर्माण की बड़ी चुनौती, MCD के सामने 80 हजार शिकायतें लंबित
nidhi
7 Oct 2026 9:20 AM IST

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सत्य निकेतन हादसे के बाद तेज हुई कार्रवाई
नई दिल्ली: सत्य निकेतन में 6 सितंबर 2026 को इमारत गिरने के बाद दिल्ली नगर निगम यानी MCD ने अवैध और खतरनाक निर्माण के खिलाफ कार्रवाई तेज की, लेकिन एक महीने बाद सामने आए आंकड़े इसकी रफ्तार पर सवाल खड़े कर रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, हादसे के बाद एक माह में MCD ने 774 संपत्तियों पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की है। दूसरी ओर, अवैध निर्माण से जुड़ी करीब 80 हजार शिकायतें अभी भी ऐसी हैं, जिन पर कार्रवाई बाकी है।
अगर कार्रवाई की यही औसत रफ्तार बनी रहती है तो 80 हजार संपत्तियों पर ध्वस्तीकरण पूरा करने में करीब 103 महीने यानी लगभग 8.6 साल लग सकते हैं। यह गणना इस आधार पर है कि हर महीने करीब 774 संपत्तियों पर कार्रवाई जारी रहे और इस दौरान कोई नई शिकायत न जुड़े। स्पेशल टास्क फोर्स के आंकड़ों के अनुसार, अवैध निर्माण और अतिक्रमण से जुड़ी कुल 2,37,559 शिकायतें प्राप्त हुई थीं। इनमें से 1,54,750 शिकायतों को कार्रवाई योग्य नहीं पाया गया। करीब 82 हजार शिकायतें कार्रवाई योग्य थीं। इनमें 735 मामलों में अदालत की रोक या कानूनी विवाद है, जबकि 6,616 संपत्तियों को गिराया जा चुका है और 3,332 संपत्तियां सील हैं।
सत्य निकेतन हादसे के बाद MCD ने दिल्ली हाई कोर्ट को बताया था कि शुरुआती कार्रवाई में 543 संपत्तियों को ध्वस्त किया गया, 178 संपत्तियों को सील किया गया और 354 कारण बताओ नोटिस जारी किए गए। निगम ने पांच अधिकारियों को निलंबित करने की जानकारी भी अदालत को दी थी। सत्य निकेतन में पांच मंजिला पीजी इमारत गिरने से सात लोगों की मौत हुई थी। हादसे के बाद आसपास की इमारतों की संरचनात्मक सुरक्षा और बिना अनुमति किए जा रहे निर्माण को लेकर गंभीर सवाल उठे। MCD ने दुर्घटनास्थल से सटी एक असुरक्षित इमारत को भी नियंत्रित तरीके से गिराने की कार्रवाई शुरू की थी।
अब सबसे बड़ी चुनौती यह है कि दिल्ली में नए अवैध निर्माण लगातार सामने आ रहे हैं। ऐसे में सिर्फ पुराने मामलों पर कार्रवाई करना पर्याप्त नहीं होगा। यदि हर महीने नए मामले जुड़ते रहे तो लंबित मामलों का आंकड़ा कम होने के बजाय बढ़ भी सकता है। खास तौर पर अनधिकृत कॉलोनियों और घनी आबादी वाले इलाकों में अतिरिक्त मंजिलें बनाने, भवन नक्शे से अलग निर्माण करने और बिना तकनीकी जांच के पुराने भवनों में बदलाव की शिकायतें सामने आती रही हैं। ऐसे निर्माण हादसों का खतरा बढ़ा सकते हैं।
MCD के सामने इसलिए दोहरी चुनौती है। एक तरफ वर्षों से लंबित अवैध निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई करनी है और दूसरी तरफ नए अवैध निर्माणों को शुरुआती चरण में ही रोकना होगा। इसके लिए स्थानीय स्तर पर नियमित निरीक्षण, भवन विभाग की जवाबदेही और शिकायतों के तेजी से निस्तारण की आवश्यकता होगी। सत्य निकेतन हादसे के बाद पीजी इमारतों की सुरक्षा भी बड़ा मुद्दा बन गई है। दिल्ली हाई कोर्ट को दिए गए आंकड़ों के मुताबिक राजधानी में 2,453 पीजी संचालित हो रहे हैं, जिनमें 32 हजार से अधिक कमरे और करीब 50 हजार लोग रहते हैं। छात्रों और स्थानीय निवासियों की ओर से अब केवल अवैध निर्माण गिराने के बजाय भवनों की संरचनात्मक सुरक्षा की व्यवस्थित जांच की मांग भी उठ रही है। सत्य निकेतन हादसे के एक महीने बाद भी इलाके में पीजी भवनों की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है।
ऐसे में MCD के लिए केवल ध्वस्तीकरण की संख्या बढ़ाना ही समाधान नहीं होगा। समयबद्ध सर्वे, खतरनाक इमारतों की पहचान, जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई और अवैध निर्माण को बनने से पहले रोकने की व्यवस्था पर भी जोर देना होगा। फिलहाल एक महीने में 774 संपत्तियों पर हुई कार्रवाई यह दिखाती है कि अभियान चल रहा है, लेकिन 80 हजार के आसपास लंबित मामलों के मुकाबले यह संख्या काफी कम है। आने वाले समय में MCD कार्रवाई की रफ्तार किस तरह बढ़ाती है और नए अवैध निर्माण को कैसे रोकती है, इस पर निगाह रहेगी।
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