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मतदान अधिकारों पर छिड़ी जंग, चुनाव आयोग से AAP की अपील
Ratna Netam
4 Nov 2026 2:14 PM IST

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नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर राजनीतिक विवाद लगातार गहराता जा रहा है। आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने चुनाव आयोग (ECI) से दिल्ली में अनुपस्थित या पता नहीं चलने वाले मतदाताओं की श्रेणी में रखे गए करीब 11.73 लाख लोगों के मतदान अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आग्रह किया है। यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब दिल्ली में मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम बाहर होने को लेकर राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने गंभीर चिंताएं जताई हैं। सवाल उठ रहा है कि जिन लोगों को सत्यापन के दौरान अनुपस्थित बताया गया है, क्या उनके नाम मतदाता सूची से हटाने से पहले पर्याप्त जांच और सुनवाई की व्यवस्था की गई है?
दिल्ली में विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम मसौदा मतदाता सूची में शामिल नहीं किए गए थे। साबर इंस्टीट्यूट और वोटर अधिकार मंच के अध्ययन के अनुसार, 11,73,552 मतदाताओं को अनुपस्थित या पता नहीं चलने वाली श्रेणी में रखा गया। इसके अतिरिक्त 31,59,223 लोगों को स्थायी रूप से स्थानांतरित, 2,82,412 को मृत और 1,41,535 को दोहरे पंजीकरण या अन्य स्थान पर पंजीकृत होने की श्रेणी में रखा गया था। इन आंकड़ों ने मतदाता सूची की शुद्धता और वास्तविक मतदाताओं के अधिकारों को लेकर व्यापक बहस छेड़ दी है।आम आदमी पार्टी का कहना है कि मतदाता सूची में संशोधन की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए और किसी भी पात्र नागरिक को मतदान के अधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। पार्टी पहले भी चुनाव आयोग से उन मतदाताओं की विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराने की मांग कर चुकी है, जिनके नाम अनुपस्थित, स्थानांतरित या अन्य श्रेणियों में दर्ज किए गए हैं। पार्टी का तर्क है कि वास्तविक मतदाताओं की पहचान सुनिश्चित करने के लिए राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंटों को भी सत्यापन में सहयोग करने का अवसर मिलना चाहिए।
संजय सिंह की ओर से उठाया गया मुद्दा केवल मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध लोकतांत्रिक व्यवस्था में नागरिकों की भागीदारी से भी है। मतदाता सूची में किसी पात्र व्यक्ति का नाम नहीं होने पर वह चुनाव के दौरान मतदान नहीं कर सकता। ऐसे में राजनीतिक दलों का मानना है कि सूची में संशोधन करते समय विशेष सावधानी बरतना आवश्यक है।दिल्ली में एसआईआर प्रक्रिया के दौरान करीब 47.5 लाख मतदाताओं को मसौदा सूची से बाहर रखा गया था। इनमें वे लोग शामिल थे, जिनके गणना प्रपत्र सत्यापन के दौरान एकत्र नहीं किए जा सके या जिन्हें अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत अथवा दोहरे पंजीकरण जैसी श्रेणियों में रखा गया था। इतनी बड़ी संख्या में नाम बाहर होने के बाद चुनाव आयोग की प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दलों ने सवाल उठाए थे।
इस बीच दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने मतदाता सूची से बाहर रह गए लोगों का दोबारा सत्यापन कराने के लिए विशेष अभियान चलाने का निर्णय लिया है। चुनाव अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे ऐसे मतदाताओं की स्थिति की पुनः जांच करें, ताकि पात्र नागरिकों के नाम सूची में शामिल किए जा सकें। इस कदम को उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिनके नाम मसौदा सूची में नहीं मिल रहे हैं।मतदाता सूची विवाद अब सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंच चुका है। अदालत के समक्ष यह सवाल उठाया गया है कि पहले से पंजीकृत मतदाताओं को दोबारा अपना नाम जुड़वाने के लिए नए मतदाता के रूप में आवेदन करने के लिए बाध्य किया जा सकता है या नहीं। इस संबंध में याचिकाकर्ताओं ने चुनाव आयोग से सरल प्रक्रिया उपलब्ध कराने की मांग की है।
तीन नवंबर को चुनाव आयोग को भेजे गए एक पत्र में याचिकाकर्ताओं ने आग्रह किया कि मतदाता सूची से बाहर रह गए पात्र नागरिकों को अपने नाम दोबारा शामिल कराने का व्यावहारिक अवसर दिया जाए। उन्होंने बूथ स्तर पर सहायता उपलब्ध कराने और संबंधित दस्तावेजों तक लोगों की पहुंच सुनिश्चित करने की भी मांग की।चुनाव आयोग ने तीन नवंबर को स्पष्ट किया कि पहले से पंजीकृत ऐसे मतदाता, जिनके नाम एसआईआर के दौरान मसौदा सूची में नहीं हैं, फॉर्म-6 के माध्यम से नाम शामिल करने का आवेदन दे सकते हैं। आयोग के अनुसार, ऐसा आवेदन करना अपने आप में गलत घोषणा नहीं माना जाएगा। हालांकि, इस प्रक्रिया को लेकर कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर बहस जारी है।
आम आदमी पार्टी ने मतदाता सूची की समीक्षा को लेकर पहले भी चुनाव आयोग के सामने अपनी आपत्तियां रखी हैं। दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज के नेतृत्व में पार्टी के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी से मुलाकात कर स्थानांतरित बताए गए मतदाताओं का विवरण उपलब्ध कराने की मांग की थी। पार्टी का कहना था कि इस जानकारी से वास्तविक स्थिति की जांच करने में मदद मिलेगी और गलत तरीके से नाम हटाए जाने की आशंका कम होगी।विशेषज्ञों के अनुसार, मतदाता सूची का नियमित पुनरीक्षण चुनावी व्यवस्था का आवश्यक हिस्सा है। इसका उद्देश्य मृत मतदाताओं, दोहरे पंजीकरण और स्थायी रूप से स्थानांतरित लोगों के रिकॉर्ड को अद्यतन करना है। हालांकि, इस प्रक्रिया में वास्तविक मतदाताओं के नाम गलती से हटने की आशंका भी रहती है। इसलिए उचित सूचना, सत्यापन और शिकायत निवारण व्यवस्था महत्वपूर्ण मानी जाती है।
दिल्ली में मतदाता सूची का यह विवाद आगामी चुनावों की निष्पक्षता और चुनावी प्रक्रिया पर जनता के भरोसे से भी जुड़ गया है। राजनीतिक दलों की मांग है कि चुनाव आयोग प्रत्येक पात्र नागरिक का नाम सूची में सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी कदम उठाए।फिलहाल दिल्ली में मतदाताओं के दोबारा सत्यापन की प्रक्रिया और सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं। संजय सिंह द्वारा उठाई गई चिंता के बीच सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि अनुपस्थित बताए गए 11.73 लाख मतदाताओं में से कितने वास्तव में पात्र हैं और उनके नाम अंतिम मतदाता सूची में सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।संपादकीय सत्यापन नोट: 11.73 लाख का आंकड़ा प्रकाशित एसआईआर अध्ययन से पुष्ट है। हालांकि, संजय सिंह की इस विशिष्ट मांग का स्वतंत्र आधिकारिक बयान उपलब्ध नहीं हो सका है। प्रकाशन से पहले उनके बयान या पत्र की पुष्टि करना उचित होगा।
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