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Bangladesh's का बड़ा फैसला, भारत भेजे गए पत्रकार की नियुक्ति पर उठे सवाल

Ratna Netam
23 July 2026 5:36 PM IST
Bangladeshs का बड़ा फैसला, भारत भेजे गए पत्रकार की नियुक्ति पर उठे सवाल
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नई दिल्ली : बांग्लादेश सरकार की ओर से भारत में मीडिया संबंधी महत्वपूर्ण पदों पर की गई दो पत्रकारों की नियुक्तियों को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि जिन दो पत्रकारों को भारत में तैनात किया जा रहा है, उनके पुराने सोशल मीडिया पोस्ट्स में भारत विरोधी विचार व्यक्त किए गए थे। इस मामले ने भारत और बांग्लादेश के बीच पहले से ही संवेदनशील संबंधों के बीच नई चर्चा शुरू कर दी है।

बांग्लादेश सरकार ने वरिष्ठ पत्रकार मोहम्मद सैदुर रहमान को नई दिल्ली स्थित बांग्लादेश हाई कमीशन में मिनिस्टर (प्रेस) के पद पर नियुक्त किया है। वहीं टीवी पत्रकार उम्मे मारूफा को कोलकाता स्थित बांग्लादेश डिप्टी हाई कमीशन में फर्स्ट सेक्रेटरी (प्रेस) पद के लिए नामित किया गया है। दोनों नियुक्तियां बांग्लादेश के लोक प्रशासन मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के तहत की गई हैं।

मोहम्मद सैदुर रहमान बंगाली दैनिक समाचार पत्र ‘इत्तेफाक’ से जुड़े वरिष्ठ पत्रकार हैं। उन्होंने ढाका विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन और जर्नलिज्म में स्नातक और स्नातकोत्तर की पढ़ाई की है। उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत ‘दैनिक डिंकल’ से की थी। जुलाई 2024 में हुए छात्र आंदोलन के बाद उन्हें ‘इत्तेफाक’ में राजनीति और चुनाव संपादक की जिम्मेदारी दी गई थी।

रहमान ढाका विश्वविद्यालय जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन के पूर्व महासचिव और रिपोर्टर्स फोरम फॉर इलेक्शन एंड डेमोक्रेसी के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। बांग्लादेश सरकार ने उन्हें एक साल की अवधि के लिए नई दिल्ली में प्रेस मिनिस्टर नियुक्त किया है। नियुक्ति आदेश में यह भी कहा गया है कि पदभार संभालने से पहले उन्हें अपने सभी पेशेवर दायित्वों, व्यापारिक हितों और अन्य संगठनों से जुड़े पदों को छोड़ना होगा।

वहीं उम्मे मारूफा न्यूज24 टीवी चैनल की स्पेशल रिपोर्टर हैं। उन्हें कोलकाता स्थित बांग्लादेश डिप्टी हाई कमीशन में प्रेस संबंधी जिम्मेदारी दी जा रही है।

इन नियुक्तियों को लेकर विवाद का मुख्य कारण दोनों पत्रकारों के पुराने सोशल मीडिया पोस्ट बताए जा रहे हैं। कुछ पोस्ट्स को भारत विरोधी विचारों से जोड़कर देखा जा रहा है। विशेष रूप से मोहम्मद सैदुर रहमान के कुछ पुराने फेसबुक पोस्ट्स चर्चा में हैं, जिनमें उन्होंने 1971 के मुक्ति संग्राम और भारत की भूमिका को लेकर अपनी राय व्यक्त की थी।

बताया जा रहा है कि दिसंबर 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 1971 के विजय दिवस और भारतीय सैनिकों के बलिदान का जिक्र किए जाने के बाद रहमान ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने लिखा था कि एक बांग्लादेशी के तौर पर उनके लिए 1971 आजादी की लड़ाई थी। साथ ही उन्होंने भारत की भूमिका को लेकर सवाल उठाए थे।

रहमान के कुछ अन्य पुराने पोस्ट्स में बांग्लादेश की राजनीति, शेख हसीना सरकार, 2009 के बीडीआर विद्रोह और कुछ ऐतिहासिक घटनाओं को लेकर भी टिप्पणियां की गई थीं। इन्हीं पोस्ट्स को लेकर भारत में उनकी नियुक्ति पर सवाल उठाए जा रहे हैं।

हालांकि, बांग्लादेश सरकार ने इन नियुक्तियों को प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा बताया है। दोनों पत्रकारों की नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब भारत और बांग्लादेश के रिश्ते राजनीतिक बदलावों के दौर से गुजर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंधों में मीडिया प्रतिनिधियों की भूमिका काफी महत्वपूर्ण होती है, इसलिए ऐसी नियुक्तियों पर विशेष नजर रहती है।

फिलहाल विवाद के बावजूद दोनों पत्रकारों की नियुक्ति प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि भारत में उनकी भूमिका और दोनों देशों के बीच मीडिया संवाद पर इसका क्या प्रभाव पड़ता है।

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