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गंगा की सफाई और नदी संरक्षण पर बड़ा मंथन सीआर पाटिल ने की अहम बैठक

Ratna Netam
8 Oct 2026 2:12 PM IST
गंगा की सफाई और नदी संरक्षण पर बड़ा मंथन सीआर पाटिल ने की अहम बैठक
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नई दिल्ली। देश की नदियों के संरक्षण, प्रदूषण नियंत्रण और समग्र कायाकल्प की दिशा में केंद्र सरकार ने अपने प्रयासों को और मजबूत करने पर जोर दिया है। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल की अध्यक्षता में नई दिल्ली में एम्पावर्ड टास्क फोर्स (ETF) की 20वीं बैठक आयोजित की गई। बैठक में केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों, राज्य सरकारों और राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG) के वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया। इस दौरान नमामि गंगे कार्यक्रम की प्रगति की समीक्षा की गई और नदियों को स्वच्छ बनाने तथा उनके पारिस्थितिक संतुलन को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण उपायों पर चर्चा हुई।मंत्रालय की ओर से साझा जानकारी के अनुसार, बैठक का मुख्य उद्देश्य नदी कायाकल्प से संबंधित परियोजनाओं को गति देना और जल संसाधनों के वैज्ञानिक एवं टिकाऊ प्रबंधन को बढ़ावा देना रहा। इस दौरान सीवेज प्रबंधन, उपचारित अपशिष्ट जल का सुरक्षित पुनः उपयोग, भूजल संरक्षण, पारिस्थितिक बहाली और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय जैसे विषयों पर विशेष ध्यान दिया गया।
नमामि गंगे कार्यक्रम की प्रगति की समीक्षा
बैठक में नमामि गंगे कार्यक्रम के अंतर्गत चल रहे कार्यों और नदी संरक्षण के लिए अपनाई जा रही व्यवस्थाओं की समीक्षा की गई। यह कार्यक्रम गंगा नदी और उससे जुड़े नदी तंत्र में प्रदूषण कम करने, जल गुणवत्ता सुधारने तथा नदी के प्राकृतिक स्वरूप को संरक्षित रखने पर केंद्रित है।जल शक्ति मंत्रालय के अंतर्गत संचालित राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन इन प्रयासों के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके माध्यम से सीवेज उपचार, प्रदूषण नियंत्रण, नदी तट प्रबंधन और पारिस्थितिक संरक्षण से संबंधित कार्य किए जाते हैं।इससे पहले 2 जुलाई 2026 को आयोजित टास्क फोर्स की 19वीं बैठक में भी परियोजनाओं के तेजी से क्रियान्वयन, उपचारित जल के पुनः उपयोग और भूजल प्रबंधन को मजबूत करने पर जोर दिया गया था।
सीवेज इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने पर जोर
बैठक में नदियों के प्रदूषण को रोकने के लिए सीवेज इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत बनाने का विषय प्रमुखता से सामने आया। शहरी क्षेत्रों से निकलने वाला अनुपचारित सीवेज नदी प्रदूषण के महत्वपूर्ण कारणों में शामिल है। ऐसे में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और संबंधित बुनियादी ढांचे का प्रभावी संचालन नदी संरक्षण के लिए जरूरी माना जाता है।बैठक में बेहतर सीवेज प्रबंधन को नदी कायाकल्प की व्यापक रणनीति का हिस्सा बताया गया। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि गंदे पानी का उचित उपचार हो और नदियों पर प्रदूषण का दबाव कम किया जा सके।इसके साथ ही सीवेज प्रबंधन से संबंधित व्यवस्थाओं को वैज्ञानिक तरीकों से संचालित करने की जरूरत भी चर्चा का विषय रही।
ट्रीट किए गए वेस्टवॉटर के सुरक्षित पुनः उपयोग पर चर्चा
बैठक का एक महत्वपूर्ण विषय उपचारित अपशिष्ट जल का सुरक्षित पुनः उपयोग रहा। जल संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल के लिए यह पहल महत्वपूर्ण मानी जाती है।सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट में उपचारित पानी का निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुसार दोबारा उपयोग करने से ताजे पानी की मांग को कुछ हद तक कम किया जा सकता है।उपचारित जल का पुनः उपयोग करते समय पर्यावरणीय सुरक्षा और स्वास्थ्य संबंधी मानकों का पालन करना आवश्यक होता है। बैठक में सुरक्षित पुनः उपयोग को नदी कायाकल्प के प्रमुख उपायों में शामिल किया गया।
भूजल प्रबंधन और वैज्ञानिक जल संरक्षण पर ध्यान
एम्पावर्ड टास्क फोर्स की बैठक में भूजल प्रबंधन को भी विशेष महत्व दिया गया। नदियों और भूजल के बीच प्राकृतिक संबंध होता है। कई क्षेत्रों में भूजल का स्तर नदी प्रवाह और आसपास के पारिस्थितिक तंत्र को प्रभावित कर सकता है।ऐसी स्थिति में जल संसाधनों के वैज्ञानिक प्रबंधन की जरूरत बढ़ जाती है। बैठक में भूजल प्रबंधन को नदी संरक्षण के व्यापक प्रयासों से जोड़कर देखा गया।वैज्ञानिक जल प्रबंधन के अंतर्गत उपलब्ध जल संसाधनों का आकलन, उनके उपयोग की योजना और दीर्घकालिक संरक्षण जैसे पहलू महत्वपूर्ण होते हैं। इन उपायों का उद्देश्य जल संसाधनों के उपयोग और संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करना है।
प्रकृति आधारित समाधान और पारिस्थितिक बहाली पर चर्चा
बैठक में नदी कायाकल्प के लिए प्रकृति आधारित समाधानों को भी महत्वपूर्ण विषय के रूप में शामिल किया गया। ऐसे उपाय प्राकृतिक प्रक्रियाओं और पारिस्थितिक तंत्र की सहायता से पर्यावरणीय समस्याओं का समाधान करने पर केंद्रित होते हैं।नदी के आसपास की प्राकृतिक वनस्पति, आर्द्रभूमि और अन्य पारिस्थितिक घटक जल संरक्षण तथा जैव विविधता बनाए रखने में भूमिका निभाते हैं।इसके साथ ही पारिस्थितिक बहाली पर भी चर्चा की गई। नदी संरक्षण का उद्देश्य केवल जल प्रदूषण कम करना नहीं, बल्कि नदी से जुड़े प्राकृतिक तंत्र की स्थिति को बेहतर बनाना भी है।नमामि गंगे कार्यक्रम के अंतर्गत प्रकृति आधारित उपायों को बढ़ावा देने के प्रयास पहले से चल रहे हैं। राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन ने जुलाई 2026 में इस क्षेत्र में पायलट परियोजनाओं और प्रशिक्षण कार्यक्रमों की जानकारी भी दी थी।
केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय पर जोर
नदी कायाकल्प से जुड़ी योजनाओं के सफल संचालन में विभिन्न मंत्रालयों, राज्य सरकारों और संबंधित संस्थाओं की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।बैठक में हितधारकों के बीच बेहतर समन्वय को प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल किया गया। नदी संरक्षण से जुड़े कार्यों में अनेक विभागों की भागीदारी होने के कारण नियमित संवाद और आपसी सहयोग आवश्यक होता है।इसके माध्यम से परियोजनाओं के क्रियान्वयन, निगरानी और विभिन्न स्तरों पर सामने आने वाली समस्याओं के समाधान में मदद मिल सकती है।
बैठक में शामिल हुए वरिष्ठ अधिकारी
केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में जल शक्ति राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी भी उपस्थित रहे।इसके अलावा जल संसाधन विभाग की सचिव अर्चना वर्मा, पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के सचिव अशोक के.के. मीना, राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के महानिदेशक राजीव कुमार मित्तल और जल संसाधन विभाग के संयुक्त सचिव एवं वित्तीय सलाहकार गौरव मसलदान सहित विभिन्न मंत्रालयों तथा संबंधित राज्यों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।
नदी संरक्षण के प्रयासों को आगे बढ़ाने पर जोर
बैठक में सामने आए प्रमुख विषयों से स्पष्ट है कि नदी कायाकल्प को केवल सफाई अभियान तक सीमित रखने के बजाय जल प्रबंधन, प्रदूषण नियंत्रण, पारिस्थितिक संरक्षण और संस्थागत समन्वय के साथ आगे बढ़ाने पर ध्यान दिया जा रहा है।सरकार की इस पहल में नदियों की स्वच्छता के साथ-साथ उनके प्राकृतिक स्वरूप और जल संसाधनों के दीर्घकालिक संरक्षण को भी महत्व दिया गया है।हालांकि, बैठक में किसी नई परियोजना के लिए स्वीकृत धनराशि या कार्य पूरा करने की नई समयसीमा का विवरण उपलब्ध नहीं कराया गया है। फिलहाल चर्चा का केंद्र नमामि गंगे कार्यक्रम की प्रगति और नदी कायाकल्प को अधिक प्रभावी बनाने के उपाय रहे।
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