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घर-घर राशन योजना पर रोक, दिल्ली HC ने कहा- केजरीवाल सरकार नहीं कर सकती केंद्र के राशन का इस्तेमाल

Kunti Dhruw
19 May 2022 7:05 PM GMT
घर-घर राशन योजना पर रोक, दिल्ली HC ने कहा- केजरीवाल सरकार नहीं कर सकती केंद्र के राशन का इस्तेमाल
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उच्च न्यायालय ने गुरुवार को दिल्ली सरकार की बहुर्चित मौजूदा ‘घर-घर राशन वितरण योजना’ (मुख्यमंत्री घर घर राशन योजना) को रद्द कर दिया है।

दिल्ली: उच्च न्यायालय ने गुरुवार को दिल्ली सरकार की बहुर्चित मौजूदा 'घर-घर राशन वितरण योजना' (मुख्यमंत्री घर घर राशन योजना) को रद्द कर दिया है। हालांकि न्यायालय ने कहा दिल्ली सरकार 'नये सिरे से राशन की होम डिलीवरी की योजना शुरू करने के लिए स्वतंत्र है, लेकिन इसके लिए वह केंद्र सरकार द्वारा मुहैया कराए गए आनाज का इस्तेमाल नहीं कर सकती है।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी और न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की पीठ ने राजधानी के राशन डीलरों की ओर से सरकार की घर-घर राशन वितरण योजना को चुनौती देने वाली याचिकाओं का निपटारा करते हुए यह फैसला दिया है। पीठ ने सरकार राशन डीलर्स संघ और दिल्ली राशन डीलर्स यूनियन की याचिकाओं पर सभी पक्षों को सुनने के बाद 10 जनवरी, 2022 को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।
पीठ ने दिल्ली सरकार की मौजूदा घर-घर राशन वितरण योजना को रद्द करते हुए कहा कि 'वह इसके लिए केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून के तहत मुहैया कराए गए आनाज का इस्तेमाल नहीं कर सकती। अदालत ने कहा योजना के लिए केंद्र के अनाज का उपयोग नहीं किया जा सकता है। पीठ ने कहा कि दिल्ली सरकार ने 'राशन की होम डिलीवरी की योजना के लिए उपराज्यपाल की सहमति नहीं ली थी। केंद्र व दिल्ली सरकार के आपसी विवादों के चलते घर-घर राशन वितरण योजना पर रोक लगी हुई थी।
दिल्ली सरकार की यह योजना 25 मार्च, 2021 से ही शुरू होने वाली थी लेकिन केंद्रीय खाद्य और उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने 19 मार्च को इस पर आपत्ति जताई थी। मंत्रालय ने कहा कि इसमें 'मुख्यमंत्री' शब्द का इस्तेमाल शामिल नहीं किया जा सकता। मंत्रालय ने इसके अलावा कहा था कि दिल्ली सरकार की यह योजना राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) के तहत आवंटित खाद्यान्न का वितरण प्रणाली में किसी भी बदलाव के लिए कानून में संशोधन की जरूरत होगी जो सिर्फ संसद द्वारा ही किया जा सकता है।
उच्च न्यायालय में दिल्ली सरकार ने अपने इस योजना का बचाव करते हुए कहा कि यह गरीबों के लिए है जिन्हें उचित मूल्य की दुकान (एफपीएस) मालिकों आनाज देने में परेशान करते हैं। दिल्ली सरकार ने यह भी कहा था कि 'यह धारणा पूरी तरह से गलत' है कि घर-घर राशन वितरण योजना लागू होने के बाद उचित मूल्य की दुकानों का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा। दिल्ली सरकार ने पीठ को बताया था कि आंध्र प्रदेश, हरियाणा, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश और कर्नाटक के बेंगलुरु जैसे राज्यों में राशन की डोरस्टेप डिलीवरी योजनाएं हैं।
दूसरी तरफ केंद्र सरकार की ओर से अधिवक्ता ने दिल्ली सरकार की घर-घर राशन वितरण योजना का विरोध किया था। केंद्र ने पीठ को बताया कि इस योजना के लागू किए जाने से राज्य, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) की मूल संरचना के प्रभाव को कम कर सकता है।
केंद्र ने कहा था कि किसी भी राज्य सरकार को राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून की मूल संरचना में हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं देना चाहिए। केंद्र ने राशन की उचित मूल्य के दुकान को इस कानून का एक अविभाज्य अंग बताया था। केंद्र ने पीठ को बताया था कि एनएफएसए के अनुसार, राज्यों को अनाज दिया जाता है जो उन्हें भारतीय खाद्य निगम के गोदामों से लेना होता है और उचित मूल्य की दुकानों को देना होता है ताकि वे लाभार्थियों को उसका वितरण कर सकें।
सर्वोच्च न्यायालय ने 15 नवंबर, 2021 को उच्च न्यायालय के उस आदेश के खिलाफ केंद्र व अन्य की याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया था जिसमें दिल्ली सरकार को उचित मूल्य की दुकानों को खाद्यान्न या आटे की आपूर्ति को रोकने या कम नहीं करने का निर्देश दिया गया था। उच्च न्यायालय ने पिछले साल 27 सितंबर को दिल्ली सरकार को सभी उचित मूल्य की दुकान के डीलरों को पत्र जारी करके उन राशन कार्ड धारकों की जानकारी देने को कहा था, जिन्होंने राशन की होम डिलीवरी का विकल्प चुना था। साथ ही कहा था कि उचित मूल्य की दुकानों के डीलरों को पीडीएस लाभार्थियों के राशन की आपूर्ति करने की आवश्यकता नहीं है, जिन्होंने अन्य योजनाओं का विकल्प चुना है।


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