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भूपेश बघेल का बड़ा आरोप ज्ञानेश कुमार हैं सिर्फ मोहरा

Ratna Netam
3 Oct 2026 2:39 PM IST
भूपेश बघेल का बड़ा आरोप ज्ञानेश कुमार हैं सिर्फ मोहरा
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रायपुर/नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता भूपेश बघेल ने शनिवार को मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को लेकर बड़ा राजनीतिक आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि कथित “वोट चोरी” के पूरे मामले में ज्ञानेश कुमार केवल एक “मोहरा” हैं और इसका वास्तविक राजनीतिक फायदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को मिल रहा है। बघेल ने कहा कि कांग्रेस अब चुनावी गड़बड़ियों और मतदाता सूची से जुड़े अपने आरोपों की लड़ाई सीधे जनता के बीच ले जाएगी।पत्रकारों से बातचीत में बघेल ने कहा कि कांग्रेस नेतृत्व ने इस मुद्दे पर अपनी रणनीति तय कर ली है। उनके मुताबिक, कांग्रेस कार्य समिति (CWC) की बैठक में पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, सोनिया गांधी और राहुल गांधी समेत शीर्ष नेताओं की मौजूदगी में चुनाव प्रक्रिया से जुड़े आरोपों पर आगे की लड़ाई का फैसला किया गया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस तब तक अपना अभियान जारी रखेगी, जब तक कथित “वोट चोरी” बंद नहीं होती।
ज्ञानेश कुमार पर सीधे लगाए आरोप
बघेल ने मुख्य चुनाव आयुक्त के बारे में कहा कि वह इस पूरे घटनाक्रम में केवल एक माध्यम या “मोहरा” हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके जरिए मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियां की जा रही हैं। बघेल के अनुसार, इन गतिविधियों का राजनीतिक लाभ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को मिल रहा है।हालांकि, ये बघेल और कांग्रेस की ओर से लगाए गए राजनीतिक आरोप हैं। चुनाव आयोग ने SIR और मतदाता सूची को लेकर विपक्ष के कई आरोपों को खारिज किया है। आयोग का कहना रहा है कि मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण निर्धारित प्रक्रियाओं के तहत किया जा रहा है और इस संबंध में उठाए गए सवालों पर संस्थागत स्तर पर स्पष्टीकरण दिए गए हैं।
CWC में तय हुई आगे की रणनीति
बघेल ने कहा कि कांग्रेस की लड़ाई केवल चुनाव आयोग के किसी एक अधिकारी के खिलाफ नहीं है। उनके मुताबिक, पार्टी का व्यापक राजनीतिक उद्देश्य मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया को लेकर उठाए जा रहे सवालों को जनता के सामने रखना है। उन्होंने कहा कि पार्टी का मुख्य राजनीतिक लक्ष्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार को सत्ता से हटाना है।कांग्रेस कार्य समिति की हालिया बैठक में पार्टी ने SIR को लेकर कई मांगें उठाई थीं। इनमें मतदाता सूची में हटाए गए नामों की बहाली, SIR पर रोक और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल शामिल रहे। पार्टी ने CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी की थी।बैठक के बाद कांग्रेस की ओर से राज्य, जिला और बूथ स्तर तक आंदोलन चलाने की बात कही गई थी। पार्टी ने यह भी कहा था कि जिन मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं, उनसे संपर्क कर उनकी शिकायतों को सामने लाया जाएगा।
'वोट चोरी' अभियान को जनता तक ले जाने की तैयारी
कांग्रेस पिछले कुछ समय से “वोट चोरी” के आरोपों को लेकर चुनाव आयोग पर लगातार दबाव बना रही है। राहुल गांधी समेत पार्टी के कई नेताओं ने मतदाता सूचियों में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाया है। कांग्रेस का आरोप है कि SIR के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटने से चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर सवाल खड़े हुए हैं।इसी क्रम में कांग्रेस ने आंदोलन को सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं रखने की बात कही है। पार्टी की रणनीति के तहत प्रदेशों, जिलों और बूथ स्तर पर अभियान चलाने की तैयारी की जा रही है। बघेल ने भी इसी अभियान को जनता तक ले जाने पर जोर दिया।
चुनाव आयोग और विपक्ष आमने-सामने
SIR को लेकर चुनाव आयोग और विपक्षी दलों के बीच टकराव पिछले कुछ सप्ताह में तेज हुआ है। विपक्षी दल आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची में बदलाव को लेकर सवाल उठा रहे हैं। दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने कहा है कि SIR मतदाता सूची को सत्यापित और अद्यतन करने की प्रक्रिया का हिस्सा है।सितंबर के अंत में चुनाव आयोग ने सार्वजनिक रूप से अपने रुख का बचाव करते हुए कहा था कि SIR से संबंधित फैसले आयोग के स्तर पर सर्वसम्मति से लिए गए। आयोग ने अपनी डिजिटल प्रक्रियाओं और मतदाता सूची से संबंधित आपत्तियों पर भी स्पष्टीकरण जारी किया था।वहीं, इस विवाद को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली और SIR को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति बनी है। याचिका में आयोग के भीतर निर्णय लेने की प्रक्रिया और SIR से जुड़े मुद्दों पर सवाल उठाए गए हैं।
कांग्रेस ने प्रधानमंत्री पर भी साधा निशाना
कांग्रेस का ताजा रुख यह संकेत देता है कि पार्टी अब केवल चुनाव आयोग को निशाना बनाने तक सीमित नहीं रहना चाहती। CWC की बैठक में भी पार्टी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की राजनीतिक जवाबदेही का मुद्दा उठाया था। कांग्रेस ने चुनाव आयोग की कथित निष्पक्षता और सरकार के साथ उसके संबंधों को लेकर सवाल उठाए हैं।भूपेश बघेल के बयान से भी यही संदेश सामने आया कि कांग्रेस की राजनीतिक लड़ाई को अब सीधे केंद्र सरकार के नेतृत्व से जोड़कर जनता के बीच ले जाने की तैयारी है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि ज्ञानेश कुमार के खिलाफ उठाए जा रहे सवाल व्यापक राजनीतिक अभियान का हिस्सा हैं और पार्टी का मुख्य उद्देश्य मोदी सरकार को सत्ता से हटाना है।
आरोपों और आधिकारिक जवाब के बीच जारी विवाद
इस पूरे मुद्दे में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि “वोट चोरी” और चुनावी गड़बड़ी से जुड़े आरोप फिलहाल राजनीतिक आरोपों के रूप में सामने आए हैं। कांग्रेस इनके समर्थन में विभिन्न मतदाता सूची और SIR संबंधी मुद्दे उठा रही है, जबकि चुनाव आयोग और सत्तारूढ़ भाजपा ने इन आरोपों को खारिज किया है। भाजपा नेताओं ने कांग्रेस पर संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने और मतदाताओं के बीच भ्रम पैदा करने का आरोप लगाया है।ऐसे में भूपेश बघेल का शनिवार का बयान SIR और चुनाव आयोग को लेकर चल रही राजनीतिक बहस को और तेज करने वाला है। अब आने वाले दिनों में कांग्रेस का जनअभियान किस रूप में आगे बढ़ता है और चुनाव आयोग इन आरोपों पर क्या नए स्पष्टीकरण देता है, इस पर राजनीतिक नजर बनी रहेगी।
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