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बारापुला फेज-3 खुला, दो ज्वाइंट पर बढ़ा दबाव

Kavita2
30 Sept 2026 2:25 PM IST
बारापुला फेज-3 खुला, दो ज्वाइंट पर बढ़ा दबाव
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नई दिल्ली। बारापुला फेज-3 एलिवेटेड कॉरिडोर पर यातायात शुरू होने के बाद सराय काले खां के सामने रिंग रोड पर वाहनों का दबाव कुछ कम हुआ है, लेकिन इसके साथ ही दो नए स्थानों पर ट्रैफिक की समस्या सामने आने लगी है। कॉरिडोर खुलने के पहले ही दिन बारापुला फेज-1 के ज्वाइंट और आश्रम वाले ज्वाइंट पर वाहनों की संख्या बढ़ गई, जिससे कई बार जाम जैसी स्थिति बनी।

बारापुला फेज-3 के शुरू होने से मयूर विहार और पूर्वी दिल्ली की ओर से आने वाले वाहनों को सीधे बारापुला कॉरिडोर से जुड़ने की सुविधा मिली है। इससे सराय काले खां के सामने रिंग रोड पर पुराने दबाव में कमी आई है। पहले बड़ी संख्या में वाहन इसी मार्ग से आगे बढ़ते थे, जिसके कारण पीक ऑवर में लंबा जाम लग जाता था।

हालांकि यातायात के इस नए वितरण का असर बारापुला फेज-1 और आश्रम ज्वाइंट पर दिखाई देने लगा है। फेज-3 से आने वाले वाहनों की संख्या बढ़ने के कारण इन दोनों स्थानों पर अतिरिक्त दबाव बन गया है।

सूर्यघड़ी के पास एक नया बॉटलनेक सामने आया है। मयूर विहार की ओर से बारापुला फेज-3 से आने वाले वाहन यहां बारापुला फेज-1 के ज्वाइंट से जुड़ते हैं। इसके बाद वाहन चालक फेज-1 पर चढ़कर एम्स और दक्षिण दिल्ली की ओर जा सकते हैं।

समस्या यह है कि फेज-3 से आने वाला तेज और लगातार ट्रैफिक जब फेज-1 के पुराने यातायात से जुड़ता है तो यहां वाहनों की गति अचानक धीमी हो जाती है। दो अलग दिशाओं से आने वाले वाहनों के एक ही लेन में मिलने के कारण जाम की स्थिति बन रही है।

पीक ऑवर में यह समस्या और बढ़ सकती है। खासकर सुबह ऑफिस समय और शाम को वापस लौटने वाले वाहनों की संख्या अधिक होने पर सूर्यघड़ी ज्वाइंट पर ट्रैफिक का दबाव बढ़ने की संभावना है।

इसी तरह आश्रम वाले ज्वाइंट पर भी वाहनों की संख्या में वृद्धि देखी गई। बारापुला के जरिए दक्षिण दिल्ली की ओर जाने वाले वाहनों का बड़ा हिस्सा इस इलाके से होकर गुजरता है। फेज-3 के शुरू होने के बाद इस मार्ग पर अतिरिक्त ट्रैफिक पहुंचने से पहले दिन ही वाहन धीमी गति से चलते दिखाई दिए।

बारापुला कॉरिडोर को चरणबद्ध तरीके से विकसित किया गया है। इसका उद्देश्य पूर्वी दिल्ली और दक्षिण दिल्ली के बीच यातायात को तेज और सुगम बनाना है। फेज-3 के शुरू होने से मयूर विहार से बारापुला नेटवर्क तक सीधी कनेक्टिविटी बेहतर हुई है।

इससे उन वाहन चालकों को विशेष लाभ मिल रहा है जिन्हें पहले सराय काले खां और रिंग रोड के जरिए लंबा रास्ता तय करना पड़ता था। अब वे एलिवेटेड कॉरिडोर का उपयोग कर अपेक्षाकृत कम समय में दक्षिण दिल्ली की ओर जा सकते हैं।

रिंग रोड पर दबाव कम होना इस कॉरिडोर की बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है, लेकिन ट्रैफिक विशेषज्ञों के सामने अब नई चुनौती ज्वाइंट प्वाइंट की क्षमता बढ़ाने की है। यदि यहां लेन प्रबंधन और मर्जिंग व्यवस्था बेहतर नहीं की गई तो राहत का बड़ा हिस्सा नए जाम में बदल सकता है।

सूर्यघड़ी ज्वाइंट पर वाहनों का मर्जिंग पैटर्न सबसे बड़ी चुनौती बन रहा है। फेज-3 से आने वाले वाहन अपेक्षाकृत तेज गति में होते हैं, जबकि फेज-1 पर पहले से मौजूद ट्रैफिक के साथ जुड़ते समय उन्हें अचानक गति कम करनी पड़ती है।

ऐसे में लेन बदलने की कोशिश भी जाम को बढ़ा सकती है। यदि कोई वाहन गलत लेन में पहुंच गया तो उसे अंतिम समय में लेन बदलनी पड़ती है, जिससे पीछे आने वाले वाहनों की रफ्तार भी कम हो जाती है।

यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाने के लिए संकेतक बोर्ड, लेन मार्किंग और ट्रैफिक पुलिस की तैनाती महत्वपूर्ण हो सकती है। शुरुआती दिनों में वाहन चालकों को नए मार्ग की पूरी जानकारी नहीं होने के कारण भी जाम बढ़ने की संभावना रहती है।

आश्रम ज्वाइंट पर पहले से ही यातायात का दबाव अधिक रहता है। ऐसे में फेज-3 से जुड़ा अतिरिक्त ट्रैफिक वहां पुराने दबाव में इजाफा कर सकता है। इस क्षेत्र में रिंग रोड, मथुरा रोड और बारापुला के वाहनों का मिलान होता है।

कॉरिडोर खुलने के बाद यातायात विभाग के लिए अब पूरे मार्ग के ट्रैफिक पैटर्न की समीक्षा जरूरी हो गई है। किस समय किस दिशा से सबसे अधिक वाहन पहुंच रहे हैं और कहां वाहनों की गति सबसे ज्यादा कम हो रही है, इसका आकलन कर सुधार किए जा सकते हैं।

पहले दिन सामने आए बॉटलनेक को देखते हुए आने वाले दिनों में ट्रैफिक प्रबंधन में बदलाव की जरूरत पड़ सकती है। इसमें लेन व्यवस्था, संकेतक, बैरिकेडिंग और पुलिसकर्मियों की तैनाती शामिल हो सकती है।

वाहन चालकों के लिए भी शुरुआती दिनों में अतिरिक्त सावधानी जरूरी है। नए कॉरिडोर के ज्वाइंट प्वाइंट पर अचानक लेन बदलने या तेज गति से निकलने की कोशिश से दुर्घटना और जाम दोनों का खतरा बढ़ सकता है।

बारापुला फेज-3 का मुख्य उद्देश्य दिल्ली के व्यस्त मार्गों पर दबाव कम करना और पूर्वी से दक्षिण दिल्ली की यात्रा को आसान बनाना है। सराय काले खां के सामने रिंग रोड पर राहत मिलना इसका सकारात्मक असर है।

हालांकि सूर्यघड़ी और आश्रम ज्वाइंट पर बढ़ा दबाव यह भी दिखाता है कि किसी एक मार्ग पर राहत मिलने के साथ ट्रैफिक का भार दूसरे हिस्सों में स्थानांतरित हो सकता है।

फिलहाल पहले दिन के अनुभव के आधार पर बारापुला फेज-3 से सफर करने वाले वाहन चालकों को सराय काले खां पर राहत मिली है, लेकिन सूर्यघड़ी के पास फेज-1 ज्वाइंट और आश्रम क्षेत्र में नए ट्रैफिक दबाव ने प्रशासन के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है।

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